Posts in प्रेम

मेरे भीतर ही कही छिपे हो तुम

मैं तुम्हे टटोलता हूं दिल के हर एक कोने में लेकिन तुम दिखती नही हो ,

जब भी कोशिश करता हूं तुमसे दूर जाने की तुम बहुत करीब नजर आती हो लेकिन कहाँ हो ये नही पता चलता , तुम मेरी नजरो के सामने नही हो

बस हर एक मुक्कमल कोशिश है तुम्हे पाने की ओर दूसरी ओर भूल जाने की जो हो सकेगा वो कर बैठूंगा।

“मेरे ख्यालो में बस तुम आया ना करो”

यू बेवजह कही भी कभी भी
मेरे खयालो में “बस तुम”
आया ना करो
बेमतलब अब बस मुझे
तुम सताया ना करो
बिना पूछे जो तुम आ जाते हो
जब मर्जी ये जो तुम मेरे खयालो का
दरवाजा खटखटाते हो
मैं खोलता हूं दरवाजा तो
नजर नही आते हो
पता नही क्यों तुम
मुझे सत्ताकर भाग यू जाते हो
यह बेफालतू की जिद्द है
तुम्हारी मेरे खयालो में आने की
मुझे इस कदर सताने की
इसलिए
बात अब तो मेरी तुम मान जाओ
मुझे यू ना तुम सताओ , ना तड़पाओ
बस अब वापस आ जाओ
फिर हक से मेरे
खयालो का दरवाजा खटखटाना, तोड़ना और
भीतर आ जाना
सिर्फ तुम बस जाना
और फिर अगर
तुम चाहो तो रुलाना और सताना भी
लेकिन
मुझे छोड़कर नही तुम जाना

तुम्हारी शिकायत मुझसे है

तुम्हारी सारी शिकायते सुनूंगा , तुम्हे सुलझा लूंगा , तुम्हे लिखना है मुझे, तुम्हे सुनाना है मुझे, एक खामोशी हटानी है तुम्हारे भीतर की जो तुम्हे फिर से नायब करे तुम्हे वक़्त दूंगा तुम्हारे हिस्से का

कुछ ख्वाबो की डोर किसी ओर के पास है।

कुछ ख्वाबो की डोर किसी और के हाथ में होती हैजब वो साथ होता है तो जिंदगी ऊची उडान भर्ती है और जब उसका साथ छूट जाता तो ना जाने कहाँ जाकर ये जिंदगी गिरती है।

प्रेम क्या है ? यह कैसे बयान मैं कर पाउ हर छोर पर बस प्रेम ही प्रेम मैं पाउ।

चन्द लफ्जो में बयान क्या करू ?इस प्रेम कोमेरे सारे शब्द और मेरी उम्र बीत जाएलेकिनप्रेम का अर्थ पूरा मेरे शब्द भी ना कर पाएफिर भी एक नाकाम कोशिश सी हैकुछ बताने की, एक नया रिश्ता बनाने कीये संबंध वो हैजिसमे हर एक रिश्ता नाता समा जाता हैमत भेद दिलो मेंं जो है वो दूर हो जाता है ,असीम आसमान भी धरती की औढनी नजर आता हैजब कभी सतरंगी होता है आसमानतब यही आसमान एक छोर सेबाहे फैलाये दूसरे छोर को जाता हैतब देखो क्या मधुर संबंधधरती और आसमान का बन जाता हैयह प्रेम है जो धरती और आसमान कोएक करता हुआ नजर आता हैयह प्रेम हैजो पूरे ब्रह्मांड को एक शब्द में बांधे नजर आता हैयह प्रेमवो है जो ना शब्दो से बयान हो पाता हैना मौन सेयह प्रेम तो शब्द और मौन दोनो के पार ले जाता है।

मेरे दिल का हाल जब वो मेरे सामने से गुजर जाती है


मेरा एक तरफ़ा प्यार ना जाने
कितना बढ़ चुका है अपने
प्रेम का इज़हार करने के लिए
मेरा पागलपन पता नही मुझे
किस हद् तक बढ़ चुका है
जब वो मेरे सामने से गुजर जाती है
मेरी धड़कने तेज़ हो जाती है
सांसे रुक जाती है
बदन में ना जाने कैसी
सरसराहट सी आ जाती है
मेरे शब्द रुक जाते है मेरी नजर
उसकी नजरो से मिल नही पाती है
लेकिन वो तो
इतराती, इठलाती अपनी आंखे झुका
कर बस भागी चली जाती है
एक नजर भर देखती नही
बात नही करती वो मुझसे
बस मुझे और बेचैन कर वो जाती है
मैं घंटो इंतज़ार करता हूं उसका
उसके एक नजर भर देखने के लिए
अपने पहले प्यार का इज़हार करने के लिए
लेकिन वो नजर भर उठाके मेरी और
देखती हुई नजर नही आती है
बस अपनी सहेलियो के संग वो
बाते करती हुई चली जाती है
उसे जरा सा भी इल्म नही है की
मेरे सारे अरमान जो उससे
बात करने
के लिए उमड़ रहे थे
उनका गला घोट वो जाती है
बस मेरे पहले प्यार का पहला इज़हार
जो अब तक ना कर पाया हूं
उन सारे अरमानो को ज्यो का त्यों छोड़ वो जाती है

मैं तुम्हे अपने ख्यालो में भी पनाह नही दूंगा।

मैं तुम्हे अपने ख्यालो में भी पनाह नही दूंगा इतराओ मत अब तुम मुझे पता है तुम मेरी धड़कनों में धड़क रही हो बस अब तुम्हे मैं अपनी धड़कनों से भी निकाल दूंगा

आंखे भीग जाती है मेरी जब तेरी याद आती है

आँखे भीग जाती है मेरी

जब मैं तेरे बारे सोचता हूँ

दिन का चैन खो जाता है

और

रातो की नींद उड़ जाती है

सारे सपने भूल जाता हूं

ना सोता हूं ना जागता हु

पागलो की तरह बड़बड़ाता हुआ

लोगो को नजर आता हूं

जब मैं तेरे बारे में सोचता हूं

ना काम कर पाता हूं

ना खाली बैठ पाता हूं

तेरी याद में ना जाने कहाँ खो जाता हूं

तुझको भूल ही नही पाता हूं

फिर ये बात भी गलत लगती है

कि मैं तेरे बारे सोचता हूं

तू तो मेरे खयालो से नही जाती है

हर पल हर दम तू मेरी

सांसो की धड़कनों में धड़कती

हुई सुनी जाती है 

फिर कैसे कह रहा था मैं

की जब भी तू मेरी यादों में आती है

अब तो यह बात मेरी सांसो ने भी झुठलादी है

की जब तू मेरी यादों में आती है