साक्षी भाव

जीवन को जीने के लिए
जीवन आपको बहुत कुछ सिखाता है
क्या है वो? और क्या है ?
अब इस समय उस समय की मांग
जब आप कुछ समझना चाहते हो परन्तु आपको कुछ समझ नहीं आ रहा हो और जवाब मांगने पर भी जवाब नहीं मिल रहा हो तो क्या करना चाहिए ?
यहां
अब बस एक काम कीजिए चुप होकर बैठ जाए और देखिए हो क्या रहा है यह जीवन किस प्रकार से संचालित हो रहा है किस तरह से
स्तिथि ओर परिस्थिति यह दोनों मिलकर आपको समझाना शुरु करेगी
अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है बस ठहरिए ,
इधर उधर मत भागिए बस देखिए बैठकर यही क्युकी अब यही
समय की मांग है।
जिसे हम यह भी कह सकते है जो हो रहा है उसे जागरूकता के साथ देखो , साक्षी भाव में देखो , ध्यानपूर्वक देखो
अब प्रकृति आपको स्वयं ही सबकुछ बताना शुरू कर देगी
आपके आसपास की घटनाओं के माध्यम से , पेड़ पोधों से , लोगो से , हवाओं से , ध्वनियों से हर उस चीज से आपको समझ आना शुरू हो जाता है जब आप शांत होकर बैठ जाते है शोर में , भागने में आपको कुछ समझ नहीं आता कि यह सब क्यों हो रहा है परन्तु जब शांत , मौन बैठ जाते है तब आप अपने भीतर की गहराई में उतर जाते है ओर आप उस गहराई से समझने लगते है यह सब कैसे हो रहा है आपको आपका आसपास का वातावरण समझने लग जाता है।

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