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मोबाइल फोन

मोबाइल फोन          

 
मोबाइल फोन भी टेलीफोन का ही एक दूसरा रूप है। टेलीफोन का अर्थ होता है दूरभाष यंत्र और मोबाइल शब्द का अर्थ होता है चलता फिरता हुआ, तो इस प्रकार मोबाइल फोन का अर्थ हुआ चलता फिरता हुआ दूरभाष यंत्र। प्राचीन समय में हमारे ऋषि मुनि अनंत समय तक साधनाएं किया करते थे और अपने विचार सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति तक आदान प्रदान किया करते थे। जैसे कि आज के युग में हम टेलीपैथी के नाम से भी जानते हैं।

परंतु आज हमें इस कार्य के लिए कोई मेहनत करने की, कोई साधना करने की तथा समय व्यर्थ करने की जरूरत नहीं है। हमारे पास एक छोटा सा यंत्र जिसे हम  मोबाइल फोन कहते है वह ऐसा यंत्र है जिससे कि हम पूरे विश्व में कहीं भी किसी से भी कभी भी बात कर सकते हैं अपने विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। और जैसा कि हमने पौराणिक कथाओं में पड़ा है कि ऋषि मुनि लोग ध्यान लगाकर दूर बैठे व्यक्ति के बारे में भी देख लिया करते थे। आज इस कार्य के लिए हमें कोई ध्यान लगाने की जरूरत नहीं है। हमारे मोबाइल फोन में ही इस तरह के कार्य आसानी से हो सकते हैं। हम लोग वीडियो कॉलिंग या छायाचित्र के द्वारा किसी भी व्यक्ति से उसे देखते हुए बात कर सकते हैं। केवल एक छोटे से मोबाइल फोन की सहायता से , बस केवल हमें आवश्यकता है तो उसमें इंटरनेट सुविधा डलवाने की

           एक लंबे समय से हमारी सभ्यता में घड़ियां बांधने का प्रचलन चल रहा था। जब भी हमें समय देखना होता था तो घड़ी की ओर इशारा जाता था घड़ी की और हमारी नजर जाती थी परंतु आज के समय में इस मोबाइल फोन ने हमसे कलाई घड़ियों का प्रचलन भी बहुत ही कम कर दिया है।आज के समय में जब भी हमें समय देखना होता है हम मोबाइल फोन की तरफ एकदम से जाते हैं। यहां तक कि आजकल तो मौसम विभाग की खबरें भी मोबाइल फोन पर देख लिया करते हैं। छोटी बड़ी घटनाओं के लिए हम लोग केलकुलेटर यूज किया करते थे परंतु इस मोबाइल फोन ने  हीं उस कैलकुलेट का भी अब काम खत्म कर दिया है।
          
हमें डायरी लिखने के लिए एक डायरी नोटपैड और कलम की आवश्यकता होती थी परंतु आज के समय में डायरी के सभी फीचर्स हमें इस मोबाइल फोन में आसानी से उपलब्ध है, हमें अपने साथ में कोई डायरी लेकर घूमने की आवश्यकता नहीं है। याद कीजिए वह पुराने दिन जब लोगों के फोन नंबर हम डायरी में लिखा करते थे और वह टेलीफोन डायरेक्टरी आया करती थी जिसमें किस शहर के सभी जरूरी फोन नंबर लिखे होते थे, परंतु आज न जाने वह डायरेक्टरी कहां खो गई है। दुनिया भर की जानकारी हम पल भर में केवल एक इंटरनेट कनेक्शन की सहायता से हमारे फोन में ही देख सकते हैं।

इसमें मनोरंजन के लिए भी बहुत कुछ है। हां आज के समय में टेलीविजन का प्रचलन भी इसने काफी कम कर दिया है। हमें जो भी देखना होता है सीधा यूट्यूब ऑन किया और देख लिया,  चाहे आप को कुछ भी सीखना हो आप इस मोबाइल फोन की सहायता से बहुत आसानी से सीख सकते हैं।
अगर आप बेहतरीन खाना खाने के शौकीन है या खाना बनाने के तो आप आसानी से खाना बनाना भी इस पर सीख सकते हैं। आज के समय में आप दुनिया में कहीं भी जाएं आपको किसी से रास्ता पूछने की आवश्यकता नहीं है इस मोबाइल फोन ने आपको एक मैप की सहायता दी है जिससे कि आप आसानी से पूरी दुनिया के रास्ते की जानकारी पल भर में प्राप्त कर सकते हैं।

छोटे बच्चे हो या बड़े सभी के लिए मनोरंजन के साधन मोबाइल फोन पर उपलब्ध है।                                            परंतु इस मोबाइल फोन में कुछ अच्छाइयां है तो कई बुराइयां भी है। हमारे समाज कि काफी चीजें आज हमें देखने को नहीं मिलती। जब मोबाइल फोन नहीं था तो सभी बच्चे एक-दूसरे के साथ मैदान में खेला करते थे हस्ट पुष्ट  भी रहते थे और उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहता था, जबकि आज के समय में सभी बच्चे सिर्फ मोबाइल फोन गेम्स में लगे रहते हैं जिससे उनकी आंखें भी कमजोर होती है और और शरीर भी कमजोर होता है। एक ही घर में रहते हुए हम एक दूसरे से बात नहीं कर पाते केवल इस मोबाइल फोन की वजह से।

इस मोबाइल फोन की वजह से हम आज इतने व्यस्त हो गए हैं कि बस पूछिए मत क्युकी इस बात आकलन करना अब बहुत मुश्किल हो चुका है।

कोई भी कभी भी आपको फोन कर देता है। चाहे सामने वाला किस भी  परिस्थिति में है इस से कोई मतलब नहीं। आप चाहे बाथरूम में हो या बेडरूम में यह कभी भी बज जाता है। कभी-कभी तो आधी रात में फोन बजता है तो इतना गुस्सा आता है कि बस क्या कहें। क्युकी दूरियां घत गई है कभी भी किसी को आपकी याद आती या कोई काम होता है तो बस बटन दबाए ओर आपसे बात करना शुरू आप व्यस्त है या नहीं इस बात का उन्हें क्या पता ??

सच्ची मित्रता इस फोन की वजह से खो गई है। वह सच्चे मित्र जो साथ रहा करते थे खेला खुदा करते थे आज न जाने कहां गुम हो गए हैं। आज इस मोबाइल फोन की सहायता से सोशल साइट्स पर हम चाहे हजारों मित्र बना ले परंतु एक सच्चा मित्र हमें देखने को नहीं मिलता है आज के समय के बच्चों में शायद इसी वजह से आज के समय के बच्चों में काफी सारी मानसिक बीमारियां भी पनप रही है। परीक्षाएं पहले भी होती थी बच्चे पहले भी पढ़ा करते थे, परंतु इस तरह के मानसिक विकार केवल आज के बच्चों में ही देखने को मिलते हैं।  

अंत में अपने शब्दों को विराम देते हुए केवल यही कहना चाहूंगा कि विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को तो आसान किया है लेकिन कई सारी बुराइयां भी दी है।

किसी भी चीज में कुछ अच्छाइयां होती है तो कुछ बुराइयां भी होती है, यह केवल हम पर निर्भर करता है कि हम किसी भी वस्तु का या किसी भी चीज का कितने अच्छे से इस्तेमाल करना जानते हैं यह कितने अच्छे से इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई भी वस्तु उसके लिए पात्र व्यक्ति के हाथ में ही शोभा देती है अपात्र व्यक्ति के हाथ में तो गलत ही होगा। आज के समय में हम छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल दे देते हैं जो कि मुझे लगता है ठीक नहीं है। मुझे तो अपना स्कूल खत्म होने के बाद में मोबाइल मिला था और मेरा यही कहना है कि कम से कम विद्यालय जीवन में तो बच्चों को मोबाइल से दूर रखा जाए।         

  धन्यवाद

Written by Pritam Mundotiya

Corona covid 19

कोरोना कोविड-19 ऐसे वायरस का नाम है जो आज के समय में पूरे विश्व में तेजी से फैल चुका है कोविड-19 के संक्रमण की गति भी उसी तरह है जिस तरह एक छोटी सी चिंगारी पूरे जंगल में पलक झपकते ही आग लगा देती है कोविड-19 संक्रमण जानलेवा भी साबित हुआ है इससे कई लाख लोगों की मृत्यु हो चुकी है यह संक्रमण तेजी से फैलता है और यह वायरस हर वर्ग सभी व्यक्ति बूढ़े बच्चे जवान और प्रत्येक लिंक के व्यक्ति को अपने संक्रमण से प्रभावित कर उनके जीवन को आघात पहुंचा रहा है कोविड-19 का इतिहास बहुत पुराना है यह कोरोनावायरस परिवार का ही सदस्य हैं अगर हम इतिहास के तरफ रूख करें और अपने बीते हुए कल को याद करें तो करोना RNA वायरस के समूह का सदस्य है जो कि स्तनधारियों तथा पक्षियों में पाया जाता है।                                                                     यह वायरस संक्रमण फैलाता है (Respitatory infection)कहते है  जुखाम गले में दर्द और सांस लेने में दिक्कत आती है कोरोनावायरस जैसे कि ऐसे SARS , MERS ,  कोविड-19 है  इस वायरस के लक्षण अलग-अलग तरह के हैं यह वायरस Chicken pig cow  में भी अलग-अलग तरह के लक्षण पैदा करता है और ध्यान देने वाली बात यह है कि इस वायरस के लिए किसी तरह की वैक्सीन एंटीवायरल दवाई नहीं बन पाई है।   कोरोनावायरस का इतिहास बताता है इस वायरस का पहला आक्रमण 1930 में हुआ था जो कि जानवरों में फैला इसके चलते जानवरों को श्वसन संक्रमण फैला और इस और इसे आईवीबी के नाम से जाना गया और 4 साल और एमसी होने 1931 में यह जानकारी दी कि यह वायरस जानवरों में फैल रहा है और इस वायरस में जानवरों को शोषण संक्रमण हो रहा है यह वायरस जानवरों में नॉर्थ डकोटा में फैला था इसके बाद 1940 में दो और करो ना परी वार के वायरस ने जन्म लिया जो कि एमएचवी तथा टीजीवी के नाम से जाना गया कोरोना वायरस के बाद करो ना वायरस के नए सदस्य का जन्म हुआ और वह वायरस हुमन कोरोनावायरस था यह वायरस में आया और इसके चलते यूएसए और यूके में वायरस को एकांत में रखा गया इसके अलावा कोरोनावायरस 2003 में एस ए आर एस के तीन प्रकोप के बाद एशिया तथा विश्व में वायरस का प्रकोप शुरू हुआ उसे डब्ल्यूएचओ ने एक प्रेस रिलीज द्वारा बताया कोरोनावायरस 2019 कोविड-19 3:00 का एक विश्व प्रसिद्ध शहर वहां जहां पर एक व्यापार केट में मीट का व्यापार होता है वहां के इस मार्केट में जिंदा तथा मरे हुए दोनों प्रकार के जीवो का मीट मिलता है चाइना के नागरिकों द्वारा चमगादड़ को खाए जाने और जिंदा चूहों को खाए जाने के कारण कोविड-19 नामक वायरस की उत्पत्ति हुई क्योंकि चमगादड़ में हजारों तरह के वायरस होते हैं जो कि मनुष्य उन वायरस को जेल नहीं सकता मनुष्य के अंदर इन भयंकर वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता नहीं होती है इसलिए चमगादड़ तत्वों को भोजन में शामिल करने का नतीजा हम को भी के रूप में भुगत रहे हैं यह वायरस 2019 दिसंबर में चाइना के शहर वहान में फैला तथा चाइना में डब्ल्यूएचओ को इस वायरस से ग्रसित होने का मामला बताया तथा डब्ल्यूएचओ ने 31 दिसंबर को द्वारा की गई नामक वायरस फैल चुका है तथा इसकी कोई भी दवा एंटीवायरस नहीं है यह एक बीमारी है कोरोनावायरस कोविड-19 भारत विश्व स्तर पर कोविड-19 फैसले के बाद भारत में भी इस वायरस ने अपनी दस्तक दी तथा भारत भी इस वायरस की चपेट में आ गया भारत में कोविड-19 का पहला मामला 30 जनवरी 2020 को दक्षिण भारत के एक शहर केरला में आया इसके बाद भारत में ज्यादातर दक्षिण भारत में इसके बाद भारत में ज्यादातर दक्षिण भारत में कोविड-19 का प्रकोप बढ़ता ही गया तथा धीरे-धीरे दक्षिण भारत से उत्तरी भारत में भी कोविड-19 फैल गया भारत सरकार द्वारा कोविड-19 से बचने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए भारत सरकार द्वारा पहला कदम था जनता कर्फ्यू देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भारत देश को संबोधन करते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की घोषणा करी तथा देश के प्रत्येक नागरिक ने इस कर्फ्यू का पालन किया इसके बाद कोविड-19 का खतरा देखते हुए भारत देश में पहला लॉकडाउन की घोषणा भारत सरकार सरकार द्वारा की गई जो कि 25 मार्च से 14 अप्रैल तक घोषित हुआ कोविड-19 के बढ़ते संकट तथा भयंकर महामारी तथा इसके बचाव के लिए किसी भी तरह की दवाई anti-drug के ना होने के कारण भारत ने चार लॉकडाउन लगे जो कि पहला 25 मार्च 14 मार्च दूसरा 15 अप्रैल से 3 मई तीसरा 14 मई 17 मई 31 मई थे यह लोग महामारी से बचने के द्वारा भारत सरकार द्वारा पूरे देश में लगाए गए का तरीका बहुत आसान व सरल दिखाई पड़ता है परंतु यह चार लोग अपने आप में वायरस से भी बड़ी महामारी बने महामारी तथा उनका भारत पर असर हमारी समस्या बनी में और भारत में भी अपनी समस्याओं को अपने साथ लाया पहला लॉकडाउन 1.0 के चलते देश में निषेध गतिविधियां योगदान की वजह से पूरे देश की देश की सीमाएं बंद कर दी गई सारी हवाई यात्राएं रोक दी गई अब देश में बाहर से ना कोई आ सकता था है ना कोई जा सकता है लॉकडाउन 2.0
देश के प्रत्येक राज्य में अपने राज्य की सीमा बंद कर दी ताकि किसी भी राज्य के नागरिक इधर उधर ना जा सके पॉइंट 3 पूरे देश में रेलगाड़ी बसे हवाई जहाज सब पर प्रतिबंध लग गया पूरे देश में प्रतिबंध लगने से परिवहन पूरी तरीके से बंद हो गया पॉइंट 4 देश की सारी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई सारी सारे बाजार व्यापार बंद हो चुके थे किसी भी तरीके का बाजार बंद था सिर्फ दवा की दुकान राशन की दुकान तथा अस्पताल ही खुले थे परंतु इन अस्पतालों में भी कोविड-19 से सुरक्षित मरीजों से बुरा हाल था पॉइंट 5 सभी तरह की जगह निर्माण व्यापार बंद था सरकारी दफ्तर अस्पताल प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां प्राइवेट उद्योग संबंध था पॉइंट 6 पूरे देश में सन्नाटा छाया था जीव जंतु सड़कों पर आ गए थे क्योंकि देश के किसी भी नागरिक को घर से निकलने की अनुमति नहीं थी कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य के लिए बाहर नहीं जा सकता था बीमारी दबाव आर अश्विन की खरीदारी करने के अलावा पॉइंट 7 प्रो दवाइयों की दुकानों के सामने 2 फीट की दूरी पर निशान बनाए गए थे अब इन्हीं गैरों में लोगों को खड़े होकर सामान लेना होगा देश में किसी भी तरह आपके जैसे सूरज सिनेमा समारोह पर प्रतिबंध था किसी भी व्यक्ति को बाहर ना निकलने की निकलने का आदेश था और किसी दवा अस्पताल राशन की की जरूरत की चीजों के लिए सिर्फ एक व्यक्ति ही घर से बाहर जा सकता था इन सब के कारण देश में
सभी तरह का व्यापार तथा मजदूरों का बच्चे बत्तर हाल हो चुका था गरीबों को गरीबों के पास खाने के लिए रोटी भी नहीं थी आम आदमी की जिंदगी में त्राहि-त्राहि हो गई थी मजदूर अपने घर नहीं जा सकते मालिकों द्वारा रोजगार से निकाले जाने के कारण मजदूरों का जीवन नर्क बन गया था इन्हीं कारणों से लाखों मजदूर पैदल ही भूखे अपने गांव की तरफ निकल पड़े सैनिकों के छोटे बच्चे के चलते हुए अपनी जान से हाथ धो बैठे हो ना काल महाकाल साबित हुआ सबसे ज्यादा बुरा हाल रोज खाने कमाने वालों पर हुआ परंतु इस करो ना के प्रकोप में महा मध्यमवर्ग भी और संपन्न वर्ग भी नहीं बच पाया हर व्यक्ति का बहुत बुरा समय
सरकार द्वारा उठाए गए कदम सरकार ने गरीब लोगों को ज्यादा से ज्यादा राशन देने की कोशिश करें सरकार द्वारा प्रत्येक गरीब वर्ग को मुक्त राशन बांटा गया इस महामारी के काल में पूरे भारत की अर्थव्यवस्था डगमगा गई मंदी का दौर वापस आ गया इसके चलते सरकार ने श्रमिक वर्ग के लिए 170000 करोड का राहत पैकेज निकाला ताकि श्रमिकों को कुछ राहत मिल सके इसी के चलते सरकार ने 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा करी सरकार द्वारा श्रमिकों के छोटे व्यापारी मध्यमवर्ग श्रमिकों को कामकाज के लिए दोबारा से शुरुआत करने का प्रोत्साहन मिला सरकार द्वारा मुफ्त का राशन बांटने का सिलसिला बढ़ता रहा था कि देश का कोई भी वर्क भूखा ना मरे लॉकडाउन के चलते सरकार द्वारा शिविर लगाए गए खाना पकाकर बांटा गया बनाई गई ताकि किसी को भी ना हो कोई व्यक्ति भूख से ना मरे सरकार ने प्रत्येक व्यक्ति को संक्रमण से बचाने के लिए निर्देश देगी से कोरोना से बचने के लिए राहत निर्देश जारी किए सभी व्यक्ति मार्क्स लगाने के निर्देश दिए गए सभी व्यक्तियों को निर्देश दिए गए जरूरी काम से ही बाहर निकलने के निर्देश दिए जाने लगे अपने आप को करो ना के संक्रमण से बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग आयुर्वेदिक दवा गाड़ी की विधियां बताई गई हाथ साफ करना सैनिटाइजेशन करने के निर्देश दिए गए सरकार द्वारा कौन बना सरकार द्वारा कोविड-19 से देश के प्रत्येक व्यक्ति को बचाने में एक प्रयास यह भी था कि देश में बीमार तथा स्वस्थ लोगों का वर्गीकरण करना सरकार द्वारा इस महामारी के खिलाफ उठाया गया एक कदम था रे ड्रोन ड्रोन वह दौर था जिससे उसका अधिकतर लोगों अधिकतर लोग महामारी से पीड़ित थे उसे राज्यों की श्रेणी में डाला गया रेड जोन को पूरी तरीके से सील कर दिया गया रेड जोन का कोई भी व्यक्ति अपने घर बाहर नहीं जा सकता राशन का दवाई की सुविधा आपको अपने घर पर मिलेगी रेड जोन का मतलब सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र और जोखिम का जोखिम भरा क्षेत्र है ऑरेंज ऑरेंज और रेड जोन के मुकाबले जोखिम स्थिति कम होती है वहां संक्रमण का खतरा होता है और जो व्यक्ति का राशन दवाई का में बाहर जाने की अनुमति होती है का पालन करते हुए तथा करना जरूरी है गिरिडीह में आता है जहां महामारी का खतरा बहुत ही कम या ना के बराबर होता है उसे ग्रीन कहते हैं परंतु विभीषण का पालन करना जरूरी है एक ही है कि प्रत्येक व्यक्ति को बचाना है सरकार द्वारा पूरे क्षेत्र कंटेंटमेंट जोन घोषित करना करो ना के मरीजों के लिए अस्पताल में ज्यादा से ज्यादा इंतजाम करना सैनिटाइजेशन पर तथा मार्क्स पर कालाबाजारी पर रोकथाम निजी अस्पतालों को कम से कम फीस पर कोविड-19 का टेस्ट व इलाज करने का निर्देश देना व्यापारियों कंपनियों के मालिक मकान मालिकों पर किसी भी तरीके के अनुशासनहीनता पर रोक लगाना यह सभी कदम व्यक्तियों को महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए आज के समय में विश्व बैंक पर भारत कोविड-19 ग्रसित देशों में तीसरे नंबर की श्रेणी में आ गया है पहले नंबर पर दूसरे नंबर पर भारत है आज की तारीख में भारत में 7 से ज्यादा लोग बनाने में लगे हुए हैं और इसमें भारत का नाम भी शामिल है भारत की दवा बनाने में जुटी हुई है इसी के साथ-साथ सरकार द्वारा भारत को अनलॉक करने के लिए शुरू हो गई है धीरे-धीरे सभी व्यवसाय खुलने लगे हैं फिर से सभी व्यक्तियों को रोजगार मिलने लगा है दो अनलॉक हो चुकी है 1 जून से 30 जून 1 जुलाई से 31 जुलाई हम सभी आशा करते हैं भारत के साथ-साथ पूरे विश्व को कोविड-19 जल्द से जल्द महामारी खत्म हो हमारे देश और विश्व में शांति बनी रहे।

Written By Utkarsha

शब्द

शब्द

शब्द क्या है? 
हम लोग सुबह से शाम तक सारा दिन शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, परंतु फिर भी बहुत ही कम लोग ऐसे हैं जो शब्दों का महत्व जान पाते हैं। हमें अपनी सभी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए शब्दों की आवश्यकता होती है। परंतु देखा जाए तो असल में शब्द है क्या?         
अधिकांश है हमारा सोचना होता है कि शब्द केवल ध्वनियों के मिलाने से बनते हैं। परंतु केवल ध्वनियों के योग से ही शब्द नहीं बनते शब्दों में भावनाएं अभिव्यक्त होती हैं। यह सारा संसार ही शब्दों के पीछे ही चल रहा है।                                      चाहे आप संसार के किसी भी विषय का अध्ययन करें आपको शब्दों की आवश्यकता जरूर होगी।      

हर शब्द मूल के है क्या?        
हमारे द्वारा बोला गया कोई भी शब्द या कोई भी ध्वनि कभी खत्म नहीं होती। वह ध्वनि इस अनंत ब्रह्मांड में गूंजती रहती है। इस ब्रह्मांड का कोई आदि व अंत नहीं है। और इसी अनंत ब्रह्मांड में हमारे द्वारा बोले गए शब्द व ध्वनियां गूंजती रहती हैं । 
      
      शब्दों के कई प्रकार के प्रभाव भी होते हैं।                                    हमने ध्वनि चिकित्सा के बारे में भी पड़ा है। कई प्रकार के अलग-अलग संगीत की ध्वनि मनुष्य के इलाज के लिए फायदेमंद होती है। यहां तक कि हम जो विभिन्न भाषाओं में गीत संगीत सुनते हैं। चाहे वह आधुनिक संगीत हो या फिर शास्त्रीय संगीत या फिर किसी भी भाषा का संगीत सब शब्दों के योग से ही तो बने हैं। इसी संगीत से मनुष्य सदियों से अपना मनोरंजन करते आए हैं।
     
इसके अलावा मनुष्य के संपूर्ण जीवन के क्रियाकलापों में भी अलग-अलग प्रकार के संगीत का वर्णन मिलता है।
जैसे हम देखते हैं यदि कोई मनुष्य बहुत खुश है तो वह अलग प्रकार से गुनगुनाने लगता है। अगर कोई मनुष्य किसी बहुत ही व्यथा में है पीड़ित है तो वह आंसुओं के साथ कुछ ना कुछ गुनगुनाने लगता है। रोता हुआ मनुष्य भी अपनी भावनाओं के साथ कुछ शब्दों को व्यक्त करता है मनुष्य के जीवन सभी भावनाओं में मनुष्य संगीत का इस्तेमाल करता है।
  इन्हीं शब्दों के योग से ज्योतिष, खगोल शास्त्र, मंत्र शास्त्र आदि अनेकानेक विषय बनते हैं। जब हम किसी भी शब्द का उच्चारण करते हैं तो उस शब्द के साथ कुछ ध्वनि तरंगे निकलती हैं वे ध्वनि तरंगे इस ब्रह्मांड में गूंजती हैं। और अलग-अलग ध्वनि तरंगों का अलग-अलग प्रभाव भी होता है। जिस प्रकार हिंदू धर्म में ओम शब्द का वर्णन है उसी प्रकार बौद्ध व जैन धर्मों में भी ओम शब्द का वर्णन है। भले ही यह अपने मतों को लेकर अलग-अलग हो परंतु इस एक शब्द पर यह सभी धर्म एकमत हैं।  अगर हम पाश्चात्य धर्मों को देखें जैसे कि इस्लाम व ईसाई धर्म में भी आमीन शब्द का प्रचलन है। हिंदी शब्दों में कुछ ध्वनि तरंगे उत्पन्न होती हैं जो कि मनुष्य के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डालती हैं।

हम सनातन धर्म में भी ओम, ऐऺ , क्लीम, श्री आदि बीज अक्षरों का वर्णन है। यह सभी कुछ सकारात्मक ध्वनि तरंगों को पैदा करके मनुष्य के जीवन में आश्चर्यजनक बदलाव लाने में सक्षम है।

हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले शब्दों में न जाने कितने ही अच्छे और बुरे शब्दों का इस्तेमाल पूरा दिन होता है। परंतु हमें अपने द्वारा इस्तेमाल की जाने वाले शब्दों को ध्यान से इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि मुख से निकले हुए शब्द वापस नहीं आते। और अगर कोई व्यक्ति शब्दों का अच्छे से इस्तेमाल करने में सक्षम है शब्दों के द्वारा मनुष्य के मन पर घाव भी किया जा सकता है। हम आज के समय में देखते हैं कि इतने लोग मनोचिकित्सक के पास जाते हैं जबकि वह केवल मनोरोगी से बात करता है, वह केवल सामने बैठे मनोरोगी के विचारों को उसके शब्दों के रूप में सुनता है और अपने विचारों को अपने शब्दों के रूप में उसके मस्तिष्क की ओर प्रवाहित करता है यह सभी खेल केवल शब्दों का ही है।

हम अपने मुंह से न जाने कितने ही अपशब्द निकालते हैं, और शब्दों के ही द्वारा हम परमात्मा का स्मरण भी करते हैं। हम सोचते हैं कि जिस समय हम परमात्मा का स्मरण कर रहे हैं और शब्द निकाल रहे हैं उस समय हमें परमात्मा देखता है और अपने मुखमंडल से  अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए यह नहीं सोच पाते।

अगर हमें शब्दों की असली महत्व को जानना है तो कुछ समय हमें निशब्द होकर रहना चाहिए अर्थात मौन धारण भी करना चाहिए। अगर हमें अपने शब्दों में प्रभाव लाना है तो हमें शब्दों का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए। अगर हम दिन रात व्यर्थ के शब्द ही बोलते रहेंगे तो हमारे शब्दों की अहमियत नहीं रह जाएगी और हमारे शब्दों का प्रभाव भी कम हो जाएगा। इसलिए हमें प्रत्येक शब्द को बहुत ही सोच समझ के इस्तेमाल करना चाहिए। संत कबीर दास जी ने भी अपने दोहे में कहा है कि हर एक शब्द को हमें तराजू में तोल कर तब मुख से निकालना चाहिए।  
                                                
“भर सकता है घाव तलवार का बोली का घाव भरे ना”

Written by Pritam Mundotiya

शब्द के घाव ना भर पाए

भारतीय शिक्षा प्रणाली

भारतीय शिक्षा प्रणाली

भारत में शिक्षा सरकारी व निजी दोनों तरीके से दी जाती है। भारतीय संविधान के अनुसार 6 से 14 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शिक्षा शिक्षा प्राप्त करना उनके मूल अधिकारों में शामिल किया गया है। यह नीति 1 अप्रैल 2010 से लागू की गई थी।    
 
           इसके बाद भारत की प्राथमिक शिक्षा में काफी बढ़ोतरी हुई, 7 से 10 साल तक की बच्चों में लगभग तीन चौथाई जनसंख्या आज शिक्षित है। इसके अलावा भारत में अपनी उच्च शिक्षा प्रणाली में भी कई सुधार किए हैं जो कि आर्थिक सुधारों के अंतर्गत आते हैं। उच्च शिक्षा में अधिकतम सुधार विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में की गई हैं। 2013 में उच्च शिक्षा में जनसंख्या का 24% शामिल था।        
  प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर भारत में निजी शिक्षा क्षेत्र भी 6 से 14 वर्ष की आयु के 29% छात्रों को शिक्षित करने में लगा है। वार्षिक शिक्षा सर्वे 2012 के अनुसार 96% ग्रामीण क्षेत्रों के 6 से 14 आयु के बच्चे भी शिक्षा प्राप्ति की ओर अग्रसर है। एक और सर्वे जो कि 2013 में शुरू किया गया था उसके अनुसार 229 मिलियन छात्र भारत के ग्रामीण और शहरी इलाकों से कक्षा शिक्षा क्षेत्र में संलग्न है।  
                     
  जनवरी 2019  तक भारत में 900 विश्वविद्यालय और 40000 कॉलेजों की स्थापना हो चुकी थी। भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में काफी संख्या अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति अथवा कुछ पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए भी आरक्षित की गई है।     
            

भारतीय शिक्षा का इतिहास:         
भारत में शिक्षा प्रणाली का इतिहास बहुत पुराना है।भारत के इतिहास में हमें तक्षशिला विश्वविद्यालय के बारे में पता लगता है जो कि आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व में स्थापित किया गया था। इसके अलावा हमें नालंदा विश्वविद्यालय के बारे में भी इतिहास में जानकारी मिलती है जो कि पूर्वी भारत में स्थित था। इसके साथ ही यह दुनिया की प्राचीनतम शिक्षा व्यवस्था का विश्वविद्यालय था ऐसी जानकारी मिलती है। यहां सभी विषय पाली भाषा में पढ़ाए जाते थे। वह पूरी दुनिया में विख्यात आचार्य चाणक्य भी यही के एक अध्यापक थे जिनका की मौर्य साम्राज्य के बसने में एक महत्वपूर्ण योगदान था। 
  
   आधुनिक शिक्षा प्रणाली: 
भारत में अधिकतर शिक्षा बोर्ड 10 + 2 प्रणाली पर शिक्षा देते हैं। इस प्रणाली में 12 साल तक विद्यार्थी विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करने के बाद 3 साल वह विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करता है।  
             
आज जो हम भारत की शिक्षा प्रणाली को देखते हैं । वह कई चरणों से होकर गुजरी है। प्राचीन काल में भारत में गुरुकुल में शिक्षा दी जाती थी, जहां की एक विद्यार्थी अपने गुरु के सानिध्य में एक निश्चित अवधि तक घर से दूर रह कर के शिक्षा प्राप्त करता था।       परंतु सन 1835 में राजा राममोहन राय की सहायता से लॉर्ड विलियम बेंटिक ने आधुनिक शिक्षा प्रणाली को लागू किया वे उस का माध्यम अंग्रेजी रखा। इसी शिक्षा प्रणाली को लॉर्ड मैकाले शिक्षा पद्धति भी कहा जाता है, क्योंकि विलियम बेंटिक है यह कार्य लॉर्ड मेकाले की सहायता से किया था।

Change

Change

CHANGE

Change is a law of life, the only unchanging law it is often said. But we are in a time-frame right now n which change is accelerating its pace as in no other recorded historical time. A dominant factor in that change is the rapid crumbling of the apparent barriers between the physical and metaphysical sciences and the new openness of people on all levels to consider things which would have been unthinkable just a short time ago.


Besides the obvious changes one notices in the newspapers and magazines, there are a myriad of things going on which never reach broad public attention. Some of them sound minor on the surface, but the significance is profound to those who can see the implications.

A Harvard professor of psychology goes to India to learn meditation. A famous astronaut, one of the first to walk on the moon, states that future interplanetary journeys should be done by astral travel. A traditional archeologist turns his attention to Atlantis. U.S. Marines use dowsing rods to locate tunnels. Literally thousands of people every year – ordinary, everyday, next-door-neighbor type of people – are joining mind control groups and experiencing and utilizing psychic abilities. As a personal experience, a short time ago I gave a demonstration at a shopping center in North Hollywood. Hundreds of shoppers with zero knowledge of psychic phenomena saw their own auras, successfully used a dowsing rod, and actually felt the energy emanations from mana generators. Actually, that was less amazing than the fact that I was allowed to put on the demonstration.


Yes, great change is coming, but of what kind? Doom-and-gloom psychics are having a field day predicting the end of the earth (or at least of California), seeing the changes as physical earth changes of a destructive nature. Others point out the inhuman (?) nature of current wars, the glut of resurrected Christs, the decline of formal religion, and the modification of the moral code and say that Armageddon is at hand and we had better be ready to flee to the hills and wait out the time of dark chaos that is fast approaching. After that, all the “good guys” (you and me) will be called down to help rule the world under the banner of a god who has come down out of the sky to force us all to be decent folk. Or a variation has it that it’s too late and the world is just going to go kaput!


I would like to point out a few things. First of all, at no time in the present recorded history of man has there been as much altruism between totally different peoples. Consider the fact that an earthquake in Peru, an epidemic in Africa, a hurricane in Bangladesh result in free, unqualified aid in the form of clothing, medicine, and supplies from all over the world. Former enemies make peace and cooperate. Nations join together to form organizations to socially and economically help other nations. Vast organizations of private individuals do the same. We tend to take this all for granted, but it was virtually unheard of before World War II. Yes, there are still ugly wars, but there have always been ugly wars, some far, far worse than what we think of as bad today. Yet, there has never been such an outpouring of good works. We still have wars, but we also have good works now. That sounds like progress to me.


Next, you must understand that many modern prophets can’t read their own symbolism, and when they can, they often exaggerate it. An earthquake in a vision is almost invariably a symbol of great mental change, usually in the life of the visionary himself. One modern psychic also predicted a polar shift that would devastate the world at a particular time. The time came and went and nothing apparently happened. Later it was found out that there was a shift, but so minute as to have virtually no effect on anything. The socially-oriented psychics who are predicting great earth changes are really predicting great changes in consciousness and attitudes, and the destruction of old ways of life.


Do not forget that we create our own reality. This is our world, and it will not be totally destroyed until all our high selves get together and agree that we don’t need it anymore. I hope this doesn’t disappoint too many of you, but Christ is not going to come swinging down on a white cloud to rule the earth for us. Armageddon and the coming of Christ are symbolic of inner struggle and the realization of union with the High Self. Both occur individually for each one of us. The world will only change as we change ourselves.

Written by Arif Ali

जीवन क्या है ?

जीवन क्या है?

जीवन क्या है?          

आज के समय में आधुनिक मनुष्य का जीवन केवल खाना पीना और सोना ही रह गया है।  इसके विपरित जीवन में से नैतिकता और नैतिक विचार जैसे गायब ही हो गए हैं। आज का मनुष्य ना तो साहित्य पढ़ने में इच्छुक है और ना ही सामाजिक क्रियाकलापों में भाग लेने का इच्छुक है।

हमने जितने भी महापुरुषों की जीवनी पढ़ीं है वह सभी महापुरुष केवल अपने लिए ना जी कर समाज के लिए जिए है तथा  अपना सारा जीवन देश, समाज व मनुष्य जाति के लिए समर्पित कर दिया परंतु आज का मनुष्य ना तो स्वयं को ही ठीक से रख रहा है ना ही स्वयं के ही नैतिक मूल्यों पर खरा उतर रहा है और ना ही देश समाज वह दूसरों के लिए कुछ कर पा रहा है, या फिर करना ही नहीं चाहता वह सिर्फ अपने लिए ही जीवन जीना चाहता है जैसे स्वार्थ से भर चुका हो आज मनुष्य

   आज के समय की भाग दौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य मात्र एक इंजन से चलने वाली गाड़ी की तरह रह गया है जो कि सिर्फ खाना खाता है और बचे हुए अपशिष्ट पदार्थ को शरीर से बाहर निकाल देता है। फिर खाना खाता है और फिर
   काम से थकता है तो से जाता है । केवल यही आज के मनुष्य की दिनचर्या बन गई है ना तो आज का मनुष्य परिवार को समय दे पाता है और ना ही वह समाज प्रकृति के प्रति कुछ कर पाता है।
    हमें भी उन महापुरुषों की जीवनी अब पढ़नी चाहिए और उनसे प्रेरणा लेकर देश के लिए इस समाज के लिए हमारे पर्यावरण के लिए प्रकृति के लिए कुछ करना चाहिए अपने आप को प्रकृति के साथ चलाना चाहिए।
खाने-पीने और सोने से हटकर हमें हमारे परिवार , हमारे देश हमारे समाज में प्रकृति के प्रति भी हमारी कुछ जिम्मेदारियां हैं।

पारिवारिक जीवन:-   
हमारे जीवन में हमारे पारिवारिक जीवन का भी बहुत बड़ा रोल होता है परिवार दुनिया की सबसे छोटी परंतु महत्वपूर्ण इकाई है। मनुष्य जो कुछ भी सीखता है। सबसे पहले अपने परिवार से ही सीखता है परिवार से ही मनुष्य के अंदर उसके स्वभाव की झलक आती है।     
         
मनुष्य का स्वभाव:  
मनुष्य को अपने स्वभाव का निरंतर ध्यान रखना चाहिए  और बोली में मिठास रखनी चाहिए,  अहंकार से दूर रहना चाहिए  चाहे हम कितनी भी तरक्की क्यों ना कर ले परंतु हमें अपने समाज में ही बने रहना है। देश दुनिया में हम जहां भी रहते हैं जिन लोगों के बीच रहते हैं वही सब हमारा समाज होता है। अगर हमारा स्वभाव हमारे समाज के अनुकूल नहीं है तो हमें कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है ।मनुष्य अकेला ही सब कुछ नहीं कर सकता। मनुष्य के अपने जीवन निर्वाह की आवश्यकता के लिए समाज की जरूरत होती है। क्युकी हम सभी एक दूसरे से जुड़े हुए है एक दूसरे पर निर्भर है
                        

  समाज से बढ़ती दूरियां:
आज का मनुष्य समाज से दूरियां बनाता जा रहा है और अकेले रहने के लिए मजबूर है छोटे-छोटे फ्लैट्स में अकेला रहता है,  घर परिवार से दूर बड़े शहरों में अकेला रहता है। कोई काम की तलाश में, कोई रोजगार की तलाश में तो कोई पढ़ाई के लिए।
अकेला रहने की वजह से और समाज से दूर होने की वजह से ही मनुष्य को आज के समय में न जाने कितने मानसिक तनाव और मानसिक बीमारियों ने घेर लिया है। 
      
                   शारीरिक स्वास्थ्य:  
मनुष्य को कोई भी कार्य के लिए सबसे प्रथम अपने शरीर पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। हमारे शास्त्रों में भी वर्णन है “प्रथम सुख निरोगी काया”
जिस मनुष्य में शरीर स्वस्थ होता है उसी के शरीर में स्वस्थ बुद्धि का निवास होता है। शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हमें थोड़ा बहुत व्यायाम भी करना आवश्यक है अगर खुली हवा में सांस लेना प्राणायाम करना या कोई भी शारीरिक गतिविधियों में हमें लगे रहना चाहिए। आज की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हमें थोड़ा समय अपने स्वास्थ्य के लिए भी निकालना चाहिए शरीर स्वस्थ होगा तभी हम कोई भी कार्य कर पाएंगे। आज के समय में छोटी-छोटी बीमारी होने पर छोटा-छोटा मौसम बदलने पर हम बीमार पड़ जाते हैं हमारे शरीर की रोग निरोधक क्षमता भी बहुत कमजोर हो गई है जिसकी वजह से हम जल्दी जल्दी बीमार ही जाते है।   
                                      

                  मानसिक स्वास्थ्य:
   शरीर के साथ-साथ मनुष्य को अपने मस्तिष्क का भी ध्यान रखना चाहिए ,  मानसिक स्वास्थ्य का भी हमारे जीवन में एक बहुत बड़ा महत्व है। आज के समय में मनुष्य को बहुत सी मानसिक बीमारी और मानसिक तनाव ने घेर लिया है।  माना की साधारण मनुष्य और मानसिक बीमारी को पागलपन समझता है परंतु ऐसा नहीं है , मन , मस्तिष्क स्वस्थ तो तन भी स्वस्थ रहता है।

#Written by Pritam Mundotiya

Covid19

कोविड-19 कोरोनावायरस एक ऐसी बीमारी जिसने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया दुनिया में कोई भी ऐसा नहीं है जो कि इस वायरस से बचा हो।

अब यह बीमारी कोई प्रकृति का प्रकोप है या फिर बनाया गया कोई वायरस यह तो हम नहीं जानते परंतु हम तो सिर्फ इसके परिणामों को ही देख रहे हैं ऐसी बीमारी ना तो कभी आई है ना ही कभी आए हम यही कामना करते हैं।इसे बीमारी की जगह महामारी कहना और ज्यादा ठीक रहेगा। जोकि चाइना के वुहान शहर से शुरू होकर इटली पहुंची और इटली से सारी दुनिया में पहुंची।

दुनिया के बड़े बड़े देश जो हर चीज में विकास पूरक है वह भी आज इस वायरस के आगे घुटने टेके खड़े हैं। और हमारे देशवासियों का तो क्या कहना यह हमारे देश वासी हैं जो महामारी में भी लोगों का फायदा उठा रहे हैं जब शुरुआत में वायरस की खबर आई तो पूरी मार्केट से सैनिटाइजर गायब कर दिए ब्लैक में बेच रहे हैं 4:30 हजार का एक टेस्ट हो रहा है जो कि व्यक्ति को पहले भी कराना जरूरी है और ठीक होने के बाद भी कराना जरूरी है अगर एक इंसान के घर में 4 लोग भी हैं तो 18000 पहले और 18000 बाद में यानी कि ₹36000 वह सिर्फ टेस्ट टेस्ट में खर्च कर रहा है आखिर आम आदमी के पास इतना कौन सा खजाना है कि वह इतना खर्च करें सिर्फ टेस्ट टेस्ट के ऊपर अगर अस्पतालों की बात करें तो किसी एक मरीज को रखने के लिए ₹50000 लाख रुपए प्रति दिन के हिसाब से भी वसूले जा रहे हैं क्योंकि कोई ट्रीटमेंट बना ही नहीं है सुरक्षा है घर पर रहकर भी ठीक हो रहे हैं बीमारी की वजह से लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है अर्थव्यवस्था बिल्कुल पटरी पर आ गई है न जाने कितने उद्योग धंधे कारखाने सब बंद हो गए हैं कितने ही लोग बेरोजगार हो गए कितने ही लोगों का घर खर्च का पैसा नहीं है बच्चों की फीस लेने के लिए नहीं है क्या तो आज ही खाएं और क्या करें और जिन लोगों का काम छूट गया है क्या उनको कोई राहत है अगर कुछ लोग पेट भरने के लिए खाना भी दे रहे हैं तो सिर्फ पेट भरने से ही इंसान का जीवन नहीं चलता इंसान के जीवन में शिक्षा जीवन स्तर भी कुछ मायने रखता है इस बीमारी ने सब की छवि एकदम मिटा दिए। अमेरिका देश चौकी दुनिया की सुपर पावर होने की दावा करता था आज कोरोनावायरस के मारे अपने दरवाजे पूरी दुनिया के लिए बंद किए बैठा है परंतु एक बात और देखने में आई है हमारे देश भारत में लोगों में जागरूकता की बहुत कमी है जब तक हमारे स्वयं के ऊपर ना बीते तब तक हम जागरूक नहीं होते।कोरोनावायरस या कोविड-19 आज के समय में एक ऐसी बीमारी है जो भारत नहीं पूरे विश्व में फैल चुकी है और इसकी चपेट में आ चुका है बीमारियां बहुत है इस दुनिया में वर्तमान में कई कारण भी है परंतु विषाणु जनित बीमारी सबसे खतरनाक आज के समय में है बीमारी के वैसे तो कोई कारण होते हैं जैसे कि बैक्टीरिया प्लाज्मोडियम सूक्ष्म जीव आदि परंतु आज के समय में हमारा रहन सहन भी बीमारियों का एक बड़ा कारण बन चुका है हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बहुत कम हो चुकी है भागदौड़ भरी जिंदगी और शारीरिक क्षमता को हमने बिलकुल छोड़ दिया है शारीरिक कार्य बिल्कुल कम कर दिया है अधिकतर ऑफिस में एक ही सीट पर पूरा दिन एक ही बैठा रहता है मैं तो कोई शारीरिक श्रम करता है ना उसे कोई पसीना आता है ना वह पर्यावरण के वातावरण के संपर्क में आता है एक कंप्यूटर चेयर कि आज के समय में इंसान के जीवन बन गया है। हमने पर्यावरण से जैसे-जैसे डोरी बनाना शुरू किया है हम बीमारियों की चपेट में आने लगे हैं और पूरे विश्व को भी हमने खतरे में डाल दिया है विषाणु को इस पूरी दुनिया में कहीं कोई इलाज नहीं है विषाणु से केवल बचाव किया जा सकता है हमें भी अपनी ओर से पूरी सावधानी का पूरा बचाव रखना चाहिए दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए लापरवाही बिल्कुल नहीं बदलनी चाहिए हम जानते हैं कि पूरे विश्व में कितने व्यक्तियों की मृत्यु किस वायरस की वजह से हो चुकी है इसलिए हमें जितना हो सके सावधान रहना चाहिए घर पर रहते हुए हमें सभी देशों का पालन करना चाहिए। अपने आप को प्रकृति से भी जोड़ना चाहिए शारीरिक श्रम करना चाहिए थोड़ा व्यायाम भी जरूरी है भोजन मैं भी हमें बदलाव करना चाहिए

Written by Pritam Mundotiya

कोरोना के 21 दिन

जनता कर्फ्यू  का आवाहन

21 दिनों के lockdown से पहले जब नरेंद्र दामोदर मोदी जी ने जनता कर्फ्यू का आवाहन किया जिसमें सभी देशवासी अपने अपने घरों में रहे जिसके साथ ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया जाए सभी लोग एक दूसरे से कम से कम 2 फीट कि दूरी बनाकर रहे।
मोदी जी की इस बात को तो पूरे देश ने उनका उत्साह ओर उल्लास के साथ मोदी जी का समर्थन किया और साथ सभी भारत देश वासियों ने थालिया , ढोलक , शंख , बर्तन आदि को बजाकर उन सभी सैनिकों का मनोबल बढ़ाया जो इस युद्ध में अपनी जान पर खेलकर दूसरो की सेवा कर रहे है।
ध्वनि की गूंज से समस्त विश्व गूंज उठा हर जगह सिर्फ ध्वनियां गूंज रही थी और भयमुक्त घोषणा का प्रारम्भ किया गया कि अब युद्ध शुरू किया जाए हम सभी इस आपके साथ है और आपकी आज्ञा का पालन होगा।

उसके तुरंत बाद ही मोदी जी ने जाता को संबोधित करके 21 दिन का लॉकडॉउन लगा दिया था जब जनता कर्फ्यू  ख़तम हुआ

मुख्य पात्र एवम् घटनाएं
मुझे एक बात ध्यान अाई जब हम बहुत तेज दौड़ रहे होते है तब हमें हमारे आसपास से गुजर गई चीजे ध्यान से नहीं दिखती परन्तु जब हम धीरे धीरे चलते है तो उन सभी दृश्यों का पूरा आनन्द का लेते है जिनके आसपास से हम गुजर रहे होते है या वो हमारे पास से गुजर रहे होते है।
समय बहुत धीमी गति में इसलिए ध्यानपूर्वक देखे बहुत सुंदर सुंदर घटनाएं ओर दृश्य दिखेंगे

“जैसी जाकी भावना वैसा मन होए”

समय बहुत तेज़ दौड़ रहा था या इंसान आपधापी में लगा हुआ था लगातार इंसान भाग रहा था उसकी जरुरते तो कम थी लेकिन वो बस ना जाने क्यों भाग रहा था यह उस इंसान को भी नहीं मालूम था शायद जिसका एहसास दिलाने प्रकृति ने इंसान कि चाल में कुछ फर्क कर डाला है
कुछ ठहराव अब इंसान में शायद नजर आया है लगता है इंसान की सोच में भी कुछ फर्क अब नजर आने लगा है

जिस गति से समय चल रहा था अब उस गति में नहीं है
समय की चाल भी समझ नहीं आ रही थी आडी टेडी तिरछी सी कुछ हो रही थी अब ऐसा लगता है चाल सीधी हो रही है पृथ्वी की स्तिथि ओर परिस्थिति पर तभी फर्क पड़ता है जब ग्रह , नक्षत्र आदि अपनी जगह से परिवर्तित हो लेकिन क्या अब उनकी दिशा में परिवर्तन है या वो भी रुक गए है ?
ग्रह, नक्षत्र भी अब सीधी चाल में आ गए है ??
समय एक रुकी हुई घटना मे है या अब भी चल रहा है या फिर समय की गति धीमी हो गई है ?
क्या अब से पहले ऐसा हुआ है ?
चारो काल में ऐसा कभी नहीं हुआ जैसा 2020 में हुआ है कि मंदिर बंद हुए हो लेकिन अब हुआ
क्या सभी देवी , देवता अपने अपने स्थान पर चले गए है?  ओर इस संवाद को सुन रहे है जो पृथ्वी पर हो रहा है
इस समय सभी मंदिर , मस्जिद, गुरुद्वारे , गिरजाघर बंद है
लगातार प्रकृति संदेश दे रही है
पूरी अर्थव्यवस्था मतलब लक्ष्मी रुकी गई कहते है लक्ष्मी जी हमेशा चले तो शुभ माना जाता है यदि रुके तो अशुभ होता है यहां किसी एक देश की नहीं पूरे विश्व में सबकुछ रुक गया है।

“वासुदेव कुटुंबकम्”

यह प्रमाणित होता है कि सिर्फ भारत ही नहीं पूरा संसार एक कुटुंब कि भांति है जिसे इस मानव ने विभाजित किया है।
यदि अब भी 26 देश चलायमान स्तिथि में है तो इससे अभिप्राय यही है कि कुछ संवाद वहीं पर हो रहा है यह एक संकेत मात्र हो सकता है
उन देशों की क्या स्तिथि है?  यह जानना आवश्यक है क्युकी वह देश अभी तक Corona
की चपेट में नहीं आए है और यदि आएंगे तब क्या ?
क्या वो भी संक्रमित हो रहे है ?

190 देश अभी तक प्रभावित हो चुके है इस वैश्विक महामारी से
कुल 216 देश है इससे अभिप्राय यह कि अभी भी 26 देश बाकी है क्या वो जैविक अणु से प्रभावित होंगे या नहीं ? यह भी एक सवाल ही है।
परन्तु यह समय काल भी मूक है जो सिर्फ काल की भांति अग्रसर है
श्री मद भागवत गीता में श्री कृष्ण कहते है मै काल हूं बढ़ा हुआ मै सबका विनाश करने के लिए बढ़ रहा हूं
क्या यह समय युग परिवर्तन का तो नहीं है ?

समय रुका हुआ है पूर्णतया रुका नहीं है परन्तु एक शांत लहर है जिसमें सबकुछ हो रहा है लेकिन सब हमारे भीतर ही ही रहा है  जो भी परिवर्तन हो रहे है वो हमारे भीतर ही ही ही रहे है बाहरी कुछ नहीं हो रहा है
हम सभी पत्थर की भांति है हमें कुछ नहीं पता क्या हो रहा है? सभी मूर्छित है यही मानो मुर्छित का भाव यह है कि हमारा जीवन पुनः शुरू होगा लेकिन क्या हमारी मानसिक स्थिति में बदलाव आएगा या नहीं ?

हां जब कोई अवतरित हुआ है या श्री मद्भागवत गीता का उपदेश हुआ है।
क्या वहीं संवाद पुनः शुरू हुआ है? क्या इस समय पृथ्वी पर अर्जुन और कृष्ण संवाद चल रहा है?
या वो संवाद हमारे भीतर चल रहा है?
इस समय हो क्या रहा है ?

जैसा कि कुछ भविष्यवक्ताओं ने लिखा था
कि कलयुग के अंत में  कल्कि अवतार होगा एसी कोई घटना हो रही है ?
जब जब धर्म की हानि होगी तब तब मै आऊंगा
क्या एसा कुछ हो रहा है ? क्या इस श्लोक के माध्यम से हम यह समझ सकते है कि अधर्म इतना बढ़ चुका है अब योगेश्वर श्री कृष्ण अवतरित हो चुके है ?
कल्कि में से क अक्षर की उत्पत्ति हुई है
अब बुद्धि कुमति से सुमति की और बढ़ रही है अर्थात  माता सुमति है
और पिता विष्णु यश भी है
जैसा संकेत है विश्व में अणु रूप से व्याप्त विष्णु

“कलयुग केवल नाम अधारा जपत जपत हो उजियारा”

पूरे चराचर जगत में प्रभु गुणगान भी है इस समय लोग लगातार जप, तो ,पूजा ध्यान आदि में प्रवृत्त हो रहे है।
साथ ही नवरात्रे आए है माता के नौ दिन माता ने भी आकर अपना संदेश दिया है यह समय आत्म मंथन का है
क्या इस पृथ्वी पर कोई अर्जुन है जिसे श्री कृष्ण गुह्य ज्ञान दे रहे है साथ ही जो इस समय वेद वाक्य पर चर्चा कर रहे है ?
प्रकृति अपना आवरण क्यों बदल रही है क्या अति हो चुकी है ? तामसिक प्रवृति पूरी तरह से रुकी हुई है सिर्फ सात्विकता है। तामसिक आवरण हटाना या तमसिक्ता की परत को हल्का करना ही इस समय की मांग है
इस समय पूरी दुनिया शाकाहारी भोजन ही प्रधानता है कुछ पढ़े लिखे गवार जो हमेशा यही कहते है को फूड चैन
लेकिन क्या अब नहीं सब कुछ सही चल रहा है या अगले 21 दिन तक नहीं चलेगा ?
भगवत गीता में आहार पर भी कहां गया है
तामसिक
राजसी
सात्विक
इस समय आप कौनसा भोजन कर रहे है ?
पूरा विश्व सात्विक भोजन ही कर रहा है
प्रकृति भी तामसी आवरण को हटाकर सात्विक आवरण की और बढ़ रही है, स्वास ले रही है प्रकृति और मानव मौन हो गया है वह कुटिया में बैठ गया है

विचारो में जो शुद्धि आ रही है वह भी सात्विक हो रही है
कर्मो के द्वारा भी किसी की कोई हानि नहीं ही रही है इसका भी यही निर्देश मिल रहा है कि कर्म भी सात्विक ही हो रहे है।
हम किसी के लिए बुरा नहीं सोच रहे बल्कि हर किसी की मदद करने की सोच रहे है , वाणी से भी किसी का अहित नहीं कर रहे यदि हम दूर भी है तो भी किसी भी सोशल मीडिया साइट के द्वारा किसी को बुरा नहीं बोल रहे तथा यह बोल कर रोका जा रहा है कि मैं आपसे बहस नहीं करना चाहता यदि मै आपको पसंद नहीं तो आप दूर हाट सकते है लगातार संदेश और एक ही और इशारा हो रहा है कि स्वयं के साथ जीवन

Self Isolation कर्ण कवच जिससे हमारा तात्पर्य यह की घर के भीतर ही रहना और साथ ही घर की चौखट को नहीं लांघना यहां पर आपको आपकी सीमा मै ही रोका जाता है
जिसे लक्ष्मण रेखा कहते है यहां हमारे बहुत सारी नीतियां चलाई जिसके तहत हमें सफलता हासिल हो सके।
जब तक यह कवच है तब तक हमारा कोई अहित नहीं कर सकता इसलिए इस कवच का पालन कीजिए आपके ऊपर शायद कुछ परेशानियां आ सकती है परन्तु आप इस कवच को मत तोडिएगा तभी आप सलामत रहेंगे साथ ही लक्ष्मण रेखा को पार मत करिएगा

हम यूं कहे कि स्वयं के साथ रहे , लोगो से भावनात्मक दूरी रखे , शारीरिक दूरी रखे तथा स्वाध्याय में जुट जाए स्वयं का अध्यन करे यही भागवत ज्ञान सप्ताह है सात दिन , चौदह दिन और जो इक्कीस दिन चलता है आपको 21 दिन मिले है आप कितने तेयार हो सकते है अब यह आप पर निर्भर करता है
राजा परीक्षित को 7 दिन मिले थे उन्होंने अपना जीवन पूर्णतया बदल लिया था हमें इस समय का लाभ उठाना चाहिए जीवन बहुत अमूल्य वस्तु है इस शरीर को यूं ही व्यर्थ ना कीजिए इससे जो अनुभव मिलते है वो बहुत आनंदित होते है विश्वास कीजिए मै आपसे अपने अनुभव से कह रहा हूं। 
कुछ लोग कहते है अभी यह भागवत पढ़ने की उम्र नहीं हुई , या बहुत कुछ है डर लगता है पढ़ने से ऐसा बिल्कुल नहीं है मै 14 साल की उम्र से भागवत का पाठ कर रहा हूं और अब भी कर रहा हूं और बहुत बार पढ़ चुका और सुन चुका और अब भी लगातार पढ़ता हूं और सुनता हूं मेरे जीवन की सभी समस्यायों के हल , जीवन से जुड़े जितने प्रश्न थे उन सभी का समाधान मुझे श्री मद भागवत गीता में मिला और अनेकानेक  रहस्य है जिनको मैने जाना और यह सभी रहस्य  बहुत स्पष्ट शब्दों में दिए हुए है।
इस समय की स्तिथि और परिस्थिति भी मैने आपको भागवत के शब्दों से ही बताई है।
लगातार प्रकृति हमे संदेश दे रही है जो हम सभी प्राणी मात्र को समझने चाहिए और प्रकृति के आदेश व निर्देशों का पालन करना चाहिए
क्युकी सीधा संबंध प्रकृति के साथ है हमें प्रकृति ही संदेश देती है और हम उसी के अनुरूप कार्य करते है।

प्रकृति का संदेश समझिए

पूरे विश्व में भय कि एक स्थिति है पूरा विश्व त्राहि त्राहि कर रहा है  इसके विपरित कुछ और है क्या ???
जब श्री कृष्ण अर्जुन को उपदेश शुरू करते है तब अर्जुन की यही दशा होती है वो भय से भरा  होता है उससे श्री कृष्ण के वचन सुने नहीं जाते उसका रोम रोम कांप उठता है और उसे एसा लगता है कि वह कुल घाति , कुल द्रोही कहलाएगा यदि वो अपनी रूढ़िवादी परंपराओं से छुटकारा पा जाएगा तो जो उसने अपने ऊपर थोप ली है

“भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है यह किसी को नहीं पता”

हमें नहीं पता कि भविष्य के गर्भ में क्या है?
जिस प्रकार से महाभारत में कई योद्धा , दोनों तरफ से आ रहे थे उसी प्रकार यहां भी संकट आ रहे है लगातार परिस्थिति बदल रही है

एक नया संकट तब्लीग़ी जमात जो 1927 में शुरू हुआ था  यह इस्लाम धर्म का प्रचार और प्रसार करने के लिए विदेशी यात्रा करते है और अपने इस्लाम धर्म का प्रचार करते है

परन्तु इस समय यह एक प्रकार का चलता फिरता बम जिससे पूरी दुनिया बचना चाह रही है यह लोग किसी भी चीज पर अपनाथुक लगा रहे है , यदि वो कहीं जा रहे है तो थूक रहे है , सब्जी,फल, अन्य खाने पीने के समान पर भी यह लोग थूक रहे है , बल्की इन लोगो ने पुलिस कर्मियों पर भी थूका जिससे की यह बीमारियां फैला रहे है इनका उद्देश्य तो ऐसा लग रहा था है कि यह बीमारी और फैले
अब लोगो की मानसिकता क्या है ?

क्युकी इस अस्त्र का अभी तक कोई इलाज नहीं है इन लोगो में वो संक्रमण है Corona जिसका इलाज अभी तक नहीं मिला पूरी दुनिया Corona का इलाज ढूंढने का प्रयास कर रही है परन्तु मंजिल अभी दूर ही लगती है लगता है अगले कुछ महीनों में ही सफलता हासिल होगी परन्तु तब तक क्या होगा ? जन जीवन सामान्य हो पाएगा ?

भारत में चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह अभी तक नहीं दिखे आज पिछले 10 दिनों से वो कहा है ?
क्या कर रहे है ?
ऐसा कौनसा कार्य है जो इस समय उनके लिए बेहद जरूरी है लेकिन कॉरोना का संकट काल जरूरी नहीं लग रहा है क्या ??

पूरे विश्व में आसमान साफ हो चुका है जीव जंतुओं पर अत्याचार कम होने लगा है उनका सेवन बंद हुआ है परन्तु आज 10 दिन पूरा होने पर  दुबारा चीन से यह खबर अाई की उन्होंने दुबारा मांसाहार का सेवन शुरू कर दिया है इससे क्या समझा जाए ?

इटली में लोगो ने पैसे रोड पर फैक दिए है उन्हें यह समझ आने लगा है कि पैसा कोई महत्व नहीं रखता जीवन ज्यादा मूल्यवान है , जीवन की खुशियां ज्यादा महत्वपूर्ण है पैसा सिर्फ हमारी कुछ जरूरतों को पूरा करता है परन्तु हमारा जीवन नहीं लौटा सकता।

एक बहुत बड़ा सवाल यहां ये खड़ा होता है कि इस lockdown के बाद स्तिथि कैसी होगी ? लोगो का नजरिया कैसा होगा ?

सोचने ओर समझने कि प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे ?
शिक्षा में कुछ बदलाव होंगे ? या दुबारा से हम वैसे ही उसी तेज़ जिंदगी में उलझ जाएंगे ? भूल जाएंगे यह सब क्या हुआ?  इन इक्कीस दिनों में प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का नतीजा परिणाम क्या है ? क्या हम यह समझेंगे या फिर सब कुछ भूल कर फिर वही भगा दौड़ी वाली जिंदगी में लौट जाएंगे

कुछ नहीं बदला

वैश्विक मंदी मानव कृत या प्रकृति का दण्ड हर एक बात के एक से अधिक पहलू होते है उसी तरह यह समय भी बहुत सारे पहलुओं को दर्शा रहा है।
मानव करता तो है परन्तु उस अंदेशा नहीं होता कि उसके इन कृत्यों में क्या क्या छिपा होता है इंसान सिर्फ अपने मद अहंकार में भरा होता है उसे लगता है वहीं सर्वोपरि है और कोई नहीं है परन्तु इन कृत्यों का अंत प्रकृति ही करती है
जिस प्रकार महाभारत के समय शकुनि और अन्य लोगो ने चोसा खेल षड़यंत्र रचा था उसी प्रकार चीन देश  ने भी सभी देशों के लिए कोई षड़यंत्र रचा है जिसमें ज्यादा हानि इटली , और अमेरिका की दिखाई दे रही है उसने यह जैविक हथियार बनाकर पूरे विश्व में फैला दिया और वैश्विक मंदी का शिकार बना दिया तथा सभी देशों पर अंकुश लगा दिया है कोई भी देश अपनी सीमा से बाहर नहीं आ सकता है और ना ही जा सकता है। जिस प्रकार से चक्रव्यूह की रचना की गई हो इसमें सभी देश , लोग जहां , जिस स्थिति में है वहीं ठहर गए है उनका आगे बढ़ना और पीछे हटना दोनों ही मुश्किल हो गया है।

अब भारत देश के प्रधान मंत्री जी ने दिन रविवार  5 अप्रैल को रात 9  बजे 9 मिनट के लिए सभी देशवासी अपने घरों में व घर के बाहर दिए , टॉर्च , मोमबत्ती जलाए जिससे अंधकार रूपी Corona दूर हो सके साथ ही उन सभी लोगों का मनोबल बढ़ाया जाए जो दिन रात कठिन परिश्रम कर जन समुदाय को बचाने की कोशिश में लगे हुए है

दिए जलाने के पीछे वैज्ञानिक दृष्टि , ज्योतिषी विज्ञान क्या है? क्या ये एक ब्रह्मास्त्र है ?
मै मानता हूं कुछ लोगो को तकलीफ होती होगी जब भी हमारे प्रधानमंत्री कुछ करने के लिए कहते है तो परन्तु हम सभी धर्म जाति वर्ग विशेष से ऊपर उठकर सोचना चाहिए क्युकी जब प्रधानमंत्री कुछ करने के लिए कहते है तो 135 करोड़ लोग किसी भी कार्य को एक साथ करते है तो उसका प्रभाव तीनों लोक पर पड़ता है
इस बात से तो मुझे लगता है सभी धर्म सहमत होंगे की जनसमुदाय में किया गया कार्य पूरी कायनात मंजूर करती है।
उसी प्रकार जिस प्रकार आपने ध्वनि का उच्चारण किया तो वह ध्वनि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में गूंज गई ,
यदि आप दीप ज्वलित करते है तो उसका प्रकाश भी पूरे ब्रह्माण्ड पर असर करता है।
यदि सूर्य का प्रकाश हमें मिल रहा है तो को हमारे दीपक , मोमबत्ती का प्रकाश भी सभी को मिलेगा
इसके अलावा हमारा एक भाव , एक एहसास , एक वचनबद्ध , एक कार्य व किर्या आकाश लोक तक नहीं जाएगी ?
यह मै आपसे पूछ रहा हूं क्युकी मै जानता हूं
निश्चित ही स्वीकृत होगा
जो लोग किसी भी धर्म को मानते है उस बात का कोई मायने नहीं है परन्तु आप प्रार्थना तो करते है वह कहीं से कैसे भी हो सकती है उसकी आवाज , उसकी ज्योति आकाश लोक तक अवश्य जाएगी।


यह नए नए शब्द आए है यह पुराने ही शब्द थे किन्तु अब इनको एक नया रूप , कार्य , दिशा , निर्देश दिया गया है जिनकी सहायता से हम अपने जीवन को एक नई दिशा अवश्य देंगे

Self quarantine , Self isolution
Home quarantine , social distancing ,

मरीज को 14 दिनों के लिए अकेले रखा जाता है ताकि वो संक्रमित रोग से बच सके उसकी इच्छा शक्ति , ओर लड़ने की शक्ति देखी जाती है कितनी है जिस प्रकार युद्ध में लड़ रहा सैनिक वीरगति को प्राप्त हो जाता है उसी तरह यहां भी हो रहा है

यह समय एक तरह से आकस्मिक मृत्यु काल का समय भी है जिसमें समय अवधि है

जब तक पेड़ से पीला पत्ता नहीं जाएगा  अर्थात पुराना पत्ता नहीं टूटेगा पेड़ से तब तक हरा पत्ता कैसे आएगा ?
यह तो प्रकृति का स्वाभाविक नियम है जिसे हम सभी परिवर्तन कहते है
इसलिए इस समय ज्यादा घात ज्यादा उम्र के लोगों को हो रहा है स्वत ही वह टूट रहा है एक प्रक्रिया चालू कर दी है काल ने ग्रास करने की उस प्रक्रिया से पुराना पत्ता टूट रहा है।

संग दोष बचना चाहिए अब यही समय जब हमें संग दोष भी नहीं हो रहा है आपको जिनका संग विधाता ने दिया आपके कर्मो के अनुसार आप उन्हीं के संग अभी है तथा वहीं संस्कार आपको मिल रहे है इसलिए जीवन को और ज्यादा अनुभव के साथ जिये
और इन्द्रियों का सुख तो मूढ़ तथा पापायू लोग करते है। इस समय इन्द्रियों को भोगने वाले सभी कार्य लगभग ना के बराबर ही है जैसे कि मदिरा पान , मांस भक्षण , आदि कार्यों का स्वत ही बंद होना ये संदेश देता है कि यह किसी भी प्रकार से हमारे जीवन के लिए नहीं है।

नियत कर्म क्या है ?
कर्म सिर्फ एक ही है उस परम पिता परमेश्वर की पूर्णतया भक्ति में लीन हो जाना इसके विपरित दूसरा कोई कर्म नहीं है।
प्रकृति एक संदेश दे रही है उस संदेश को समझने का प्रयास कीजिए
आप अपना आहार और व्यवहार नहीं बदलेंगे तो प्रकृति इससे भी कठोर दंड दे सकती है इसलिए वक़्त रहते ही समझ जाए।
प्रकृति यह संदेश दे रही है कि तामसिक प्रवृतियों को बंद कर दीजिए और सात्विकता की और रुख कीजिए।

“कुमति निवार सुमति के संगी”

जब आप एकांत , ध्यान में होते है प्रकृति की छत्र छाया में होते है तब आपके भीतर बहुत सारे अच्छे विचारो का संचालन होने लगता है और तब बुरे विचारो से मुक्त होने लगने है और  आप अपनी सारी दुरबुद्धी को बाहर निकाल देते है और सुमति का आचरण करते है

ऐसा ही हर जगह देखने को मिल रहा है बेशक हम सभी कुछ घबराए हुए है लेकिन घबराहट तो उस अर्जुन को भी हुई थी अर्जुन तो क्षत्रिय था तब भी वो घबराहट से भरा हुआ था
जब श्री कृष्ण ने अर्जुन को यज्ञ निहित कर्म करने को कहा था
आज हम सभी को भी प्रकृति प्रेरित कर रही है और हम भी शायद प्रेरित हो रहे है तभी हम  सभी लोग सकारात्मक सोच की और बढ़ रहे है
इस मुश्किल घड़ी में , फेसबुक , वॉट्सएप, ट्विटर, आदि कहीं भी सोशल मीडिया पर इस समय कोई राजनीतिक , सामाजिक , बुरी ख़बर नहीं है ना ही कोई लड़ाई झगड़ा आदि इत्यादि है जैसा कि हम सुबह से शाम तक इतना स्क्रॉल करते है तब हमे ना जाने कितनी ही नकरात्मक खबरे पढ़ने को मिल जाती है कभी किसी को ट्रोल करते है तो कभी किसी गालियां देते है परन्तु आज हम सभी एक दूसरे को सिर्फ यही कह रहे है।

‘Social Distancing’

सभी देशों में एक ही शब्द गूंज रहा था social distancing एक दूसरे से दूर रहे अर्थात उचित दूरी बनाए रखे ताकि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित ना कर सके स्वयं को भी बचाए और दूसरो को भी बचाए

“घर में रहिए कुछ ना करिए”

स्वयं को सुरक्षित रखीए व अपने परिवार को सुरक्षित रखीए अब हमारी सिर्फ एक यही कोशिश है Corona को हराने की जिस पर हम जीत जरूर हासिल करेंगे
हाथ मिलाना , गले लगना कोई जरूरी नहीं है हम नमस्कार करे तो ज्यादा बेहतर है नमस्कार का अर्थ यह है कि सामने वाले के ह्रदय में विराज रहे प्रभु को नमस्कार करना
हर क्षण प्रभु का स्मरण रहे , हर समय हमें आदर सरकार की भावना को संजोए रखे यही हमारे जीवन का उद्देश्य है जो प्रकृति हमें संदेश दे रही है हाथ मिलाने से दूसरे के में में किस प्रकार के विचार है यह हमें नहीं पता होता इसलिए हमे उन विचारो को शांत करने के लिए नमस्कार की मुद्रा को अपनाना चाहिए और प्रभु स्मरण करे

हमारे विचार आचरण सभी शुद्ध हो रहे है इससे तात्पर्य यह की प्रकृति अपने ऊपर से एक परत,एक आवरण  हटा रही है
जो तामसिक परत है उसे हटाकर सात्विकता की और बढ़ रही है मांस खाने से लोग घबरा रहे है , जीवो के बारे में लोग सोच रहे है यही सुमति है , यही सुविचार है,  कुमति से मुक्ति है , बुरे विचारों से दूर होना है कुमति को निकाल देना है
और अच्छे विचारो का समावेश करना है।
प्रकृति के संदेश को कभी भी नजरअंदाज ना करे प्रकृति के साथ सदैव जुड़े रहे हर एक घटना आपको एक संदेश देती है परन्तु आप उस संदेश को सजगता से नहीं देखते उस पर हम ध्यान नहीं देते

भारत पूरी दुनिया के लिए सदा ही अध्यात्म गुरु रहा है
भारत ही वो देश है जहां लोगो को एक ना एक बार अपने जीवन काल में आना अतिआवश्यक है क्युकी भारत ही आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र है जहां पर आध्यात्मिक शिक्षा पूर्ण होती है सभी के लिए चाहे वो इस संसार में कहीं भी रहता हो
भारत को ढोंग और अंधविश्वास का नाम तो पिछली कुछ शताब्दियों में दिया गया है क्युकी कुछ मूढ़ बुद्धि के प्राणी  हमें गुलाम बनाना चाहते थे  परन्तु उन्हें नहीं पता कि हम स्वाध्याय करते है हमारा जीवन ही स्वाध्याय में बीता है हम किताबो के मोहताज नहीं है हम स्वयं की खोज करके ज्ञान को प्राप्त होते है।
और यह वही समय है जब भारत पूरी दुनिया को जीना सिखाएगा 
भारत ही विश्व गुरु कहलाएगा
तनाव ,अकेलापन यह सब हमारे जीवन पर कभी भी हावी नहीं हो सकता क्युकी हम पहले से एकला चालों वाली राह पर है। असंग होना तो हमारे जीवन का पहला मुख्य लक्ष्य है
एकांत भाव में रहना , स्वयं के साथ होने से नए नए अनुभव को जन सामान्य लोगो के सामने लाना ताकि वो सभी उसी राह पर चल सके , मृत्यु ओर जीवन इन सबसे ऊपर उठना ही हमारा परम लक्ष्य रहा है।
आओ दुनिया को उसी राह पर ले चले वहीं सन्देश दोहराए 

वासुदेव कुटुंबकम्
शब्दों का परिवार
इस वचन को जन जन तक फैलाए
कृष्ण बंदे जगतगुरू सभी के लिए एक ही मूलमंत्र है
स्वयं का न्यास संन्यास स्वयं में रहना ही संन्यास है घर छोड़कर चले जाना संन्यास नहीं है।

#Rohitshabd

कोशिश थी कुछ और की

कोशिश थी कुछ ओर की कर तो मै कुछ ओर ही बैठा
अब जिक्र नहीं कर पा रहा हूं
लेकिन फिक्र मै करता ही जा रहा हूं
कुछ हासिल करने आया था
लेकिन ना जाने क्यों?
लेकिन ना जाने क्यों ?
चक्रव्यूह में फंसता ही जा रहा हूं
उम्मीद थी कि बन जाऊंगा कुछ
हो जाऊंगा कुछ
हासिल कर लूंगा
मुकाम पालुंगा कुछ
लेकिन कुछ हस्तियों के सामने
लेकिन कुछ हस्तियों के सामने
खुद की हस्ती ही मिटा बैठा
अब ना मै रहा
ना मेरा कारवा बस धूमिल हुआ
और लुट गया मेरा जहां
करने को थे पूरे सपने बहुत
लेकिन शायद एक भी ना पूरा कर पाया
खुद को अलग कर
खुद को अलग कर
इस दुनिया से मै चल पड़ा
जहां ना कोई दौड़ है
ना कुछ पाने की हसरत
बस मै हूं मै हूं

कोशिश थी

समय दीजिए

समय

ना जाने किसको आपकी जरूरत है अपने आसपास थोड़ा गौर कीजिए क्या पता आपके कुछ मिनट किसी को एक नई जिंदगी की ओर ले जा सके।

आज जो समय चल रहा है वह बेहद ही तनाव से भरा हुआ है इसलिए स्वयं पर और अपने साथ रहने वालो का ध्यान रखिए।

इस संसार में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका निवारण नहीं हो सकता थोड़ा विलंब अवश्य हो सकता है परन्तु निवारण जरूर होगा इसलिए सब्र रखना जरूरी है।

हम सभी को स्तब्ध कर दिया है सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु ने यह एक गंभीर बात है जो एक कलाकार हमारे लिए छोड़ गए जिन पर हमें ध्यान देना है हम नहीं जानते उन्होंने ऐसा क्यों किया ?

परंतु यह एक सवाल जो अपने पीछे छोड़ गए वो बेहद गंभीर है ऐसा क्यों ? उनके साथ ऐसा क्या हुआ जिस वजह से उन्होंने यह कदम उठाया