Posts tagged 2019

परीक्षा

परीक्षा

हम सबका ऐसा सोचना है कि परीक्षा के बल विद्यालय जीवन में ही होती है। परंतु विद्यार्थी चाहे विद्यालय में शिक्षा ग्रहण करता हो या फिर किसी विश्वविद्यालय में परीक्षा उसका एक अभिन्न अंग होता है। पूरे साल में किसी विद्यार्थी ने क्या किया क्या नहीं किया क्या कितना उसे समझ आया इन सब का आकलन करना ही परीक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। सच पूछिए तो केवल पूरे साल की विद्यार्थी के ज्ञान को आप इनको ही परीक्षा के रूप में रखा जाता है,
यह विद्यार्थी के ज्ञान का आकलन का एक तरीका मात्र है।       

परंतु आज के समय में विद्यार्थियों के मन में परीक्षा का एक ऐसा डर बैठा हुआ है, कि उस डर की वजह से न जाने कितने ही विद्यार्थी मानसिक तौर से बीमार हो रहे हैं।
आज के समय में मानसिक बीमारियों की बहुत बड़ी बाजार परीक्षा का डर भी है। 

परीक्षा में अपने आप में कोई डर होने का मतलब नहीं है परंतु हम जब प्रतिस्पर्धा पर आते हैं विद्यार्थी पर जबरदस्ती का प्रभाव डालते हैं और किसी दूसरे की तरह होने की चाह उस विद्यार्थी को मानसिक व्याधियों से ग्रस्त कर देती है। हर विद्यार्थी की अपनी एक क्षमता होती है और उसी क्षमता की पहचान के लिए ही परीक्षा निर्धारण किया गया है।  हर बार परीक्षा का अर्थ केवल इतना है कि विद्यार्थी अपनी क्षमता को जाने और अपने आप से प्रतिस्पर्धा करें और अगली बार अपनी पिछली क्षमता से अच्छा प्रदर्शन करें और वह अपनी कमियों को जान सके अपनी गलतियों को सुधार सकें। पिछली परीक्षा में की गई अपनी गलतियों को सुधारने के लिए परीक्षा के परिणाम दिए जाते हैं।

परंतु किसी भी विद्यार्थी परीक्षा में आए उसके अंको के माध्यम से ही जांचा नहीं जा सकता हर एक विद्यार्थी या हर एक बालक किसी न किसी एक विषय में अच्छा होता है। या फिर  ऐसा कहा जाए कि हर कोई विद्यार्थी हर एक विषय में अच्छा नहीं होता हर किसी की अपनी पसंद वह अपनी इच्छाएं होती है जिस विषय में विद्यार्थी की इच्छा अच्छी है इच्छा शक्ति रखती है उस विषय को वह जल्दी और आसानी से सीख सकता है।

  परीक्षा केवल विद्यार्थियों के लिए ही नहीं परंतु यह तो प्रत्येक मनुष्य के लिए जीवन के हर मोड़ पर देखने को मिलती है। समय-समय पर मनुष्य को परीक्षा की घड़ी का सामना करना पड़ता है। और उनसे निकलने के लिए मनुष्य को नए-नए तरीकों से कोशिश करनी पड़ती है यह पूरा जीवन कई पड़ाव पर परीक्षाएं लाता है।

Written by Pritam Mundotiya

Covid19

कोविड-19 कोरोनावायरस एक ऐसी बीमारी जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है जो कि इस वायरस से बचा हो।

अब यह बीमारी कोई प्रकृति का प्रकोप है या फिर बनाया गया कोई वायरस यह तो हम नहीं जानते परंतु हम तो सिर्फ इसके परिणामों को ही देख रहे हैं ऐसी बीमारी ना तो कभी आई है ना ही कभी आए हम यही कामना करते हैं।इसे बीमारी की जगह महामारी कहना और ज्यादा ठीक रहेगा। जोकि चाइना के वुहान शहर से शुरू होकर इटली पहुंची और इटली से सारी दुनिया में पहुंची।

दुनिया के बड़े बड़े देश जो हर चीज में विकास पूरक है वह भी आज इस वायरस के आगे घुटने टेके खड़े हैं। और हमारे देशवासियों का तो क्या कहना यह हमारे देश वासी हैं जो महामारी में भी लोगों का फायदा उठा रहे हैं जब शुरुआत में वायरस की खबर आई तो पूरी मार्केट से सैनिटाइजर गायब कर दिए ब्लैक में बेच रहे हैं 4:30 हजार का एक टेस्ट हो रहा है जो कि व्यक्ति को पहले भी कराना जरूरी है और ठीक होने के बाद भी कराना जरूरी है अगर एक इंसान के घर में 4 लोग भी हैं तो 18000 पहले और 18000 बाद में यानी कि ₹36000 वह सिर्फ टेस्ट टेस्ट में खर्च कर रहा है आखिर आम आदमी के पास इतना कौन सा खजाना है कि वह इतना खर्च करें सिर्फ टेस्ट टेस्ट के ऊपर अगर अस्पतालों की बात करें तो किसी एक मरीज को रखने के लिए ₹50000 लाख रुपए प्रति दिन के हिसाब से भी वसूले जा रहे हैं क्योंकि कोई ट्रीटमेंट बना ही नहीं है सुरक्षा है घर पर रहकर भी ठीक हो रहे हैं बीमारी की वजह से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है अर्थव्यवस्था बिल्कुल पटरी पर आ गई है न जाने कितने उद्योग धंधे कारखाने सब बंद हो गए हैं कितने ही लोग बेरोजगार हो गए कितने ही लोगों का घर खर्च का पैसा नहीं है बच्चों की फीस लेने के लिए नहीं है क्या तो आज ही खाएं और क्या करें और जिन लोगों का काम छूट गया है क्या उनको कोई राहत है अगर कुछ लोग पेट भरने के लिए खाना भी दे रहे हैं तो सिर्फ पेट भरने से ही इंसान का जीवन नहीं चलता इंसान के जीवन में शिक्षा जीवन स्तर भी कुछ मायने रखता है इस बीमारी ने सब की छवि एकदम मिटा दिए। अमेरिका देश चौकी दुनिया की सुपर पावर होने की दावा करता था आज कोरोनावायरस के मारे अपने दरवाजे पूरी दुनिया के लिए बंद किए बैठा है परंतु एक बात और देखने में आई है हमारे देश भारत में लोगों में जागरूकता की बहुत कमी है जब तक हमारे स्वयं के ऊपर ना बीते तब तक हम जागरूक नहीं होते।कोरोनावायरस या कोविड-19 आज के समय में एक ऐसी बीमारी है जो भारत नहीं पूरे विश्व में फैल चुकी है और इसकी चपेट में आ चुका है बीमारियां बहुत है इस दुनिया में वर्तमान में कई कारण भी है परंतु विषाणु जनित बीमारी सबसे खतरनाक आज के समय में है बीमारी के वैसे तो कोई कारण होते हैं जैसे कि बैक्टीरिया प्लाज्मोडियम सूक्ष्म जीव आदि परंतु आज के समय में हमारा रहन सहन भी बीमारियों का एक बड़ा कारण बन चुका है हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कम हो चुकी है भागदौड़ भरी जिंदगी और शारीरिक क्षमता को हमने बिलकुल छोड़ दिया है शारीरिक कार्य बिल्कुल कम कर दिया है अधिकतर ऑफिस में एक ही सीट पर पूरा दिन एक ही बैठा रहता है मैं तो कोई शारीरिक श्रम करता है ना उसे कोई पसीना आता है ना वह पर्यावरण के वातावरण के संपर्क में आता है एक कंप्यूटर चेयर कि आज के समय में इंसान के जीवन बन गया है। हमने पर्यावरण से जैसे-जैसे डोरी बनाना शुरू किया है हम बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं और पूरे विश्व को भी हमने खतरे में डाल दिया है विषाणु को इस पूरी दुनिया में कहीं कोई इलाज नहीं है विषाणु से केवल बचाव किया जा सकता है हमें भी अपनी ओर से पूरी सावधानी का पूरा बचाव रखना चाहिए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए लापरवाही बिल्कुल नहीं बदलनी चाहिए हम जानते हैं कि पूरे विश्व में कितने व्यक्तियों की मृत्यु किस वायरस की वजह से हो चुकी है इसलिए हमें जितना हो सके सावधान रहना चाहिए घर पर रहते हुए हमें सभी देशों का पालन करना चाहिए। अपने आप को प्रकृति से भी जोड़ना चाहिए शारीरिक श्रम करना चाहिए थोड़ा व्यायाम भी जरूरी है भोजन मैं भी हमें बदलाव करना चाहिए

Written by Pritam Mundotiya

थोड़ी बेखबरी थी

मेरी जिंदगी में
बस थोड़ी बेखबरी थी
कुछ सहमी
कुछ अकड़ी थी
एक आहट थी
दबे पाँव की सरसराहट थी
तभी मेरी एक बाह ने
दूसरी बाह पकड़ी थी जो
इस कदर जकड़ी थी मानो
लिपटी आग से एक लकड़ी थी
जिसमे मेरी जिंदगी अटकी थी
कोई एक राह सी भटकी थी

मेरी जिंदगी