Date Archives March 2020

मामा जी की प्यारी छत

छत के वो दृश्य मनमोहक वो किस्से
कुछ पुरानी यादे और कुछ पुरानी बाते
जो बिना मोबाइल, ओर कैमरे के अब भी कैद है
हमारी आंखों में हम संजोए वो दिन

आजकल तो बच्चे कैद कर लेते है
हर उस बात को अपने मोबाइल में
लेकिन हम कुछ भी कैद नही कर पाए
उस कैमरे में

क्योंकि
वो कैमरे वाला टाइम नही था
मोबाइल नही थे बस जो कैद हुआ
वो सब हमारी आंखों में चित्रित है

हमारी यादों में अब भी सजे हुए है
  वैसे के वैसे ही अब तक रखे हुए है
 
  वो सारे चित्र
एक एक पल अब भी हमारे जहन मैं उसी तरह से है
जैसे   हमने उस पल को जीया बेहद हो ओर फिर याद करके एक बार ओर जी रहे है

  आज वो यादे है छत की
  हमारे प्यारे मामा जी की छत
  जिस पर हम घंटो खेला कूदा करते थे
  लड़ते झगड़ते ( लड़ते झगड़ते तो शायद कभी थे नही हम , बस खूब मस्ती हम किया करते थे )

और भी बहुत कुछ बचपन में
मामा जी की वो प्यारी छत
जिसको भूल मैं अब तक भी ना पाया
आज 6 साल बाद छत आकर याद ताज़ा कर लाया

वो छत जिस पर गए हुए लगभग 6 साल बीत गए है
मामा जी की वो प्यारी छत ही है जिस पर हम कल फिर से गए

जिस छत पर हम पूरा दिन बिता दिया करते थे।

छत पर जाते ही मेरे दिमाग में
छपे हुए चित्र फिर से ताज़ा हो गए

आसपास के सारे मकान आज और बड़े गए
जो खाली थे घर , वो घर भी आज भर गए थे

वो आसपास के बच्चे भी अब और बड़े हो गए थे
बात मानो कल ही की हो जब हम घंटो छत पर खेला करते थे। थक हार कर कुछ देर हम सोया करते थे भरी दोपहरी में भी बस हम छत पर ही होया हम करते थे।

वो बारिश के दिन अब भी याद है  बारिश में हम नहा लिया करते थे बारिश से चौक गिला ना हो जाए वो जाल पर मोमजामा बिछाकर  इटो से ढक दिया करते थे

( और जब बारिश के दिन हुआ करते थे तब जाली पर
मोमजामा ढक उस पर ईंट हम रखा करते थे)

वो छत बड़ी प्यारी है उस छत से जुड़ी है
हम सबकी यादे बहुत सारी है।

रात को घर की लाइट जाने पर छत पर ही हम सो जाया करते थे
ओर सुबह  सूरज में चढ़ती धूप जब तक तेज़ ना हो जाए तब तक उठ कर हम नीचे नही आया करते थे।

जब छत पर हम सोते थे हमे सोने के लिए खाट मिला करती थी अब तो वो छत के साथ साथ खाट भी कही खो गयी है

रात को जब छत पर जाते थे सोने तब लेट कर हम बस तारे गिना करते थे जितने बाल उतने तारे इस बात बोलकर बात पूरी कर दिया करते थे

हम तारे गिनते तो कभी सप्तऋषि , तो कभी कुछ और हम बस ढूंढ करते थे पूरी रात तारो में बीत जाए ऐसी कोशिश हम किया करता थे कभी कभी तो ध्रुव तारा देखने की कोशिश में पूरी रात जगा करते थे।

सुबह से लेकर शाम तक छत पर ही दिन बीत जाता था,
ना हम नीचे आते थे ओर ना ही कही घूमने हम जाते थे

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

कुछ ख्याल हम भी करने लगे

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ सवाल हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना इन सवालो का
कुछ जवाब अब हम भी देने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ बात हम भी करने लगे है
कुछ मुलाकात हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल रखना इन मुलाकातों का
इन मुलाकातों की बात अब हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ याद हम भी करने लगे है
कुछ दीदार हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना तुम अपना, अपनी यादों में दीदार कर  तुम्हारा याद अब हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ अश्क़ बहने लगे है
कुछ आह भी हम भरने लगे है
जरा ख्याल रखना अश्क़ों का तुम्हारी याद आने से अश्क़ अब इन्ह आंखों से बहने लगे है।
कुछ ख्याल अब हम भी करने लगे है
के अब मुलाकाते जरूरी है
सब्र है हमे लेकिन इतना
बतादो के अब सब्र के इम्तिहान
से हम भी गुजरने लगे है

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है

मन की मनघड़ंत बाते

मनघड़ंत बाते इस मन की
मन भी ना जाने कैसी बाते घड़ता है
ये अजीब सी मनघड़ंत बाते करता है
कुछ किस्से खुद ही बुनता है
कभी गुस्से मैं होता है तो
कभी प्यार
जब ये बाते बुनता है
तब ये किसी की नही सुनता है
बस मनघड़ंत बाते ये बुनता है
कुछ देखी कुछ सुनी बाते ये मन करता है
मन की बात यह होती है
जब कोई लाइन मैं आगे आकर खड़ा हो जाता है ,
बिना मतलब हमे पीछे कर जाता है
लेकिन गुस्सा बहुत आता है
कुछ कह नही पाते हम बस कोसते हुए जाते हम
, जब कोई धक्का मार चला जाता है
सॉरी बोलकर अपना पीछा वो छुड़ा जाता है
जैसे सॉरी से सब कुछ ठीक हो जाता है ,
  जब कोई बिना मतलब के गाली देता है,
  छोटा समझकर कोई छेड हमे जाता है
जब कोई उम्र में छोटी लड़की भी लेडीज
सीट बोलकर उठा देती है ना शर्म आती है उसे ना लाज बस मेरे मन की गाली मेरे मन में रह जाती है
बिना मतलब रोड पर चलते हुए टक्कर कोई मार जाता है और पीछे मुड़कर भी नही देखता है बस अनदेखा कर मरता हुआ छोड़ वो देता है
बिना कान लीड लगाए मेट्रो और बसों में जब कोई अपना मोबाइल पर गाना बजाता है गुस्सा तो बहुत आता है
पर मन की बात मन में ही रह जाती है ,
जब गुटका खाकर बाहर बस के थूकता है
वो छीटे मुझ पर आती है लेकिन कुछ हो नही पाता है
जब पुलिस स्टेशन में एक FIR के लिए चक्कर लगता हूं हल कुछ निकल नही पाता है
जब एक केस के लिए कोर्ट के चक्कर लगता हूं
जब पुलिस वाला हफ्ता वसूल कर जाता है
डीटीसी बस का कन्डक्टर पूरे पैसे देने पर टिकट नही बनाता है बोलता है बैठ मेरे पास उत्तर जाना आराम से , और कई बार गलत टिकट वो बनाता है
आम आदमी हूं मुझे कुछ समझ नही आता है
गुस्सा तब आता है जब खाकी वर्दी वाला  भी गाड़ी पकड़कर चलन काट जाता है। रोकता है परेशान करता है चलान भी नही देता है बस 500 का नोट लेकर ही अब वो छोड़ता है

लेकिन तुम्हे उस बात से क्या ?

हाँ टूट तो मैं फिर से  गया हूं
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
हा रोता हूं फिर से कोने में बैठकर
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?

आंखों से अश्क़ बहते गए और दर्द बढ़ता गया तेरा इंतज़ार मैं करता गया जिंदगी को अपनी
साँसे बस तेरे नाम मैं करता गया
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
घबरा जाता हूं , सहम चुप फिर से  बैठ मैं जाता हूं
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
भीतर बहुत तकलीफ हो रही है , दुबारा दूरियों के एहसास होने पर
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
मैं भीतर से खाली खाली लग रहा हूं
तेरे जाने से मेरे दिल का कमरा खाली हो गया है
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
टूटा हुआ था मैं पहले से अब चकनाचूर भी हो गया हूं
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
( तेरी याद में तिल तिल मर रहा हूं
अपनी बची हुई साँसे गिन रहा हूं )
एक बार मर चुका था मैं
उसमे बची थी जो कुछ सांसे अब मैं उनका भी दम तोड़ रहा हूं ( साथ छोड़ रहा हूं मैं )
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
मैं मरकर जिउ या जीकर मरु फिर से
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
हाँ जिंदा हूं अब तक जिंदा लाश की तरह
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
गुजरते दिन और राते बीत रही है तेरे ख्यालो में
लेकिन
तुम्हे इस बात से क्या ?
मेरी नींद तेरी यादों में उड़ चुकी है मैं सो नही पाता हूं
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
मुझे तेरी याद आ रही है और मैं अब तुमसे बात करना भी चाहता हूं किंतु कर नही पा रहा हूं
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
बहुत मन कर रहा है दिल आज फिर रो रहा है
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
हा तेरी यादो से बाहर निकलने के लिए मयखाने में बैठ दो जाम भी पी रहा हूं
लेकिन तुन्हें उस बात से क्या ?
है चूर हूं नशे में उस सिगरेट के धुंए में जिसमे तेरा चेहरा भी धुन्दला जो जाए ओर तेरी याद ना आये
लेकिन उस बात से तुम्हे क्या
डूब गया हूं तेरी याद में और मेरी आंखों से अश्क़ रुकते नही
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?
तू मेरे खयालो से जाती नजी और मैं तेरे खयालो में आता नही
लेकिन तुम्हे उस बात से क्या ?
जो एक बार
बड़ी मुश्किल से भरोशा जताया था तुझ पर
लेकिन
तुझे उस बात से क्या ?
मैं बेइंतहा प्यार करने लगा था तुझे
लेकिन
तुझे उस बात से क्या ?
मैं पहली मोहब्बत में नीलाम होकर आया था
लेकिन
तुझे उस बात से क्या ?
मेरी पहली मोह्हबत का ज़ख्म भरा भी ना था 
तूने उसको कुरेद नासूर कर दिया
लेकिन
तुम्हे उस बात से क्या ?

कौन हो तुम ?

यु ही रूठ भी जाते हो ,
यु ही मान भी जाते हो
ना जाने
कौन हो तुम मेरे ?
कभी पास आते हो तो कभी दूर चले जाते हो ,
जिंदगी में रिश्ते बहुत देखे
लेकिन तुम कौनसा रिश्ता निभाते हो ?
ना समझ पाते हो ना समझा पाते हो
  फिर भी साथ हमेशा तुम ही निभाते हो ,
मेरी आँखों में देखो जरा हर पल
तुम ही नजर आते हो
भाग जाता हूं सबकुछ छोड़कर
लेकिन मेरे जिंदगी के हर विचार तुम आकार में तुम खड़े हो जाते हो ,
क्रोध भी लाता हूं, अहंकार भी लाता हूं
लेकिन प्रेम इतना गहरा है कि पिघल जाता हूं
समस्त विचारो में संसार नहीं दिखता
क्योंकि तुम्हारी छवि के साथ ही ठहर मैं जाता हूं
ना जाने कौन हो तुम?
जिसके बिना रह नहीं पाता हूं
  बस मौन मैं हो जाता हूं ,
  खुद को समझने और समझाने की चेष्ठा मैं करता हूं लेकिन तुम विचार बन मेरे मस्तिष्क में बैठ जाते हो
  क्यों ?
  अपनी ही सोच में मुझे डूबा कर बार बार चले क्यों चले जाते हो ?
  रूठे हुए दीखते हो तुम मुझसे लेकिन सबसे ज्यादा प्यार भी मुझे करते नजर आते हो
   यह कौनसा है सम्बन्ध जो तुम मुझसे निभाते हो ?

परिस्थितियां कैसी भी हो

जीवन का परिस्थितियों के साथ बड़ा गहरा संबंध है जीवन में अलग-अलग समय पर अलग-अलग प्रकार की परिस्थितियां आती- जाती है और यह सब परिस्थितियां हमारे द्वारा किये गए कर्मो के अनुसार ही आती है।
अच्छा और बुरा समय तो सबके साथ आता- जाता है सब अपने अपने तरीके से  अपनी परिस्थितियां निकालते है, कुछ लोग बुरा समय देखकर टूट जाते है तो कुछ निखर जाते है।
आप टूटना चाहते है या निखरना अब यह आप पर निर्भर करता है।
कुछ लोग किसी तरह से जीते है तो कुछ लोग किसी तरह से कौन बेहतर ढंग से जीता है ? यह निर्भर करता है उस समय पर तथा
आपके मस्तिष्क के विचारो पर निर्भर करता है
परिस्थितिया कैसी भी हो परंतु इंसान को हारना नही चाहिए हर एक व्यक्ति के जीवन में अलग अलग प्रकार की परिस्थितिया आती है।
सभी को अपनी परेशानिया और परिस्थितियां ज्यादा मुश्किल लगती है।
वह व्यक्ति किस प्रकार के निर्णय लेता है किस तरह से चलता है क्या संभल पाता है या नही यह उसका अनुभव ही तय करता है।
उसको संभल कर कदम बढ़ाना चाहिए और उस समय को बहुत सजगता से जीना चाहिए।
यह कहना हमारे लिए आसान है परंतु उस समय हर एक व्यक्ति की मानसिकता भिन्न होती है।
आप किस प्रकार के इंसान हो ? और आप अपने समय और परिस्थितितयो से किस प्रकार से सामना करते हो ?
यह आप पर ही निर्भर करता है कोई और आपको संभालने के लिए नही आता सिर्फ एक दिलासे के रूप में आपके साथ दिखाई तो देते है परन्तु वो साथ नही होते अक्सर परिस्थितियां देख कर लोग मुह मोड़ लेते है। लेकिन कुछ साथ भी होते है।
बुरा समय ही आपको आपके जीवन में सबसे बेहतर लोगो से मिलवाता है।
कुछ लोग खराब समय को देख कर भाग जाते है और
कुछ लोग समय को तब तक देखते है। जब तक वो समय निकल नही जाता।
जब तक वो ठीक ना हो जाए उस पर पूरी तरह से निगरानी रखते है की समय अब कोई हरकत तो नही कर रहा वह हर प्रकार का मौका ढूंढते है की समय या परिस्थितियां एक मौका दे और हम फिर से करवट ले अपनी परिस्थितयो को बदले वह लोग डर कर भागते नही है सामना करते है और हिम्मत से खड़े रहते है। आख़िरी वक़्त तक जब तक समय बदलता नही है।
कुछ लोग समय के साथ समझौता कर लेते है की हमारा तो समय खराब है, हम कुछ नही कर सकते है और हार कर बैठ जाते है।
फिर आगे वो उसी जगह खुद को एडजस्ट कर देते है जिसकी वजह से वे लोग अपने सपने , अपनी इच्छाये मार डालते है। तथा वे
कुछ लोग समय और परिस्थितियों को दोष देते है बस और कुछ भी नही करते ,  ना वो कुछ कर पाते है,
समय बलवान है ऐसा सोचकर लोग हार मान लेते है
समय के साथ जो दुख और अनेको चीज़ आती है उसको  भी साथ पकड़ लेते है और इंसान कमजोर पड़ जाता है हार मान लेता है तथा डरने लग जाता है जिसके कारण ना जाने वो क्या क्या कर बैठता है इस बात की समझ नही आती ओर वक़्त गुजर जाता है। परिस्थितियां उनको अपने साथ बहा कर ले जाती है।

मन

मन क्या है ? मन क्या चाहता है ?
मन शरीर का एक अंग नही है यह शरीर से अलग है जो हमारे शरीर को चलायमान रखता है स्वयं नित कार्यों में मग्न रहता है और शरीर को भी वहीं आदेश देना चाहता है
मन की गति बहुत तेज़ है शरीर की वह गति नहीं है शरीर धीमा है यदि शरीर में मन आवागमन की गति आए तो शरीर इस ब्रह्माण्ड में कहीं विचर सकता है परन्तु यह करने के लिए बहुत तपस्या करनी होगी

मन हमेसा हम नए नए कार्यो उलझता है मन सिर्फ नए कार्य ही करने चाहता है यह मन का स्वभाव है यह मन की  पृकृति है की यह सिर्फ नए की खोज में लगातार लगा रहे यह पुराने को भूल जाता है छोड़ देता है हर दूसरे पल में कुछ ना कुछ नया करने की इच्छा इस मन में रहती है जिसकी वजह से हम कुछ ना कुछ अलग अथवा नए कार्यों की तलाश में रहते है और उन्हीं कार्यो को करना चाहते है खाली बैठ नही पाते जिसकी वजह से  मन तो कभी इस दिमाग को व्यस्त रखता है खाने , घूमने , खेलने , आदि कार्य करने या कुछ भी सोचने आदि के कार्यो में हमेसा उलझाए रखता है

हम क्यों खाली खाली महसूस कर रहे है या करते है ?
क्या हमारे पास कुछ नही है करने को ?
या हम कुछ अलग कुछ नया हम करना चाहते है
  हम क्यों अपने आपको खाली खाली देखते हैै ?
 
क्यों हमारा  मस्तिष्क खाली खाली सा महसूस कर रहा है हमारा मन हमेसा नए कार्यो में नई चीज़ों की तरफ आकर्षित होता है तथा शरीर पुराने की मांग करता है जो पिछले दिन किया था उसी कार्य को करना चाहता है यदि हम पिछले दिन दिन में 2-4 के बीच सोए थे आज फिर शरीर उसी की मांग करता है परन्तु मन के साथ एसा नहीं है बिल्कुल भी नहीं है  मन तो नए कार्यो में लगाना चाहता है ये सिर्फ कुछ स्थानों पर शांति चाहता है जैसे बीते हुए दिन में
क्या हुआ था वही दुबारा चाहता है उसी को बार बार दोहराना चाहता है शरीर आलसी है मन नित नए कार्यो की अग्रसर होता है अर्थात नया चाहता है इसलिए हमेसा हम एक छोर को छोड़ते है तो दूसरे छोर की और भागते है एक कार्य पूरा नही होता बस दूसरेे कार्य में लग जाना चाहते है एक मिनट भी हमें यह हमारा मन हमे खाली बैठने नही देता बस किसी ना किसी कार्य में लगातार लगाए रखता है।
और इस मन को जिसने जीत लिया वहीं जीत जाता है और जो इससे हार गया वहीं हारा हुआ कहलाता है।