Date Archives January 2020

Panga movie review

इस वक्त इस बात को कहने में कोई दोराय नहीं होनी चाहिए कि वर्तमान समय में कंगना बहुत ही बेहतरीन अदाकारा हैं , पंगा केवल एक फ़िल्म भर नहीं बल्कि सपनों को पूरा करने में केवल जया निगम ही नहीं बल्कि भारत और दुनिया के अन्य देशों की “जया” भी पीछे हट जाती हैं ।
विवाह के बाद नौकरी छूटना या छोड़ना आम बात है तो खेलों की तरफ देखना तो और भी मुश्किल होता है । पति और बच्चों का साथ न देना या देने भर का नाटक भी देखा जाता है ।
अपने सपनों को छोड़ पति और बच्चों के सपनों और जरूरतों को पूरा करने में जुड़ जाना आज भी औरतें अपना परम सौभाग्य मानती हैं ।
पंगा फ़िल्म कंगना की अदाकारी के साथ साथ अश्विनी तिवारी की दाद देनी होगी जिन्होंने इतनी बारीकी से खेल,परिवार ,शादी और उसके बाद के जीवन को पर्दे पर उकेरा # देखना तो बनता है
साथ साथ नीना गुप्ता की एक्टिंग भी बहुत अच्छी है जिस तरह से उन्होंने एक मां का किरदार निभाया है  इस फिल्म को बहुत ही बारीकी से पिरोया गया सारे सपने पूरे नहीं होते लेकिन जिद्द हो तो उन्हें पूरा करने की तो कोई सपना अधूरा भी नहीं रह सकता
इसमें औरत अपनी बात को किस तरह से मनवाती है वो भी बहुत खूबसूरती के साथ दिखाया गया है फिल्म के  कुछ दृश्य तो आपका मन पूरी तरह से मोह लेते है मै पहले से ही कंगना का फैन हू इस फिल्म को देखने के बाद और भी ज्यादा बड़ा फं हो गया क्युकी एक औरत को सेंटरिक करके फिल्म को बड़े स्तर तक ले जाना कोई आसान बात नहीं होती लेकिन जिस तरह से इस फिल्म बनाया गया है उसमे परिवार , अपने सपने और नौकरी आदि की सभी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाया गया है इसलिए फिल्म को जरूर देखने जाइए और अपने सपनों को पूरा करने इच्छा को कभी मरने मत दीजिए
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कोशिश कामयाब होती है एक ना एक दिन

पिछले काफी से सालो से मै कोशिश कर रहा हू लेकिन मेरी सभी कोशिश नाकाम हो रही थी क्या इस बार भी मेरी कोशिश नाकाम होगी या साकाम ?

मेरी जिंदगी में काफी उथल पुथल हो रही थी जो मुझे खुद ही नहीं समझ आ रही थी कि ये सब मुझे किस और के जाएगी ? क्या यह सारी घटनाएं मुझे मेरी मंजिल की ओर इशारा कर रही थी ? या फिर कोई और रास्ता दिखा रही थी ?

इस साल यह जिंदगी का सबसे अहम साल होने वाला है जिसमे बताना कुछ ना चाहूं बस सबकुछ कर देना मै चाहता हू जो अभी तक सोचा था मैने जिस जिंदगी की दौड़ का हिस्सा होना चाहता हू बस अब वहीं रुख और तेज़ी से करना चाहता हू मै खुद को विपरित दिशा में ले जा रहा था लेकिन अब मै फिर से उसी और मुख कर रहा हू
बाहर से विमुख होकर भीतर की और अब मै बढ़ रहा हू

बहुत रुकावटें अाई बहुत लोगो ने रोकना चाहा कुछ ना कुछ होता ही गया और बहुत सारी चीजों में मै उलझ भी गया खुद पर काबू ना कर पाया और बेकाबू हो गया
जिसकी वजह से मेरा सालो का सपना कहीं गुम हो गया और मै अपनी जिंदगी में बहुत पीछे छूट गया

ना चाहकर पर भी अपनी मंजिल से भटक गया
अब उस मंजिल की ओर फिर से निकलने का वक़्त आ गया है। अब उन रुकावटों पर वो परेशानियां क्या फिर से आएगी
और यदि आएगी भी तो क्या मै उन परेशानियों की वजह से फिर रुक जाऊंगा ?

खुद को मजबूत करना है खुद से वादा था मेरा जो मुझे पूरा करना है। क्या वो वादा झूठा हो जाएगा या मै अपनी मंजिल की ओर निकल चलूंगा ? क्या अपना सपना पूरा कर सकूंगा ?

सवाल बहुत सारे है इस मस्तिष्क में कहीं मै फिर से कमजोर तो नहीं पड़ जाऊंगा ? फिर कहीं मै अपनी मंजिल को भूल तो नहीं जाऊंगा ? फिर कहीं रास्ता तो नहीं भटक जाऊंगा ?

मुझे मजबूत करने के लिए जीवन में कई ऐसे लोग आए जिन्होंने मेरे जीवन की सोच को सम्पूर्ण तरह से बदल दिया उनका मै हमेशा से शुक्रगुजार हूं मेरी आगे की यात्रा अब उन्हीं की वजह से तय होगी जिन्होंने मुझे झंझोड दिया है पूरी तरह से

मेरा दिमाग और दिल अब अपनी मंजिल की ओर सिर्फ पिछले बीते समय के कारण ही होगा उसी जीवन के कारण मेरे आगे के जीवन को दिशा मिल रही है।




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कुछ अटपटी थी तो कुछ चटपटी थी

जिंदगी एक भागम भाग दौड़ है जिसमे लाखो इच्छाएं है जिन्हें पूरा करने की एक नाकाम कोशिश है उन सभी इच्छाओं को पूरा कर फिर यही छोड़ जाना है ना कोई मुकाम पाना है ना कुछ कर दिखाना है फिर भी बस इस जिंदगी के साथ भागते ही जाना है।

बार बार असफल होने के बावजूद भी जितने और कुछ कर दिखाने की इच्छा का नाम ही है जिंदगी 
कुछ करके दिखाना भी है जिंदगी 
क्या करना और क्यों करना , किसके लिए करना 
यह भी ना समझ पाना है जिंदगी
और समझ जाना भी है जिंदगी 

बहुत सारे सपनो को साकार करने का नाम भी है
जिंदगी उन सपनों से हार कर बैठ जाना भी है,
जो सपने देखे थे उनके लिए फिर से उठ जाना है 
जिंदगी और उनके साथ फिर नए सपनो को देखना और 
उठ कर हिस्सा लेना भी है यह जिंदगी 

जिंदगी भी गणित के उस 0 और इंफिनिटी की तरह लगती है जो शुरुआत तो 0 से करती है और खत्म इंफिनिटी मतलब कभी ना खत्म होने वाली है यह जिंदगी 

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने की बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को जिंदगी कहते है। 

जीत और हार का सिलसिला है जिंदगी 
कभी जीत है तो हार भी है जिंदगी 

Tanha ji

Review

पिछले हफ्ते दो बड़ी फिल्में रिलीज हुई तानहा जी और छपाक
जिसमे ऐसा हुआ कि तांहा जी तन्हा तन्हा कहते हुए ऊपर निकल गई और छपाक़ धपाक से नीचे गिर गई
छपाक और तान्हा जी दोनों ही फिल्में सिर्फ एक बार देखने लायक है जितना इन दोनों फिल्मों का हंगामा मचाया जा रहा था दोनों इतनी गजब की नहीं है जितना लोगो ने फिल्म को देखने और ना देखने पर शोर मचा रखा था लेकिन दोनों फिल्म देखने के बाद यह निष्कर्ष निकला की यह दोनों फिल्में साल की सुपरहिट फिल्मों में से कोई एक नहीं है
जहां Tanha Ji को 3.5 की रेटिंग देनी चाहिए थी वहां लोगो ने बहुत ज्यादा ही कर रखी है और छपाक को 2.5 रेटिंग मिलनी चाहिए थी वहां उसे भी लोगो ने जबरदस्ती में ऊपर उठा रखा है।
वैसे लोगो के मन की बात भी के दू मै लोग दोनों ही फिल्म देखना चाहते थे लेकिन इतना सबकुछ उल्टा सबकुछ सोशल मीडिया पर फैला कर सब रायता कर दिया जिसकी वजह से Tanha Ji को फायदा हो ओर छपाक धपक से नीचे गिर गई
Tanha जी फिल्म में दो बड़े सुपरस्टार थे जिनकी एक्टिंग की वजह से यह फिल्म हिट हो गई वरना फिल्म में कोई खास दम नहीं था काजोल का फिल्म नाम ही था लेकिन एक्टिंग के नाम पर कुछ नहीं दिखाया गया वहीं दूसरी और दीपिका पादुकोण की एक्टिंग बहुत बेहतरीन है फिल्म में कहीं कही पर वो निराश कर देती है कुछ सीन में वो इमोशन नहीं झलकते लेकिन उनको इग्नोर किया जा सकता है ऐसा ही Tanha Ji में भी हुआ की इमोशन पर काम नहीं किया गया।
अगर आप सभी दीपिका पादुकोण के JNU जाने की नाराज़गी से उभर गए तो फिल्म देखकर आ सकते हो और TANHA JI भी देखिए पैसे वसूल है दोनों ही फिल्में
इन झगड़ों दंगे फसाद से कुछ नहीं मिलने वाला गुस्से में घर अपना ही जलता है दूसरे तो आकर हाथ सेकते है हुजूर इसलिए लोगो को हाथ सेकने का मौका ना दे
और मैं दोनों पक्षों को देखता हू , दोनों की बुराई और अच्छाई को सरहना करता हू मेरे लिए सभी समान है
ना मै किसी से नफ़रत करता हू ना ही प्रेम

TanhaJi movie review

Rohitshabd

जहरीले पेय पदर्थों का सेवन बंद करे

जब आप किसी चीज पर ध्यान नहीं देते तो वो आपके दिल और दिमाग दोनों से बहुत दूर हो जाती है और लगता है वो अब आपके आसपास है ही नहीं या फिर अस्तित्व ही ख़तम हो गया है ऐसा ही हुआ पेप्सी के साथ भी कल यह बोर्ड देखकर ध्यान आया कि यह भी जिंदगी का अहम हिस्सा था जिसे मै लगातार पिया करता था यह मेरी एक एडिक्शन ही थी क्युकी जब मै दिन का खाना खाता था तब भी यह चाहिए होती थी , और किसी भी समय पीने का मन करता था तो लेके आया करता था  लेकिन आज इसका ध्यान भी नहीं आता। यदि आपकी जिंदगी में कुछ अहम बाते जो आपको परेशान कर रही है तो उनकी ओर ध्यान देना बंद करदे ओर कहीं ध्यान लगाए बहुत जल्द ही आप पाएंगे कि वो आपकी जिंदगी से दूर है अब अब उनकी जगह कोई और लेने लग गया है। जिस चीज के लिए आप बहुत पोसेसिव थे अब वो धीरे धीरे ख़तम होने लग गई है
उस समय कोल्ड ड्रिंक की वजह से मेरा पेट बिल्कुल खराब होने लग गया था और मेरा पाचन तंत्र बिल्कुल नष्ट हो रहा था जब भी कुछ खाता मुझे पता नहीं था और यह परेशानी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही थी जिसका परिणाम मेरा मेरा पेट बिल्कुल खराब और में डरता था कुछ भी खाने से किसी भी समय मै कुछ खा नहीं पा पाता था।
मुझे बार बार पेट को साफ करने के लिए वॉशरूम जाना पड़ता था। और कोल्ड ड्रिंक की वजह से मेरे दांतो के कमजोरी आयी और आज लगभग 5 साल हो गए मुझे कोल्ड ड्रिंक को छोड़े हुए अब में सिर्फ कभी कभार मतलब 4-6 महीने में ले ली तो ठीक वरना नहीं क्युकी अब में कोल्ड के बारे में सोचता भी नहीं हू।
अब मै इस प्रकार के पेय पदार्थो से दूर रहता हू और दूसरो को भी यही सलाह देता हूं कि इस प्रकार के पेय पदार्थो से दूर रहे जूस, नींबू पानी , जलजीरा आदि   का सेवन अधिक से अधिक करे।

Stop drinking cold drink

पहाड़ गंज एरिया में तारो का जाल

पहाड़ गंज एरिया में कृष्णा गली घी मंडी चौक की तारे बहुत सारे लोगो के लिए एक ऐसा स्पॉट बना हुआ जिसे देख कर बहुत सारे लोग स्तब्ध हो जाते है , जिनको देखने के बाद लोगो के पास शब्द नही होते और उन तारो को देखकर फ़ोटो खिंचने लग जाते है।

जब विदेशी पर्यटक इस गली से गुजरते है तो वह इन तारो की फोटोज लेते है और इनकी ड्राइंग भी बनाते है आज से थोड़े टाइम पहले मेरी मुलाकात साशा बेजुरोव से हुई थी जो बहुत ही मशहूर फोटोग्राफर है उन्होंने भी इन तारो की बहुत सारी फोटोज ली एवं चित्र भी बनाया था।

कहने का तात्पर्य यह है कि यह तारे सभी को अचंभित करती है क्युकी यह बहुत नीचे है तथा आने जाने वालो को परेशानी भी होती है यह पूरी तरह से एक झुंड बनाए हुए है।

इनको यह नीचे लटकी हुई तारे बड़ी अदभुत सी लगती है मानो उन्होंने ऐसे तारो को नीचे की और कभी देखा ना हो यह नजारा कभी देखा ही ना हो इसलिए यह तारे उन्हें आकर्षित करती है परंतु यह तारे खतरनाक तारे है यदि किसी दिन कोई हादसा हो गया तो कौन कैसे बाख पायेगा एक तो पहाड़ गंज गालियां इतनी संकरी और उसके बाद यह नीचे लटकी हुए तारे जिनका कोई समाधान नही मिल रहा है।

क्या इनका कोई समाधान है ? क्या सरकार इन लटकी हुई तारो के बारे में कुछ सोच रही है , यह तारे सिर्फ पहाड़ गंज में ही नही है दिल्ली की काफी जगह ऐसी जहाँ इस प्रकार से तारे लटकी हुई है , नई सड़क, चावड़ी बाजार , चांदनी चौक, आदि जगहों पर भी इसी तरह से तारे नीचे की और लटकी हुई है तथा इससे भी बदतर हालात में है और इनका कोई समाधान होता हुआ नही दिख रहा है।

समय

हम सभी समय को सोचकर कभी जल्दी तो कभी डर सोचकर भाग रहे है लेकिन समय कहीं नहीं है समय सिर्फ हमारे द्वारा तैयार किया गया एक विचार है

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