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दिल्ली के चुनाव के बाद लोगो की प्रतिक्रिया


आप सभी एक बात समझिए हम लोग क्या देखते है ? क्या पढ़ते है ? टीवी देखते है और अख़बार पढ़ते है आजकल तो क्या दिखाया जा रहा है और क्या पढ़ाया हा रहा है यह सबको पता है इसके साथ ही मोबाइल के द्वारा हम सोशल मीडिया पर जो समय बिताते है उसमे भी बहुत सारी बाते झूठी होती है और कुछ वॉट्सएप बाबा का ज्ञान अब किस पर विश्वास करे ओर किस पर नहीं यह हम सभी के लिए एक चुनौती भरा विषय है।

हम सभी लोग अपने अनुभव पर वोट दे रहे है जैसा हम लोगो के साथ हो रहा है उसी के आधार पर वोट जाता है जो सुनते है देखते है बस वही सब इसी आधार पर वोट दिया गया है यह बात स्पष्ट हो चुकी है।

दिल्ली वालो के बारे में बहुत कुछ लोग बोल रहे है लगातार कुछ ना कुछ लिखा जा रहा है दिल्ली वाले मुफ्तखोर हो गए है दो कौड़ी की बिजली पानी के लिए बिक गए है।

दिल्ली की जनता ने फ्री के लिए कोई वोट नहीं किया उन्होंने काम भी किया इस बात से आपको सहमत होना चाहिए हर बात में नकारना गलत बात है। और काम नहीं भी किए ऐसा भी है। उसके लिए मै दुबारा लिखूंगा की उन्होंने क्या किया है और क्या नहीं

यह बात बहुत गलत है जिस प्रकार से लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए।

कौन किसको वोट देना चाहता है यह उसका मौलिक अधिकार है आप उसे उसका निर्णय लेने से नहीं रोक सकते

बहुत सारे विचार मंथन करते हुए लोगो ने अपना दिया है और इस बात को स्वीकार करना चाहिए

जीत अब किसी भी पार्टी की हुईं है इसका यह तात्पर्य नहीं है आपको देशद्रोही बोलने का अधिकार है दिल्ली देश की राजधानी है और यह अधिकार आपको बिल्कुल भी नहीं है कि आप अभद्र शब्दो का प्रयोग करे

अपने शब्दो पर नियंत्रण रखना अतिआवश्यक है बहुत जल्दी कुछ लोग अपना आपा खो देते है यदि आप स्वयं  विवेकी नहीं हो तो आप दूसरों को क्यों कोश रहे हो ??

खुद के विचार इतने सीमित दायरे में सिमट गए और आप इल्जाम दिल्ली की जनता पर लगा रहे है।

यह समय आत्ममंथन का है , देशमंथन, विचारमंथन का है दिल्ली मंथन का है अपने विचार ओर मत के लिए ही अपना नेता चुनने का अधिकार दिया है और उसके चलते ही दिल्ली का चुनाव तय हुआ है। अब आप इसमें घृणा के बीज ना बोए तो बेहतर है।

सोचिए और समझिए।

कुछ अटपटी थी तो कुछ चटपटी थी

जिंदगी एक भागम भाग दौड़ है जिसमे लाखो इच्छाएं है जिन्हें पूरा करने की एक नाकाम कोशिश है उन सभी इच्छाओं को पूरा कर फिर यही छोड़ जाना है ना कोई मुकाम पाना है ना कुछ कर दिखाना है फिर भी बस इस जिंदगी के साथ भागते ही जाना है।

बार बार असफल होने के बावजूद भी जितने और कुछ कर दिखाने की इच्छा का नाम ही है जिंदगी 
कुछ करके दिखाना भी है जिंदगी 
क्या करना और क्यों करना , किसके लिए करना 
यह भी ना समझ पाना है जिंदगी
और समझ जाना भी है जिंदगी 

बहुत सारे सपनो को साकार करने का नाम भी है
जिंदगी उन सपनों से हार कर बैठ जाना भी है,
जो सपने देखे थे उनके लिए फिर से उठ जाना है 
जिंदगी और उनके साथ फिर नए सपनो को देखना और 
उठ कर हिस्सा लेना भी है यह जिंदगी 

जिंदगी भी गणित के उस 0 और इंफिनिटी की तरह लगती है जो शुरुआत तो 0 से करती है और खत्म इंफिनिटी मतलब कभी ना खत्म होने वाली है यह जिंदगी 

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने की बाद दूसरा सपना देखने के हौसले को जिंदगी कहते है। 

जीत और हार का सिलसिला है जिंदगी 
कभी जीत है तो हार भी है जिंदगी 

दिल्ली की सरकारी बसे जिनमें पिछले 5 सालो से नहीं हुआ सुधार

दिल्ली की सरकारी बसे जिनमें अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है।

वैसे तो अरविंद केजरीवाल जी कहते है कि हमारी माता , बहने हमारी जिम्मेदारी है उनकी सुरक्षा , उनका आदर हम करेंगे लेकिन यह स्लोगन दर्शाता है कि कोई जिम्मेदारी कोई भागीदारी नहीं है।

मैने पहले भी कई बार फोटो लेकर सोशल मीडिया पर अपलोड किया है तथा काफी बार इसके बारे में कंपलेंट भी की है लेकिन उसका निष्कर्ष व परिणाम कुछ नहीं निकला दिल्ली की बसों में यह स्लोगन अभी तक नहीं बदला।

और कितना समय लगेगा ?

कौन इसकी जिम्मेदारी लेगा ?

क्या यह जिम्मेदारी नहीं है आम जनता की वह इस तरह की हरकत करने वालो को रोक कर उन्हें सजा दिलवाए

मेरा बचपन कही छूट गया है।

फिर से आज एहसास हुआ है मुझको
की मेरा बचपन कही छूट गया है

उन छोटी छोटी खुशियों से
शायद मेरा रिश्ता अब टूट गया

बारिश की उन बूंदों ने आज एहसास दिलाया है
बहुत दूर निकल आया हूं बचपन के
उन नन्हे नन्हे हाथो से , उन नन्हे नन्हे कदमो से
जो थका कभी नही करते थे
घंटो खेलने के बाद भी कुछ देर और खेल लू क्या ? बस यही कहा करते थे

वो बचपन की बाते बड़ी अजीब सी होती थी जो खुद को तो समझ आती थी लेकिन औरो को पागल बहुत बनाती थी

उसी के चलते आज एहसास हुआ की मेरा बचपन
कही पीछे छूट गया है

जिंदगी से जिंदगी का नाता
थोड़ा कम और थोड़ा ज्यादा
बस छूट गया है

सवाल बहुत किये अपने आपसे
जवाब यही था
की मेरा बचपन कही पीछे छूट गया है

आज फिर बारिश की बूंदों ने यह एहसास दिला दिया है
प्यार से भरा और प्यारा था मेरा बचपन जिसमे गम ना था , ये हर रोज की आपाधापी ना थी वो लड़कपन और कुछ शरारते थी , बतमीजी थी बहुत लेकिन दिल में मैल नही था

आज एहसास हुआ मुझे की मेरा
बचपन जो कही छूट गया है

बारिश में भीग जाने का डर नही था
बारिश में भीगने से घमोरियां ठीक हो जाएगी
इसलिए बारिश में भीग जाया हम करते थे
आज मोबाइल रखा है जेब में इस बात से डरा हम करते है

आज आधुनिक तकनीको ने छीन लिए वो सारे खेल
जिनकी वजह से ही होते थे हम बच्चो के दिल के मेल

घंटो मिट्टी में खेला हम करते थे
कपड़े गंदे होंगे इस बात से घबराया नही करते थे
आज हल्की सी शर्ट की क्रीज खराब न हो जाए
इस बात से भी चीड़ हम जाते है,

तब लड़ाई सिर्फ ताकत बढ़ाने के लिए होती थी
आज ताकत दिखाने के लिए लड़ा हम करते है।

उन छोटे छोटे कदम और
नंगे पांव से मिलो का सफर
तय हम कर लेते थे

कांटे चुभ रहे है या नही
इस बात पर भी सोचा हम नही करते थे

खेलते थे खूब
जब तक मन करता था
घर जाना है
हम इस बात पर भी सोचा नही करते थे
आज एक मिनट देर हो जाए
फ़ोन पर फ़ोन बज जाया करते है

थक जाने के बाद हम यह नही देखते थे
फर्श है या गद्दे वाला पिलंग बस जहा
जगह मिली सो जाया हम करते थे

एक टिफिन में चार लोग खा लेते थे
एक पिलंग पर चार लोग सो जाते थे
एक बल्ले से 10 लोग खेल लेते थे
3 दोस्त
3 रुपये के प्लास्टिक वाले अंडे में
1-1 रुपया मिलाकर ले आते थे।
हॉफ प्लेट चाऊमीन में 3 दोस्त घपड घपड खा लेते थे,
गली में जगह नही खेलने की तो गली को अपने तरीके से मोड़ हम लेते थे

एक किराये की साईकल लेकर
उस पर तीन लोग सवार हो जाते थे

लेकिन

आज मत भेदों ने इस तरह से घेर रखा है
की हम कहने लगे है यह तेरा है यह मेरा है

आज एहसास हुआ है कि
मेरा बचपन कही छूट गया है

अधूरी ख्वाइश

ना जाने कितनी ही ख़्वाइसे है मेरी
लेकिन
वो सारी ख़्वाइसे तुम पर आकर पूरी हो जाती है।

ना जाने कितनी उम्मीद है मेरी आंखों में तुम्हे पाने की तुम्हे अपना बनाने की
लेकिन
तुम्हारे ना कहने पर वो सारी उम्मीद टूटकर चकनाचुर हो जाती है

ना जाने इन आँखों में कितनी गहरी नींद है
जो पूरी ही नही होती
लेकिन तुम्हारी एक याद से वो सारी नींद टूट जाती है।

ना जाने कितना प्रेम है, जो कभी क्रोध ही नही आता
लेकिन तुम्हारे दूर होने पर वो भरम भी टूट जाता है।

ना जाने कितने अरमान है तुझे पाने के
लेकिन वो अरमान सारे फीके हो जाते है
जब तू कहती है की मैं किसी और का अरमान हूं
और मेरा अरमान भी कुछ और है

लगता है कितना अधूरा हूं मै तेरे बिना लेकिन
वो अधूरापन तब दूर हो जाता है जब तू पास आ जाती है

फिर दुबारा ये भी एक भरम में तब्दील हो जाता है जब तू मुझे छोड़ कर दूर चली जाती है

“लगता है सदियों से अधूरा हूं ‘तुम बिन’ फिर भी
ना जाने क्यों हर जन्म में साथ तेरा मेरा छूट जाता है”

क्या मेरी इन आंखों में अश्क़ है या मोती ?
जो समझ ही ना आते है
( मेरी इन आंखों में अश्क़ है या मोती यह मुझे समझ ही नही आता है )
लेकिन हाँ
जब जमीन पर गिरते है तो दरिया सा बन जाता है।

एक एह्सास है गहरा सा जो
तुम्हारे हर वक़्त पास होने का भर्म मिटाता है
और
यही एह्सास है जो मुझे तेरे हर जन्म में करीब लाता है

रोहित शब्द

जिंदगी बस तुम ही हो

ख्वाब इतने सजाये कुछ मजाक बन गए तो कुछ खाक हो गए उन सभी ख्वाबो को को सवारने की कोशिश में आज हम राख बन गए।

प्रेम वो है जिसको मेरे शब्द बयान नही कर पाए

चन्द लफ्जो में बयान क्या करू ?
इस प्रेम को
मेरे सारे शब्द और मेरी उम्र बीत जाए

लेकिन

प्रेम का अर्थ पूरा मेरे शब्द भी ना कर पाए
फिर भी एक नाकाम कोशिश सी है
कुछ बताने की, एक नया रिश्ता बनाने की

ये संबंध वो है

जिसमे हर एक रिश्ता नाता समा जाता है
मत भेद दिलो मेंं जो है वो दूर हो जाता है ,

असीम आसमान भी धरती की औढनी नजर आता है
जब कभी सतरंगी होता है आसमान
तब यही आसमान एक छोर से
बाहे फैलाये दूसरे छोर को जाता है

तब देखो क्या मधुर संबंध
धरती और आसमान का बन जाता है

यह प्रेम है जो धरती और आसमान को
एक करता हुआ नजर आता है

यह प्रेम है
जो पूरे ब्रह्मांड को एक शब्द में बांधे नजर आता है

यह प्रेम
वो है जो ना शब्दो से बयान हो पाता है

ना मौन से
यह प्रेम तो शब्द और मौन दोनो के पार ले जाता है।

वर्ल्ड कप 2019 का फाइनल मैच

वर्ल्ड कप फाइनल 2019 का आख़िरी मैच जिसको सभी देश रहे थे क्युकी इस बार इतिहास के पन्नो पर एक नया नाम आना था जो अब से पहले कभी नही हुआ पहले भी ऐसा हुआ है कि जो एक ऐसी टीम जो वर्ल्ड कप कभी नही जीत पायी परंतु फाइनल तक पहुँची है लेकिन इस बार बात और अलग हो गयी इस बार आमने सामने दोनो ही ऐसी टीम जो आज तक कभी भी फाइनल नही जीती जिनहोने कभी वर्ल्ड कप नही उठाया था।

इसलिए इस बार लोगो मे ज्यादा उत्साह था और हुआ भी कुछ इस बार के वर्ल्ड कप फाइनल मैच में

क्रिकेट अनिश्चित घटनाओं का खेल है कब क्या होगा? यह किसी को नही पता इस खेल में

इस बार वर्ल्ड कप प्रतियोगिता राउंड रोबिन जिसमे सभी टीमें एक दूसरे के साथ खेलती है इस बार प्रतियोगिता में 10 टीम थी

यह 2019 का 48वा मैच था ओर आखिरी मैच था।

वर्ल्ड कप फाइनल का मैच बिल्कुल ऐसा की आप नाखून चबाने लग जाए यह मैच बहुत कमजोर दिल वालो के लिए बिल्कुल नही था।

इस बार फाइनल में दो ऐसी टीम पहुँची जो कभी वर्ल्ड कप नही जीती थी अब दो में से एक ऐसी टीम को वर्ल्ड कप की ट्रॉफी मिलनी थी जो पहले कभी नही जीती थी एक नया विश्वविजेता इस दुनिया को मिलना था।

इंगलेंड और न्यूजीलैंड इन दोनो टीमो ने इस मैच को जितने के लिए सबकुछ कर डाला , किसी भी समय ऐसा प्रतीत नही हुआ की मैच एक तरफ का है, पूरी तरह से कांटे की टक्कर थी और लगातार खेल में रोमांच बना हुआ था।

मैच के आखिरी ओवर में एक ओर ऐसा ट्विस्ट हुआ जो इंग्लैंड के लिए जीत में बदल गया मार्टिन गुप्टिल ने थ्रो कर विकेट की और मारा तो बेन्स्टॉक के बल्ले से लगा जो बाउंडरी के पर हो गया जिस वजह से इंग्लैंड को 2 रन भागने पर ओर 4 रन ओवरर्थ्रो के मील टोटल 6 रन जो इंग्लैंड को जीत के ओर करीब ले गए अगर क्रिकेट की रूल बुक में यह 5 रन होने चाहिए थे।

मैच आखिरी बॉल तक किसी के पाले मैं नही रहा और मैच टाई हुआ पहले खेलकर न्यूजीलैंड की टीम ने 241रन बनाये और इंग्लैंड ने भी 241 रन बनाये इस वजह से मैच टाई हुआ और अब सुपर ओवर होना था।

फिर दुबारा सुपर ओवर के द्वारा मैच का निर्णय होना था जिसमे पहले इंग्लैंड खेली ओर 6 बॉल पर इंग्लैंड ने 15 रन बनाये और दूसरी 6 बॉल न्यूजीलैंड ने खेली ओर न्यूजीलैंड ने 6 बॉल पर 15 रन बनाये इस वजह से सुपर ओवर भी टाई हुआ

अब मैच का फैसला उस आधार पर होना था जिस टीम ने अपनी एक इनिंग में सबसे ज्यादा चौके मारे थे और इसमें इंग्लैंड की टीम ने सबसे ज्यादा चौके मारे जो 24 थे और न्यूजीलैंड ने 16 चौके मारे तो इस लिहाज से न्यूजीलैंड की टीम हार गयी 8 चौके कम होने पर न्यूजीलैंड की हारी और इंग्लैंड की टीम विश्वविजेता बन गयी।

ऐसा पहली बार हुआ है की इंग्लैंड की टीम वर्ल्ड कप जीती।

इससे पहले ज्यादातर वर्ल्ड कप के फाइनल मैच एक तरफा मैच रहे जैसे की पिछले वर्ल्ड कप में भी हमने देखा न्यूजीलैंड की टीम फाइनल में थी परंतु ऑस्ट्रलिया ने आसानी से वो मैच जीत लिया था।

वर्ल्ड कप का फाइनल मैच सबसे यादगार मैच बना क्रिकेट के इतिहास में यह और भी यादगार हो सकता था यदि वर्ल्ड कप की ट्रॉफी का विजेता इन दोनो टीमो को बना दिया जाता क्योंकि देखा जाए तो कोई भी टीम नही हारी। फैसला हुआ बाउंड्रीज के आधार पर जिसकी सबसे बाउंड्रीज वो टीम विजेता

वो अंत में इंग्लैंड को विजेता घोषित किया गया

इस फैसले से बहुत सारे क्रिकेट के समर्थक नाराज हुए और बॉलीवुड सिनेमा के बड़े बड़े कलाकार ने भी इस फैसले का विरोध किया।

Amitabh bachchan T 3227 – आपके पास 2000 रूपये, मेरे पास भी 2000 रुपये,
आपके पास 2000 का एक नोट, मेरे पास 500 के 4 …
कौन ज्यादा अमीर???

ICC – जिसके पास 500 के 4 नोट वो ज्यादा रईस..
#Iccrules😂😂🤣🤣
प्रणाम गुरुदेव
Ef~NS