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कोरोना के 21 दिन

जनता कर्फ्यू  का आवाहन

21 दिनों के lockdown से पहले जब नरेंद्र दामोदर मोदी जी ने जनता कर्फ्यू का आवाहन किया जिसमें सभी देशवासी अपने अपने घरों में रहे जिसके साथ ही सोशल डिस्टेंस का पालन किया जाए सभी लोग एक दूसरे से कम से कम 2 फीट कि दूरी बनाकर रहे।
मोदी जी की इस बात को तो पूरे देश ने उनका उत्साह ओर उल्लास के साथ मोदी जी का समर्थन किया और साथ सभी भारत देश वासियों ने थालिया , ढोलक , शंख , बर्तन आदि को बजाकर उन सभी सैनिकों का मनोबल बढ़ाया जो इस युद्ध में अपनी जान पर खेलकर दूसरो की सेवा कर रहे है।
ध्वनि की गूंज से समस्त विश्व गूंज उठा हर जगह सिर्फ ध्वनियां गूंज रही थी और भयमुक्त घोषणा का प्रारम्भ किया गया कि अब युद्ध शुरू किया जाए हम सभी इस आपके साथ है और आपकी आज्ञा का पालन होगा।

उसके तुरंत बाद ही मोदी जी ने जाता को संबोधित करके 21 दिन का लॉकडॉउन लगा दिया था जब जनता कर्फ्यू  ख़तम हुआ

मुख्य पात्र एवम् घटनाएं
मुझे एक बात ध्यान अाई जब हम बहुत तेज दौड़ रहे होते है तब हमें हमारे आसपास से गुजर गई चीजे ध्यान से नहीं दिखती परन्तु जब हम धीरे धीरे चलते है तो उन सभी दृश्यों का पूरा आनन्द का लेते है जिनके आसपास से हम गुजर रहे होते है या वो हमारे पास से गुजर रहे होते है।
समय बहुत धीमी गति में इसलिए ध्यानपूर्वक देखे बहुत सुंदर सुंदर घटनाएं ओर दृश्य दिखेंगे

“जैसी जाकी भावना वैसा मन होए”

समय बहुत तेज़ दौड़ रहा था या इंसान आपधापी में लगा हुआ था लगातार इंसान भाग रहा था उसकी जरुरते तो कम थी लेकिन वो बस ना जाने क्यों भाग रहा था यह उस इंसान को भी नहीं मालूम था शायद जिसका एहसास दिलाने प्रकृति ने इंसान कि चाल में कुछ फर्क कर डाला है
कुछ ठहराव अब इंसान में शायद नजर आया है लगता है इंसान की सोच में भी कुछ फर्क अब नजर आने लगा है

जिस गति से समय चल रहा था अब उस गति में नहीं है
समय की चाल भी समझ नहीं आ रही थी आडी टेडी तिरछी सी कुछ हो रही थी अब ऐसा लगता है चाल सीधी हो रही है पृथ्वी की स्तिथि ओर परिस्थिति पर तभी फर्क पड़ता है जब ग्रह , नक्षत्र आदि अपनी जगह से परिवर्तित हो लेकिन क्या अब उनकी दिशा में परिवर्तन है या वो भी रुक गए है ?
ग्रह, नक्षत्र भी अब सीधी चाल में आ गए है ??
समय एक रुकी हुई घटना मे है या अब भी चल रहा है या फिर समय की गति धीमी हो गई है ?
क्या अब से पहले ऐसा हुआ है ?
चारो काल में ऐसा कभी नहीं हुआ जैसा 2020 में हुआ है कि मंदिर बंद हुए हो लेकिन अब हुआ
क्या सभी देवी , देवता अपने अपने स्थान पर चले गए है?  ओर इस संवाद को सुन रहे है जो पृथ्वी पर हो रहा है
इस समय सभी मंदिर , मस्जिद, गुरुद्वारे , गिरजाघर बंद है
लगातार प्रकृति संदेश दे रही है
पूरी अर्थव्यवस्था मतलब लक्ष्मी रुकी गई कहते है लक्ष्मी जी हमेशा चले तो शुभ माना जाता है यदि रुके तो अशुभ होता है यहां किसी एक देश की नहीं पूरे विश्व में सबकुछ रुक गया है।

“वासुदेव कुटुंबकम्”

यह प्रमाणित होता है कि सिर्फ भारत ही नहीं पूरा संसार एक कुटुंब कि भांति है जिसे इस मानव ने विभाजित किया है।
यदि अब भी 26 देश चलायमान स्तिथि में है तो इससे अभिप्राय यही है कि कुछ संवाद वहीं पर हो रहा है यह एक संकेत मात्र हो सकता है
उन देशों की क्या स्तिथि है?  यह जानना आवश्यक है क्युकी वह देश अभी तक Corona
की चपेट में नहीं आए है और यदि आएंगे तब क्या ?
क्या वो भी संक्रमित हो रहे है ?

190 देश अभी तक प्रभावित हो चुके है इस वैश्विक महामारी से
कुल 216 देश है इससे अभिप्राय यह कि अभी भी 26 देश बाकी है क्या वो जैविक अणु से प्रभावित होंगे या नहीं ? यह भी एक सवाल ही है।
परन्तु यह समय काल भी मूक है जो सिर्फ काल की भांति अग्रसर है
श्री मद भागवत गीता में श्री कृष्ण कहते है मै काल हूं बढ़ा हुआ मै सबका विनाश करने के लिए बढ़ रहा हूं
क्या यह समय युग परिवर्तन का तो नहीं है ?

समय रुका हुआ है पूर्णतया रुका नहीं है परन्तु एक शांत लहर है जिसमें सबकुछ हो रहा है लेकिन सब हमारे भीतर ही ही रहा है  जो भी परिवर्तन हो रहे है वो हमारे भीतर ही ही ही रहे है बाहरी कुछ नहीं हो रहा है
हम सभी पत्थर की भांति है हमें कुछ नहीं पता क्या हो रहा है? सभी मूर्छित है यही मानो मुर्छित का भाव यह है कि हमारा जीवन पुनः शुरू होगा लेकिन क्या हमारी मानसिक स्थिति में बदलाव आएगा या नहीं ?

हां जब कोई अवतरित हुआ है या श्री मद्भागवत गीता का उपदेश हुआ है।
क्या वहीं संवाद पुनः शुरू हुआ है? क्या इस समय पृथ्वी पर अर्जुन और कृष्ण संवाद चल रहा है?
या वो संवाद हमारे भीतर चल रहा है?
इस समय हो क्या रहा है ?

जैसा कि कुछ भविष्यवक्ताओं ने लिखा था
कि कलयुग के अंत में  कल्कि अवतार होगा एसी कोई घटना हो रही है ?
जब जब धर्म की हानि होगी तब तब मै आऊंगा
क्या एसा कुछ हो रहा है ? क्या इस श्लोक के माध्यम से हम यह समझ सकते है कि अधर्म इतना बढ़ चुका है अब योगेश्वर श्री कृष्ण अवतरित हो चुके है ?
कल्कि में से क अक्षर की उत्पत्ति हुई है
अब बुद्धि कुमति से सुमति की और बढ़ रही है अर्थात  माता सुमति है
और पिता विष्णु यश भी है
जैसा संकेत है विश्व में अणु रूप से व्याप्त विष्णु

“कलयुग केवल नाम अधारा जपत जपत हो उजियारा”

पूरे चराचर जगत में प्रभु गुणगान भी है इस समय लोग लगातार जप, तो ,पूजा ध्यान आदि में प्रवृत्त हो रहे है।
साथ ही नवरात्रे आए है माता के नौ दिन माता ने भी आकर अपना संदेश दिया है यह समय आत्म मंथन का है
क्या इस पृथ्वी पर कोई अर्जुन है जिसे श्री कृष्ण गुह्य ज्ञान दे रहे है साथ ही जो इस समय वेद वाक्य पर चर्चा कर रहे है ?
प्रकृति अपना आवरण क्यों बदल रही है क्या अति हो चुकी है ? तामसिक प्रवृति पूरी तरह से रुकी हुई है सिर्फ सात्विकता है। तामसिक आवरण हटाना या तमसिक्ता की परत को हल्का करना ही इस समय की मांग है
इस समय पूरी दुनिया शाकाहारी भोजन ही प्रधानता है कुछ पढ़े लिखे गवार जो हमेशा यही कहते है को फूड चैन
लेकिन क्या अब नहीं सब कुछ सही चल रहा है या अगले 21 दिन तक नहीं चलेगा ?
भगवत गीता में आहार पर भी कहां गया है
तामसिक
राजसी
सात्विक
इस समय आप कौनसा भोजन कर रहे है ?
पूरा विश्व सात्विक भोजन ही कर रहा है
प्रकृति भी तामसी आवरण को हटाकर सात्विक आवरण की और बढ़ रही है, स्वास ले रही है प्रकृति और मानव मौन हो गया है वह कुटिया में बैठ गया है

विचारो में जो शुद्धि आ रही है वह भी सात्विक हो रही है
कर्मो के द्वारा भी किसी की कोई हानि नहीं ही रही है इसका भी यही निर्देश मिल रहा है कि कर्म भी सात्विक ही हो रहे है।
हम किसी के लिए बुरा नहीं सोच रहे बल्कि हर किसी की मदद करने की सोच रहे है , वाणी से भी किसी का अहित नहीं कर रहे यदि हम दूर भी है तो भी किसी भी सोशल मीडिया साइट के द्वारा किसी को बुरा नहीं बोल रहे तथा यह बोल कर रोका जा रहा है कि मैं आपसे बहस नहीं करना चाहता यदि मै आपको पसंद नहीं तो आप दूर हाट सकते है लगातार संदेश और एक ही और इशारा हो रहा है कि स्वयं के साथ जीवन

Self Isolation कर्ण कवच जिससे हमारा तात्पर्य यह की घर के भीतर ही रहना और साथ ही घर की चौखट को नहीं लांघना यहां पर आपको आपकी सीमा मै ही रोका जाता है
जिसे लक्ष्मण रेखा कहते है यहां हमारे बहुत सारी नीतियां चलाई जिसके तहत हमें सफलता हासिल हो सके।
जब तक यह कवच है तब तक हमारा कोई अहित नहीं कर सकता इसलिए इस कवच का पालन कीजिए आपके ऊपर शायद कुछ परेशानियां आ सकती है परन्तु आप इस कवच को मत तोडिएगा तभी आप सलामत रहेंगे साथ ही लक्ष्मण रेखा को पार मत करिएगा

हम यूं कहे कि स्वयं के साथ रहे , लोगो से भावनात्मक दूरी रखे , शारीरिक दूरी रखे तथा स्वाध्याय में जुट जाए स्वयं का अध्यन करे यही भागवत ज्ञान सप्ताह है सात दिन , चौदह दिन और जो इक्कीस दिन चलता है आपको 21 दिन मिले है आप कितने तेयार हो सकते है अब यह आप पर निर्भर करता है
राजा परीक्षित को 7 दिन मिले थे उन्होंने अपना जीवन पूर्णतया बदल लिया था हमें इस समय का लाभ उठाना चाहिए जीवन बहुत अमूल्य वस्तु है इस शरीर को यूं ही व्यर्थ ना कीजिए इससे जो अनुभव मिलते है वो बहुत आनंदित होते है विश्वास कीजिए मै आपसे अपने अनुभव से कह रहा हूं। 
कुछ लोग कहते है अभी यह भागवत पढ़ने की उम्र नहीं हुई , या बहुत कुछ है डर लगता है पढ़ने से ऐसा बिल्कुल नहीं है मै 14 साल की उम्र से भागवत का पाठ कर रहा हूं और अब भी कर रहा हूं और बहुत बार पढ़ चुका और सुन चुका और अब भी लगातार पढ़ता हूं और सुनता हूं मेरे जीवन की सभी समस्यायों के हल , जीवन से जुड़े जितने प्रश्न थे उन सभी का समाधान मुझे श्री मद भागवत गीता में मिला और अनेकानेक  रहस्य है जिनको मैने जाना और यह सभी रहस्य  बहुत स्पष्ट शब्दों में दिए हुए है।
इस समय की स्तिथि और परिस्थिति भी मैने आपको भागवत के शब्दों से ही बताई है।
लगातार प्रकृति हमे संदेश दे रही है जो हम सभी प्राणी मात्र को समझने चाहिए और प्रकृति के आदेश व निर्देशों का पालन करना चाहिए
क्युकी सीधा संबंध प्रकृति के साथ है हमें प्रकृति ही संदेश देती है और हम उसी के अनुरूप कार्य करते है।

प्रकृति का संदेश समझिए

पूरे विश्व में भय कि एक स्थिति है पूरा विश्व त्राहि त्राहि कर रहा है  इसके विपरित कुछ और है क्या ???
जब श्री कृष्ण अर्जुन को उपदेश शुरू करते है तब अर्जुन की यही दशा होती है वो भय से भरा  होता है उससे श्री कृष्ण के वचन सुने नहीं जाते उसका रोम रोम कांप उठता है और उसे एसा लगता है कि वह कुल घाति , कुल द्रोही कहलाएगा यदि वो अपनी रूढ़िवादी परंपराओं से छुटकारा पा जाएगा तो जो उसने अपने ऊपर थोप ली है

“भविष्य के गर्भ में क्या छिपा है यह किसी को नहीं पता”

हमें नहीं पता कि भविष्य के गर्भ में क्या है?
जिस प्रकार से महाभारत में कई योद्धा , दोनों तरफ से आ रहे थे उसी प्रकार यहां भी संकट आ रहे है लगातार परिस्थिति बदल रही है

एक नया संकट तब्लीग़ी जमात जो 1927 में शुरू हुआ था  यह इस्लाम धर्म का प्रचार और प्रसार करने के लिए विदेशी यात्रा करते है और अपने इस्लाम धर्म का प्रचार करते है

परन्तु इस समय यह एक प्रकार का चलता फिरता बम जिससे पूरी दुनिया बचना चाह रही है यह लोग किसी भी चीज पर अपनाथुक लगा रहे है , यदि वो कहीं जा रहे है तो थूक रहे है , सब्जी,फल, अन्य खाने पीने के समान पर भी यह लोग थूक रहे है , बल्की इन लोगो ने पुलिस कर्मियों पर भी थूका जिससे की यह बीमारियां फैला रहे है इनका उद्देश्य तो ऐसा लग रहा था है कि यह बीमारी और फैले
अब लोगो की मानसिकता क्या है ?

क्युकी इस अस्त्र का अभी तक कोई इलाज नहीं है इन लोगो में वो संक्रमण है Corona जिसका इलाज अभी तक नहीं मिला पूरी दुनिया Corona का इलाज ढूंढने का प्रयास कर रही है परन्तु मंजिल अभी दूर ही लगती है लगता है अगले कुछ महीनों में ही सफलता हासिल होगी परन्तु तब तक क्या होगा ? जन जीवन सामान्य हो पाएगा ?

भारत में चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह अभी तक नहीं दिखे आज पिछले 10 दिनों से वो कहा है ?
क्या कर रहे है ?
ऐसा कौनसा कार्य है जो इस समय उनके लिए बेहद जरूरी है लेकिन कॉरोना का संकट काल जरूरी नहीं लग रहा है क्या ??

पूरे विश्व में आसमान साफ हो चुका है जीव जंतुओं पर अत्याचार कम होने लगा है उनका सेवन बंद हुआ है परन्तु आज 10 दिन पूरा होने पर  दुबारा चीन से यह खबर अाई की उन्होंने दुबारा मांसाहार का सेवन शुरू कर दिया है इससे क्या समझा जाए ?

इटली में लोगो ने पैसे रोड पर फैक दिए है उन्हें यह समझ आने लगा है कि पैसा कोई महत्व नहीं रखता जीवन ज्यादा मूल्यवान है , जीवन की खुशियां ज्यादा महत्वपूर्ण है पैसा सिर्फ हमारी कुछ जरूरतों को पूरा करता है परन्तु हमारा जीवन नहीं लौटा सकता।

एक बहुत बड़ा सवाल यहां ये खड़ा होता है कि इस lockdown के बाद स्तिथि कैसी होगी ? लोगो का नजरिया कैसा होगा ?

सोचने ओर समझने कि प्रक्रिया में क्या बदलाव होंगे ?
शिक्षा में कुछ बदलाव होंगे ? या दुबारा से हम वैसे ही उसी तेज़ जिंदगी में उलझ जाएंगे ? भूल जाएंगे यह सब क्या हुआ?  इन इक्कीस दिनों में प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का नतीजा परिणाम क्या है ? क्या हम यह समझेंगे या फिर सब कुछ भूल कर फिर वही भगा दौड़ी वाली जिंदगी में लौट जाएंगे

कुछ नहीं बदला

वैश्विक मंदी मानव कृत या प्रकृति का दण्ड हर एक बात के एक से अधिक पहलू होते है उसी तरह यह समय भी बहुत सारे पहलुओं को दर्शा रहा है।
मानव करता तो है परन्तु उस अंदेशा नहीं होता कि उसके इन कृत्यों में क्या क्या छिपा होता है इंसान सिर्फ अपने मद अहंकार में भरा होता है उसे लगता है वहीं सर्वोपरि है और कोई नहीं है परन्तु इन कृत्यों का अंत प्रकृति ही करती है
जिस प्रकार महाभारत के समय शकुनि और अन्य लोगो ने चोसा खेल षड़यंत्र रचा था उसी प्रकार चीन देश  ने भी सभी देशों के लिए कोई षड़यंत्र रचा है जिसमें ज्यादा हानि इटली , और अमेरिका की दिखाई दे रही है उसने यह जैविक हथियार बनाकर पूरे विश्व में फैला दिया और वैश्विक मंदी का शिकार बना दिया तथा सभी देशों पर अंकुश लगा दिया है कोई भी देश अपनी सीमा से बाहर नहीं आ सकता है और ना ही जा सकता है। जिस प्रकार से चक्रव्यूह की रचना की गई हो इसमें सभी देश , लोग जहां , जिस स्थिति में है वहीं ठहर गए है उनका आगे बढ़ना और पीछे हटना दोनों ही मुश्किल हो गया है।

अब भारत देश के प्रधान मंत्री जी ने दिन रविवार  5 अप्रैल को रात 9  बजे 9 मिनट के लिए सभी देशवासी अपने घरों में व घर के बाहर दिए , टॉर्च , मोमबत्ती जलाए जिससे अंधकार रूपी Corona दूर हो सके साथ ही उन सभी लोगों का मनोबल बढ़ाया जाए जो दिन रात कठिन परिश्रम कर जन समुदाय को बचाने की कोशिश में लगे हुए है

दिए जलाने के पीछे वैज्ञानिक दृष्टि , ज्योतिषी विज्ञान क्या है? क्या ये एक ब्रह्मास्त्र है ?
मै मानता हूं कुछ लोगो को तकलीफ होती होगी जब भी हमारे प्रधानमंत्री कुछ करने के लिए कहते है तो परन्तु हम सभी धर्म जाति वर्ग विशेष से ऊपर उठकर सोचना चाहिए क्युकी जब प्रधानमंत्री कुछ करने के लिए कहते है तो 135 करोड़ लोग किसी भी कार्य को एक साथ करते है तो उसका प्रभाव तीनों लोक पर पड़ता है
इस बात से तो मुझे लगता है सभी धर्म सहमत होंगे की जनसमुदाय में किया गया कार्य पूरी कायनात मंजूर करती है।
उसी प्रकार जिस प्रकार आपने ध्वनि का उच्चारण किया तो वह ध्वनि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में गूंज गई ,
यदि आप दीप ज्वलित करते है तो उसका प्रकाश भी पूरे ब्रह्माण्ड पर असर करता है।
यदि सूर्य का प्रकाश हमें मिल रहा है तो को हमारे दीपक , मोमबत्ती का प्रकाश भी सभी को मिलेगा
इसके अलावा हमारा एक भाव , एक एहसास , एक वचनबद्ध , एक कार्य व किर्या आकाश लोक तक नहीं जाएगी ?
यह मै आपसे पूछ रहा हूं क्युकी मै जानता हूं
निश्चित ही स्वीकृत होगा
जो लोग किसी भी धर्म को मानते है उस बात का कोई मायने नहीं है परन्तु आप प्रार्थना तो करते है वह कहीं से कैसे भी हो सकती है उसकी आवाज , उसकी ज्योति आकाश लोक तक अवश्य जाएगी।


यह नए नए शब्द आए है यह पुराने ही शब्द थे किन्तु अब इनको एक नया रूप , कार्य , दिशा , निर्देश दिया गया है जिनकी सहायता से हम अपने जीवन को एक नई दिशा अवश्य देंगे

Self quarantine , Self isolution
Home quarantine , social distancing ,

मरीज को 14 दिनों के लिए अकेले रखा जाता है ताकि वो संक्रमित रोग से बच सके उसकी इच्छा शक्ति , ओर लड़ने की शक्ति देखी जाती है कितनी है जिस प्रकार युद्ध में लड़ रहा सैनिक वीरगति को प्राप्त हो जाता है उसी तरह यहां भी हो रहा है

यह समय एक तरह से आकस्मिक मृत्यु काल का समय भी है जिसमें समय अवधि है

जब तक पेड़ से पीला पत्ता नहीं जाएगा  अर्थात पुराना पत्ता नहीं टूटेगा पेड़ से तब तक हरा पत्ता कैसे आएगा ?
यह तो प्रकृति का स्वाभाविक नियम है जिसे हम सभी परिवर्तन कहते है
इसलिए इस समय ज्यादा घात ज्यादा उम्र के लोगों को हो रहा है स्वत ही वह टूट रहा है एक प्रक्रिया चालू कर दी है काल ने ग्रास करने की उस प्रक्रिया से पुराना पत्ता टूट रहा है।

संग दोष बचना चाहिए अब यही समय जब हमें संग दोष भी नहीं हो रहा है आपको जिनका संग विधाता ने दिया आपके कर्मो के अनुसार आप उन्हीं के संग अभी है तथा वहीं संस्कार आपको मिल रहे है इसलिए जीवन को और ज्यादा अनुभव के साथ जिये
और इन्द्रियों का सुख तो मूढ़ तथा पापायू लोग करते है। इस समय इन्द्रियों को भोगने वाले सभी कार्य लगभग ना के बराबर ही है जैसे कि मदिरा पान , मांस भक्षण , आदि कार्यों का स्वत ही बंद होना ये संदेश देता है कि यह किसी भी प्रकार से हमारे जीवन के लिए नहीं है।

नियत कर्म क्या है ?
कर्म सिर्फ एक ही है उस परम पिता परमेश्वर की पूर्णतया भक्ति में लीन हो जाना इसके विपरित दूसरा कोई कर्म नहीं है।
प्रकृति एक संदेश दे रही है उस संदेश को समझने का प्रयास कीजिए
आप अपना आहार और व्यवहार नहीं बदलेंगे तो प्रकृति इससे भी कठोर दंड दे सकती है इसलिए वक़्त रहते ही समझ जाए।
प्रकृति यह संदेश दे रही है कि तामसिक प्रवृतियों को बंद कर दीजिए और सात्विकता की और रुख कीजिए।

“कुमति निवार सुमति के संगी”

जब आप एकांत , ध्यान में होते है प्रकृति की छत्र छाया में होते है तब आपके भीतर बहुत सारे अच्छे विचारो का संचालन होने लगता है और तब बुरे विचारो से मुक्त होने लगने है और  आप अपनी सारी दुरबुद्धी को बाहर निकाल देते है और सुमति का आचरण करते है

ऐसा ही हर जगह देखने को मिल रहा है बेशक हम सभी कुछ घबराए हुए है लेकिन घबराहट तो उस अर्जुन को भी हुई थी अर्जुन तो क्षत्रिय था तब भी वो घबराहट से भरा हुआ था
जब श्री कृष्ण ने अर्जुन को यज्ञ निहित कर्म करने को कहा था
आज हम सभी को भी प्रकृति प्रेरित कर रही है और हम भी शायद प्रेरित हो रहे है तभी हम  सभी लोग सकारात्मक सोच की और बढ़ रहे है
इस मुश्किल घड़ी में , फेसबुक , वॉट्सएप, ट्विटर, आदि कहीं भी सोशल मीडिया पर इस समय कोई राजनीतिक , सामाजिक , बुरी ख़बर नहीं है ना ही कोई लड़ाई झगड़ा आदि इत्यादि है जैसा कि हम सुबह से शाम तक इतना स्क्रॉल करते है तब हमे ना जाने कितनी ही नकरात्मक खबरे पढ़ने को मिल जाती है कभी किसी को ट्रोल करते है तो कभी किसी गालियां देते है परन्तु आज हम सभी एक दूसरे को सिर्फ यही कह रहे है।

‘Social Distancing’

सभी देशों में एक ही शब्द गूंज रहा था social distancing एक दूसरे से दूर रहे अर्थात उचित दूरी बनाए रखे ताकि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को संक्रमित ना कर सके स्वयं को भी बचाए और दूसरो को भी बचाए

“घर में रहिए कुछ ना करिए”

स्वयं को सुरक्षित रखीए व अपने परिवार को सुरक्षित रखीए अब हमारी सिर्फ एक यही कोशिश है Corona को हराने की जिस पर हम जीत जरूर हासिल करेंगे
हाथ मिलाना , गले लगना कोई जरूरी नहीं है हम नमस्कार करे तो ज्यादा बेहतर है नमस्कार का अर्थ यह है कि सामने वाले के ह्रदय में विराज रहे प्रभु को नमस्कार करना
हर क्षण प्रभु का स्मरण रहे , हर समय हमें आदर सरकार की भावना को संजोए रखे यही हमारे जीवन का उद्देश्य है जो प्रकृति हमें संदेश दे रही है हाथ मिलाने से दूसरे के में में किस प्रकार के विचार है यह हमें नहीं पता होता इसलिए हमे उन विचारो को शांत करने के लिए नमस्कार की मुद्रा को अपनाना चाहिए और प्रभु स्मरण करे

हमारे विचार आचरण सभी शुद्ध हो रहे है इससे तात्पर्य यह की प्रकृति अपने ऊपर से एक परत,एक आवरण  हटा रही है
जो तामसिक परत है उसे हटाकर सात्विकता की और बढ़ रही है मांस खाने से लोग घबरा रहे है , जीवो के बारे में लोग सोच रहे है यही सुमति है , यही सुविचार है,  कुमति से मुक्ति है , बुरे विचारों से दूर होना है कुमति को निकाल देना है
और अच्छे विचारो का समावेश करना है।
प्रकृति के संदेश को कभी भी नजरअंदाज ना करे प्रकृति के साथ सदैव जुड़े रहे हर एक घटना आपको एक संदेश देती है परन्तु आप उस संदेश को सजगता से नहीं देखते उस पर हम ध्यान नहीं देते

भारत पूरी दुनिया के लिए सदा ही अध्यात्म गुरु रहा है
भारत ही वो देश है जहां लोगो को एक ना एक बार अपने जीवन काल में आना अतिआवश्यक है क्युकी भारत ही आध्यात्मिक शिक्षा का केंद्र है जहां पर आध्यात्मिक शिक्षा पूर्ण होती है सभी के लिए चाहे वो इस संसार में कहीं भी रहता हो
भारत को ढोंग और अंधविश्वास का नाम तो पिछली कुछ शताब्दियों में दिया गया है क्युकी कुछ मूढ़ बुद्धि के प्राणी  हमें गुलाम बनाना चाहते थे  परन्तु उन्हें नहीं पता कि हम स्वाध्याय करते है हमारा जीवन ही स्वाध्याय में बीता है हम किताबो के मोहताज नहीं है हम स्वयं की खोज करके ज्ञान को प्राप्त होते है।
और यह वही समय है जब भारत पूरी दुनिया को जीना सिखाएगा 
भारत ही विश्व गुरु कहलाएगा
तनाव ,अकेलापन यह सब हमारे जीवन पर कभी भी हावी नहीं हो सकता क्युकी हम पहले से एकला चालों वाली राह पर है। असंग होना तो हमारे जीवन का पहला मुख्य लक्ष्य है
एकांत भाव में रहना , स्वयं के साथ होने से नए नए अनुभव को जन सामान्य लोगो के सामने लाना ताकि वो सभी उसी राह पर चल सके , मृत्यु ओर जीवन इन सबसे ऊपर उठना ही हमारा परम लक्ष्य रहा है।
आओ दुनिया को उसी राह पर ले चले वहीं सन्देश दोहराए 

वासुदेव कुटुंबकम्
शब्दों का परिवार
इस वचन को जन जन तक फैलाए
कृष्ण बंदे जगतगुरू सभी के लिए एक ही मूलमंत्र है
स्वयं का न्यास संन्यास स्वयं में रहना ही संन्यास है घर छोड़कर चले जाना संन्यास नहीं है।

#Rohitshabd

कोशिश थी कुछ और की

कोशिश थी कुछ ओर की कर तो मै कुछ ओर ही बैठा
अब जिक्र नहीं कर पा रहा हूं
लेकिन फिक्र मै करता ही जा रहा हूं
कुछ हासिल करने आया था
लेकिन ना जाने क्यों?
लेकिन ना जाने क्यों ?
चक्रव्यूह में फंसता ही जा रहा हूं
उम्मीद थी कि बन जाऊंगा कुछ
हो जाऊंगा कुछ
हासिल कर लूंगा
मुकाम पालुंगा कुछ
लेकिन कुछ हस्तियों के सामने
लेकिन कुछ हस्तियों के सामने
खुद की हस्ती ही मिटा बैठा
अब ना मै रहा
ना मेरा कारवा बस धूमिल हुआ
और लुट गया मेरा जहां
करने को थे पूरे सपने बहुत
लेकिन शायद एक भी ना पूरा कर पाया
खुद को अलग कर
खुद को अलग कर
इस दुनिया से मै चल पड़ा
जहां ना कोई दौड़ है
ना कुछ पाने की हसरत
बस मै हूं मै हूं

कोशिश थी

समय दीजिए

समय

ना जाने किसको आपकी जरूरत है अपने आसपास थोड़ा गौर कीजिए क्या पता आपके कुछ मिनट किसी को एक नई जिंदगी की ओर ले जा सके।

आज जो समय चल रहा है वह बेहद ही तनाव से भरा हुआ है इसलिए स्वयं पर और अपने साथ रहने वालो का ध्यान रखिए।

इस संसार में ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका निवारण नहीं हो सकता थोड़ा विलंब अवश्य हो सकता है परन्तु निवारण जरूर होगा इसलिए सब्र रखना जरूरी है।

हम सभी को स्तब्ध कर दिया है सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु ने यह एक गंभीर बात है जो एक कलाकार हमारे लिए छोड़ गए जिन पर हमें ध्यान देना है हम नहीं जानते उन्होंने ऐसा क्यों किया ?

परंतु यह एक सवाल जो अपने पीछे छोड़ गए वो बेहद गंभीर है ऐसा क्यों ? उनके साथ ऐसा क्या हुआ जिस वजह से उन्होंने यह कदम उठाया

यह मन अधीर हुआ जाए

यह मन , यह मन
मन अधीर हुए जाए
ना समझ आए कुछ
यह मन कहना क्या चाहे
बस पहेली सी बुझाए
सवाल की झड़ी
दिमाग में लगाए
कभी घबराए
कभी साहस दिखाए
कभी चुप बैठ जाए
कभी शोर मचाए
कभी क्रोधित हो जाए
कभी शांत ही जाए
फिर सोच मन बार बार घबराए
आगे अब क्या हो ?
जो यह दिमाग भी समझ ना पाए
पुनः पुनः
बस इसी विषय में सोच कर
दिन रात बीत चली जाए
क्या करू अब मै?
यह मन
यह मन
यह मन अधीर हुआ जाए

तेरा ख्याल

तेरा ख्याल

मुझे तो हर बात में कमाल लगता है तू आती है जब जब मेरे ख्यालों में तो मेरे दिल ,दिमाग बहुत धमाल मचता है।

इश्क़ की बात ना कर

फिलहाल ए दिल तू
इश्क़ की बात ना कर
मै तो बर्बाद हूं पहले से
अब और मुझे
तू बर्बाद ना कर

बेफिजूल की चर्चा है ये इश्क़
इस पर बेशकीमती शब्दों को
बर्बाद ना कर

बेमतलब , बेवजह
किसी के ख्यालों में डूबकर
अब वक़्त को तो
तू बर्बाद ना कर

छोड़ बैठ जा बस
इश्क़ एक रोग है
लाइलाज
दिल ओर दिमाग का
अजब सा संजोग है

इस इश्क़ पर
तू अपना पंचभूत
शरीर बर्बाद ना कर …….

इश्क़

शब्द गुजेंगे

मेरे शब्द गुजेंगे
वो शोर मचाएंगे
वो जन जन तक
मेरा संदेश पहुंचाएंगे
लाखो , करोड़ों की भीड़
इकट्ठा कर लाएंगे
एक नया गीत
मेरे शब्द बनाएंगे
जन जन मिल कर
उस गीत को गाएंगे
जन जन में जागृति लाएंगे
हम सब फिर से एक हो जाएंगे
“वासुदेव कुटुंबकम्”
हम कहलाएंगे

शब्द

सचिन तेंदुलकर के बारे में रोचक तथ्य

सचिन तेंडुलकर के बारे में रोचक तथ्य1. 1995 में सचिन तेंदुलकर नकली मूंछ-दाढ़ी और चश्मा लगाकर फ़िल्म ‘रोजा’ देखने गए थे, लेकिन उनका चश्मा गिरते ही सिनेमा हॉल में मौजदू लोगों ने उन्हें पहचान लिया.
2. यह बेहद कम लोग ही जानते हैं कि सचिन तेंदुलकर अपने पिता रमेश तेंदुलकर की दूसरी पत्‍नी के पुत्र है। रमेश तेंदुलकर की पहली पत्‍नी से तीन संताने हुई, अजीत, नितिन और सविता तीनों सचिन से बड़े है।
3. सचिन के पिता रमेश तेंदुलकर प्रसिद्ध संगीतकार सचिन Dev Burman के बहुत बड़े फ़ैन थे. उन्होंने अपने बेटे का नाम भी उन्हीं के नाम पर रखा.
4. स्कूल टाइम में सचिन अपने दोस्तों के साथ वड़ा पाव खाने का कॉम्पीटीशन रखते थे। विनोद कांबली को वे कई बार इस रेस में हरा चुके हैं।
5. स्कूली जीवन में उनके अच्छे दोस्त अतुल रानाडे ने उनके घुंघराले बालों के कारण उन्हें लड़की समझ लिया था।
6. बचपन में यदि सचिन नेट्स में पूरा सत्र बिना आउट हुए खेल लेते, तो उनके कोच ‘रमाकांत अचरेकर’ उन्हें एक सिक्का  देते थे. सचिन के पास ऐसे 13 सिक्के हैं.
7. मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में 1988 में खेले एक दिवसीय अभ्यास मैच में सचिन तेंदुलकर ने पाकिस्तान के लिए फ़ील्डिंग की थी.
8. जब सचिन महज 14 साल के थे, तब Sunil Gavaskar ने उन्हें बहुत ही हल्के पैड तोहफे में दिए थे। अंडर-15 टीम के कैंप के दौरान Indore में वे पैड चोरी हो गए थे।
9. गेंदबाजों को दिन में तारे दिखाने वाले सचिन को नींद में चलने की बीमारी है। एक बार एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने इस बात का खुलासा किया था। उनकी इसी आदत के कारण अकसर उनके घरवाले और टीम के साथी खिलाड़ी परेशान रहते हैं।
10. सचिन तेंडुलकर Left Hander हैं। जी हां, यह सच है। वैसे तो सचिन सीधे हाथ से बल्लेबाजी करते हैं। बॉलिंग में भी उनका सीधा हाथ काम करता है, लेकिन Autograph देने के लिए वे बायें हाथ का इस्तेमाल करते हैं।
11. Dennis Lillee और सचिन तेंदुलकर के रिश्ते पर काफ़ी बात हुई है. M.R.F के फाउंडर लिली ने ही सचिन को गेंदबाजी छोड़ बल्लेबाजी पर ध्यान देने की सलाह दी थी. लिली ने जिन खिलाड़ियों को तेज़ गेंदबाज़ बनने से मना किया उनमें Sourav Ganguly भी शामिल थे.
12. 1995 में सचिन तेंदुलकर नकली मूंछ-दाढ़ी और चश्मा लगाकर फ़िल्म ‘रोजा’ देखने गए थे, लेकिन उनका चश्मा गिरते ही सिनेमा हॉल में मौजदू लोगों ने उन्हें पहचान लिया.
13.  दिलचस्‍प तथ्‍य यह है कि सचिन जब कभी भी टीम के साथ बस में होते हैं तो वे हमेशा पहली पंक्ति में बायीं तरफ की खिड़की वाली सीट पर बैठते हैं।
14. सचिन तेंदुलकर 14 साल की उम्र में मुंबई की रणजी टीम में शामिल हुए. इतनी कम उम्र में मुंबई की Ranji Team में शामिल होने वाले वे पहले खिलाड़ी थे.
15. Sachin ने Pakistan के ख़िलाफ़ अपने पहले टेस्ट मैच में सुनील गावस्कर से उपहार में मिले पैड्स को पहन कर खेला था.
16. 1996 के विश्वकप में सचिन के बल्ले पर किसी भी कंपनी का लोगो नहीं था. विश्वकप के तुरंत बाद टायर बनने वाली कंपनी MRF ने उनसे करार कर लिया था.
17. सचिन तेंदुलकर ने रणजी, दलीप और ईरानी ट्राफ़ी के अपने पहले ही मैचों में शतक जमाए. ऐसा करने वाले वे भारत के एकमात्र बल्लेबाज़ हैं. उनका यह रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है.
18. सचिन ने अपने ज्यादातर बड़े स्कोर गोकुलाष्टमी, होली, रक्षा बंधन और दीपावली जैसे भारतीय त्योहारों पर ही बनाए हैं।
19. सचिन ने अपने टेस्ट करियर में कभी तीसरे क्रम पर बल्लेबाजी नहीं की। बतौर सेकंड ओपनर वे कुल 1 बार उतरे।
20. सचिन के नाम एक खास रिकॉर्ड दर्ज है। वे जिस भी Ranji Match में खेले हैं, उनकी टीम हर बार विजयी रही है।
21. एकमात्र रणजी मैच जिसमें सचिन हारी हुई मुंबई टीम का हिस्सा थे वह Haryana के खिलाफ था।
22. सचिन जब भी बल्लेबाजी के लिये उतरे, मैदान पर कदम रखने से पहले वह सदैव सूर्य देवता को नमन करते।
23. क्रिकेट के प्रति उनका लगाव एक घटना से लगाया जा सकता है। वर्ल्ड कप 1999 के दौरान जब उनके पिताजी का निधन हुआ तो वह पिता की अन्त्येष्टि में शामिल हुए और वापस मैच खेलने लौट गये। अगले मैच में सचिन ने शतक ठोककर अपने दिवंगत पिता को श्रद्धांजलि दी।
24. सचिन अपनी Ferrari के इतने दीवाने हैं कि वे अपनी पत्नी Anjali को भी इसे चलाने नहीं देते.
25. Third Umpire द्वारा आउट दिए जाने वाले पहले बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर हैं. 1992 में, डरबन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ़ खेले जा रहे टेस्ट मैच के दूसरे दिन जोंटी रोड्स के थ्रो के बाद यह मामला तीसरे अंपायर को रेफ़र किया गया. अंपायर कार्ल लाएबनबर्ग ने सचिन को आउट करार दिया था.sachin tendulkar facts in hindi
26. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सचिन 1990 में पहली बार टीवी पर दिखे. इसके बाद वे Kapil Dev के साथ कई विज्ञापनो में नज़र आए. सचिन तेंदुलकर पहली बार एक दवा कंपनी के ‘प्लास्टर’ के विज्ञापन में नज़र आये थे।
27. बच्चे, महिलाएं, बुर्जुग हर उम्र के लोग सचिन के दीवाने हैं. यही वह क्रिकेटर है, जिसने क्रिकेट को घर-घर पहुंचा दिया. कहा जाता है कि “सचिन के आउट होते ही आधा भारत टीवी बंद कर देता था”.
28.  सचिन तेंदुलकर का बैट लगभग 1.5 किलोग्राम का होता था. इतना भारी बल्ला सिर्फ़ दक्षिण अफ्रीका के लांस क्लूजनर इस्तेमाल करते थे.
29. सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली को ‘बाबू मोशाय’ कहते हैं और गांगुली उन्हें ‘छोटा बाबू’ कह कर पुकारते हैं.
30. सचिन के पिता रमेश तेंडुलकर ने सचिन को करियर की शुरुआत में ही शराब और सिगरेट के विज्ञापनों से दूर रहने की सलाह दी थी और सचिन ने भी अपने पिता से ऐसा न करने का वादा किया था।
31. सचिन ने अपना 5000वां, 10000वां और 15000वां रन भारतीय सरजमीं पर बनाए हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि उन्होंने अपना 5000वां और 10000वां रन ईडन गार्डन्स पर पूरे किए और दोनों अवसरों पर विरोधी टीम पाकिस्तान थी।
32. अब सचिन के रिटायरमेंट के बाद उनके बच्चे England के लिए भी खेल सकते हैं। क्योकीं उनकी नानी अन्नाबेल इंग्लैंड की हैं।33. भारत सरकार की तरफ़ से सचिन तेंदुलकर को पद्म विभूषण, राजीव गांधी अवॉर्ड (खेल), महाराष्ट्र भूषण अवॉर्ड, पद्मश्री, अर्जुन अवॉर्ड और भारत रत्न से सम्मानित किया गया है.