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सुस्ती भरा दिन

एक सुस्ती भरा दिन यूं ही बीत चला गया जिसका पता भी नही चला, आज पूरे दिन रजाई में लेटा और बैठा रहा फिर क्या था बस मैं अपने ही ख्यालों में कही गुम रहा कुछ विचार आए और कुछ नही, लेकिन मैंने किसी भी विचार पर कोई कार्य नहीं किया क्युकी मैं पूरा दिन सुस्ताना ही चाहा रहा था।

सुस्ती शारीरिक थी लेकिन दिमागी कतई भी नही कभी उठ बैठ जाता और अपनी स्पाइरल वाली नोटबुक में लिख देता बस आज यही किया क्युकी आज कही जाना तो नही था सप्ताह के आखिरी दो दिन दिल्ली बंद है, और जब सबकुछ बंद ही है तो फिर जाकर फायदा भी क्या, बस यूही इधर उधर घूमकर वापस आ जाता और बिना किसी मतलब मैं अपना समय सड़कों को नापने में लगाता इसलिए मैं कही गया नहीं बस घर पर रहा।

कुछ विचारो पर कार्य किया और कुछ नही
कुछ विचार बहुत जरूरी थे और कुछ का कोई मतलब नहीं था , कुछ ऐसे विचार थे जिनसे 2022 को प्लान करना था और कुछ ऐसे जिनको दिमाग से हटाना था

लगातार विचारो से खेलना मेरी आदत बन गई है हां मुझे व्यायाम करना कोई खास पसंद नही है लेकिन अपने विचारो को देखने में नही संकुचता तनिक भी

यह आज सुस्ती भरा दिन आज ऐसे ही खतम होने लगा था तो सोचा कुछ लिख देता हूँ वैसे कुछ खास नहीं था बस यही की विचारो को देखना , पढ़ना , समझना , जानना अत्यंत है जरूरी क्युकी इन्ही से बनती जिंदगी पूरी

अपने विचारो को यूं ही मत बिगाड़े इन्हे बस सवारे, और इन विचारों से कुछ बेहतर कल का निर्माण करे।

यही था आज का विचार चलता हूं सुस्ताता हूं फिर आता रहूंगा बार बार मिलूंगा आपसे यही हर बार

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जीवन शिक्षा

अनावृत जीवन शिक्षा न रुके सदा नया कुछ न कुछ रहे सीखते ….
जीवन निरंतर शिक्षा देता बिना शुल्क के ।
सदा सीखने जब होगी आदत में शुमार….
जीवन का हृदय से आपके प्रति आभार ॥

जीवन आपको सौंपने आया अपना सर्वोत्तम ..
भरपूर ख़ज़ाना उसका कभी नहीं होता कम ।
वादा करे सदा जीवित रहे सीखने का जनून..
ख़रीदी हम पे आधारित की थोक या परचून॥

जीवन सदा देने के लिए बना हे ये मॉडल ऐसे तैयार हे इसका निर्माता हे जो कोई क्लेम नहीं करता लेकिन हे सब चीज़ें एक दूसरे को सपोर्ट करती हे सहायक हे जीवन को आगे सही से चलाने में वो एक अंग का काम करती हे अब ये व्यक्ति विशेष पे आधारित हे वो इस जीवन से क्या क्या ले सकता हे ओर क्या क्या लौटा सकता हे ।
मुझे लगता हे जीवन सही से चलाने के लिए इसको इस्तेमाल करके इसकी भरपाई भी करे ताकि ये प्रक्रिया चली आ रही हे उसमें अवरोध न उत्पन्न हो आप ने लिया ओर थोड़ा भी लौटाया ये जीवन उसे बढ़ा देता हे ये इसकी ख़ासियत हे ये सर्जनक़ारी व्यवस्था हे जो देने के लिए बना हे ।
ज़मीन खोदो ख़ज़ाने निकल रहे हे हीरे भाँति भाँति के खनिज पदार्थ सोना ओर चाँदी क़ीमती धातुएँ गैस अकूत सम्पदा से सम्पन्न हे ये धरा ।
वातावरण किसने इसकी रूपरेखा रखी होगी ये जंगल ,पहाड़, गुफाये ,नादिया , समुन्दर फल फूल वनस्पति पेड़ ये जानवर पक्षी नहीं बखान कर सकते एक करोड़ चीज़ें वो जान लेंगे तो एक करोड़ फिर अनजान रह जाएँगे ये सब हमें विरासत में मिला कोई गहरी विशाल अथाह अबूझ शक्ति हे जो यहाँ जीवन को पनपाना चाहती हे ओर हम उस शक्ति के बहुत ही निकट हे नहीं समझे तो दूर भी बहुत हे ओर मज़े की बात पहचाने तो वो बहुत निकट हे ओर नकारे तो कुछ भी नहीं हे क्या ग़ज़ब का ये खेल हे न ? ये मेरा प्र्श्न हे मुझे लगता हे ये एक खेल हे आपका क्या कहना हे ।
मुद्दा ये हे कि इस जीवन से सीख ले इसके डिज़ाइन इसकी संरचना से सीख ले तो काफ़ी सारे मेरे हिसाब से सब उठे प्रश्नो के उत्तर इसी में छुपे हे ।
अब का तो मुझे पता नहीं पहले अंग्रेज़ी के पेपर में एक दो प्रश्न इस प्रकार के होते थे जिसमें एक कहानी लिखी संवाद लिखे अब प्रश्न उसी घटनाक्रम पर आधारित 4-5 प्रश्न पूछ लिए जाते थे जिनका जवाब उसी संवाद कहानी मेन छुपा होता था कहने का मतलब ये हे की उसी प्रकार हमें भी जीवन रूपी paragraph मिला हे प्रश्नो के उत्तर इसी में निहित हे बस सही से इस मिले जीवन की कहानी को पढ़ना हे ।
सब उत्तम हुआ हे आगे भी उससे कम नहीं होगा अति उत्तम होगा .
सब का मंगल हो सभी का कल्याण हो ।
सर्वतः दा भला । जय हो सबकी विजय

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जरूरी नहीं हर बात

जरूरी नहीं हर बात अच्छी लगे, हर बात अपनी ही मनमानी की हो, कुछ ऐसी बाते होती है जो हमारे वश में होती ही नहीं है।
जरूरी नहीं हर किताब अच्छी लगे, हर फिल्म अच्छी लगे, हर मौसम अच्छा लगे हर सफर और हमसफर भी अच्छा लगे कुछ साथ मुलाकात जज़्बात ऐसे होते है जो ना चाहकर भी जिंदगी के हिस्से होते हैं , कहानी और किस्से होते है , उनका होना भी घटना है, उस घटना में बहुत कुछ अपना है तो बहुत कुछ पराया है, बहुत सारी चीज़े जो हो रही है वो हमारी समझ से पड़े होती है।

कुछ जो हमे समय आने पर समझ आ जाती है, ओर कुछ समझ नहीं आती क्युकी हमारी समझ भी उस स्तर तक नहीं पहुच पाती इसलिए जो हो रहा है, जो घटना बन रही है, वो अच्छी ओर बेहतर हो रही है, बस यही सोचकर हमे आगे बढ़ना है जिंदगी की सारी समस्या स्वयं ही हल हो जाती है।

या तो वो दुर्घटना है या फिर महत्वपूर्ण घटना यह तय करना तुम्हारी जिम्मेदारी है, की कितनी दूर साथ चले कुछ दूर या पूरी जिंदगी साथ निभाते चले कुछ को बीच रास्ते में छोड़ा जा सकता है। कुछ को बिलकुल भी नहीं फिर उसका हमारी पसंद और न पसंद से कुछ लेना देना नही,

बस साथ निभाना उसमे बहुत कुछ छिपा है, जो आपको समझना है हो सकता है वो आपके लिए सही है, लेकिन आपको पसंद नही था या नही है लेकिन वो एक दम फिट है आपके लिए , आपके जीवन के लिए।

इसलिए जिंदगी का साथ निभाते चलो
मेरे दोस्त यह जिंदगी इस जिंदगी के साथ थोड़ा मुस्कुराते चलो ,
कभी दुख होगा तो कभी सुख होगा
लेकिन सफर जिंदगी का है
अतंत अच्छा ही होगा
यूं गम को अपने सीने में दबाकर कब तक चलोगे
मुस्कुरादो उस दबे हुए घाव के भी तो गम भरेंगे, क्युकी जरूरी नहीं हर बात अच्छी लगे

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दशमेश गुरु जी

आज का विषय बहुत ही सुंदर
दशमेश गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी के जन्मदिवस के विषय में

उनका आकाशीय कथन से शुरुआत करेंगे
जो हे
चिड़ियों को में बाज से लड़ाऊ , गीदड़ों को में शेर बनाऊ !
सवा लाख से एक लड़ाऊ तभी गोविंद सिंह नाम कहाऊ !!
दशमेश गुरु जी जिन्होंने खालसा की नीव रखी सिक्खों को सिखी को जोड़ा ओर एक जीवन की अमिट निष्कलंक विधि दी अमृत पान करवा के पाँच प्यारे दिए ओर पाँच कक्के दिए जो थे कंघा ,केश, कढ़ा ,कच्छेरा ओर कृपाण
आप जी का जन्म पटना साहिब में हुआ था आपने मुग़लों से 14 बार युद्ध हुआ ओर ओर आपकी सदा जीत हुई ।

आपजी हृदय से कवि ओर मस्तिष्क से एक अपराजित योद्धा थे ओर परम ज्ञानी कई भाषाओं के जानकार जिसने संस्कृत ,गुरमुखी अरबी , फ़ारसी ओर न जाने ओर कौन कौन सी भाषाओं में वो पारंगत थे ओर 9 वर्ष से भी एक महीना क़रीब कम में वो दसवे गुरु की पदवी मिली।

हम नमन करते हे उनके किए बलिदान के लिए , पूरा परिवार पिता जी श्री तेग़ बहादुर जीं ने शीश को काटा गया गुरुद्वारा श्री शीश गंज उसका बलिदान की गवाह हे उनको खुद 42 वे वर्ष में धोखे से मुग़लों ने सीने में घाव देकर हुई उससे पहले उनके दो पुत्र चमकौर के युद्ध में शहीद हो गए ओर दो पुत्रों को मुग़लों ने ज़िन्दा दिवार में चुनवा दिया।

चमकौर का युद्ध क्या कमाल का था एक तरफ़ 40-43 सिख थे ओर दूसरी तरफ़ 10 लाख की विशाल मुग़ल सेना ओर क़ाबिले तारीफ़ बात ये थी गुरु गोविंद सिंह जी ने जो मेने शुरुआत में उनके वचन को लिखा था कि चिड़ियों से में बाज़ लड़ाऊ , गीदड़ को मैं शेर बनाऊ ! सवा लाख से एक लड़ाऊ तभी गोविंद सिंह नाम कहाऊ !! को सिद्ध कर दिखाया ये थे महान महान श्री श्री गोविंद सिंह जी ।

मेने अपनी जीवा से उनका नाम लिया हे मेरी लेखनी मेरी जीवा भी शुद्ध हो गई ऐसा प्यारा प्यारा नाम श्री गुरु गोविंद सिंह ।
वाणी नहीं कर सकती उनका बखान ये वाणी की कमी जो कभी पूरी नहीं की जा सकती आज के दिन ऐसी पुण्यात्मा महान विभूति संत श्री गोविंद सिंह जी को क्षत क्षत नमन वंदन ।
जो बोले सो निहाल ससरियाकाल।

योग क्या है

योग क्या है आप जानते हैं ? असल में योग क्या है ?
क्या योग शब्द सुनते ही आपके दिमाग में शरीर को अलग-अलग अवस्थाओं में रखने की फोटो सामने आने लगती है ?
क्या आप योग को केवल एक शरीर की चर्बी घटाने का या फिर अत्यधिक बढ़े हुए वजन को कम करने का माध्यम समझते हैं?

ऐसे ही न जाने कितने सवाल है अलग-अलग मनुष्यों के मस्तिष्क में आते हैं। मैं काफी समय से योग से जुड़ा हुआ हूं। योग के बारे में मैंने काफी पढ़ा भी है और समझा भी है, परंतु यह कैसी प्रक्रिया है जिसे आप केवल पढ़कर नहीं समझ सकते, इसमें आपको स्वयं संलग्न होना पड़ेगा, केवल तभी आप इसकी गुणवत्ता को समझ पाएंगे।

शरीर की चर्बी घटाना या वजन को कम करने के लिए एक कारगर उपाय है इसमें कोई शंका वाली बात नहीं है परंतु योग को इतना छोटा समझना काफी गलत होगा।


हमारे में से अधिकतर लोग योग को सिर्फ आसन तक ही जानते हैं या फिर प्राणायाम, जो कि आजकल कई योगियों ने प्रचलित कर दिया है। परंतु इसके और भी कई आयाम है।


अगर आप हिंदी भाषा के भी जानकार है तो योग का हिंदी में अर्थ होता है जोड़ना या जमा करना। ठीक उसी प्रकार एक योगी स्वयं को इस प्रकृति से जोड़ता है। योग के भी कई प्रकार है। जैसे कि अष्टांग योग,कर्म योग, भक्ति योग या ज्ञान योग इत्यादि। यहां में केवल अष्टांग योग की पर बात करना ज्यादा अच्छा समझता हूं क्योंकि जिस योग के बारे में आज का मनुष्य समझता है, वह अष्टांग योग का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है।

अष्टांग योग:
अष्टांग का सीधा सा अर्थ है आठ अंगों का होना। योग के आठ अंग कौन से हैं क्या आप जानते हैं?

यह सभी आठ अंग इस प्रकार हैं:
१ यम
२ नियम
३ आसन
४ प्राणायाम
५ प्रत्याहार
६ धारणा
७ ध्यान
८ समाधि

साधारणतया आज के समय में मनुष्य बिना ज्ञान के अभाव में सीधा आसन करने की कोशिश करता है। परंतु यह थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इसके लिए आपको अपने सारे नियम पालन करने होंगे। सर्वप्रथम योगी का खानपान उसकी दिनचर्या योग के अनुकूल होनी आवश्यक है। आसन करने के समय उसका उदर बिल्कुल साफ होना चाहिए। इसके अलावा आपको एसी जगह का चुनाव करना होगा जहां आपको वायु पर्याप्त मात्रा में मिल सके।

इसके बाद अगर बात की जाए आसनों की तो आसन कई प्रकार के हो सकते हैं। परंतु साधारणतया मैंने ध्यानात्मक आसन, खड़े होकर किए जाने वाले आसन और लेट कर किए जाने वाले आसनो की श्रेणी में रख सकते हैं।

ध्यानात्मक आसन का सीधा सा अर्थ है वे सभी आसन जिन्हें की एक स्थिति में बैठकर किया जा सकता है। इसमें प्रचलित नाम है पद्मासन, सिद्धासन, गोमुखासन, विरासन, अर्ध पद्मासन तथा वज्रासन इत्यादि।

सभी आसनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है, परंतु पद्मासन को आसान श्रेष्ठ कहा जाता है। इसमें योगी को अपने दोनों पैरों को मोड़कर विपरीत जंघाओं पर रखना होता है वह मेरुदंड को बिल्कुल सीधा रखना होता है। यह आसन ना केवल आपके पैरों पर कि जाओ डालता है परंतु आपके पूरे शरीर को मजबूत बनाता है। जब आप इस आसन को लंबे समय तक अभ्यास रद्द हो जाते हैं तो आप इसे अलग-अलग अवस्थाओं में भी कर सकते हैं। परंतु जब शुरुआती समय में अगर यह असर नहीं होता तो आप केवल एक पैर दूसरी जगह पर रखकर अर्ध पद्मासन से शुरुआत कर सकते हैं। फिर धीरे-धीरे अभ्यास रात होने के बाद आप पूर्ण पद्मासन की स्थिति में आ जाएंगे।

इसके अलावा बात अगर वज्रासन की की जाए तो केवल यह एक आसन है जिसे आप भोजन के उपरांत भी कर सकते हैं। यह आपकी पाचन प्रक्रिया को भी तो सुदृढ़ करता ही है, साथ साथ आपकी हड्डियों को भी बहुत मजबूती प्रदान करता है। यदि आप जोड़ों के दर्द से पीड़ित है, या फिर आपके पैर बहुत कमजोर है, तो आपको यह आसन शुरू करना चाहिए। केवल कुछ ही समय के अभ्यास के बाद आप पाएंगे कि आपके पैरों के घुटने काफी मजबूत हो जाएंगे। इसी प्रकार बाकी सभी आसनों की भी अपनी अपनी अलग-अलग उपयोगिता है, अगर मैं अपने अनुभव से कहूं तो मुझे पद्मासन की स्थिति सबसे श्रेष्ठ लगती है।

प्रणायाम:
आजकल व्यक्ति टीवी देख कर या पुस्तकों में पढ़ कर कुछ प्राणायाम कर रहा है वह भी उसकी उपयोगिता और तरीके को जाने बिना। आज के समय में सबसे ज्यादा अगर लोग जानते हैं तो कपालभाति और अनुलोम विलोम को। लेकिन जहां तक मैं समझता हूं, कपालभाति एक प्राणायाम ना होकर एक शुद्धि क्रिया है, जो कि योग के षट्कर्मों में से एक है। और अगर बात की जाए अनुलोम-विलोम की तो उसे अधिकतर योगी नाड़ी शोधन प्राणायाम के नाम से जानते हैं। अर्थात नाड़ियों को शुद्ध करने वाला प्राणायाम।

मेरे अर्थात प्राणायाम का सीधा सा अर्थ है प्राणों को एक अलग आयाम देना अर्थात एक अलग रास्ता देना। बात यह आती है कि यह प्राण क्या है। योग में प्राणों को वायु रूप बताया गया है व उसके पांच प्रकार बताए गए हैं।
प्राणवायु
अपान वायु
उदान वायु
व्यान वायु
समान वायु

मानव शरीर के संचालन में इन्ही पांच प्रकार की वायु का बड़ा ही महत्वपूर्ण स्थान है।

अलग-अलग प्पुस्तकों में अलग-अलग प्राणायामो के बारे में जानकारी मिलती है परंतु प्राणायाम के तीन मुख्य अंग बताए गए हैं:
रेचक
कुंभक
पूरक

श्वास को भीतर लेना, श्वास को बाहर छोड़ना और रुकना।
अब रुकने में भी दो अवस्थाए मुख्य रूप से बताई गई है:
बाहरी कुंभक
आंतरिक कुंभक

बाहरी कुंभक अर्थात शरीर की सारी वायु को बाहर निकाल कर उसी अवस्था में रुके रहना। इस स्थिति को धीरे धीरे बढ़ाया जा सकता है।
और आंतरिक कुंभक अर्थात स्वस्थ शरीर में पूरी तरह भरकर अंदर ही रोके रखना।
इन दोनों ही स्थितियों के अपने-अपने शारीरिक व मानसिक लाभ है। अब अगर नाड़ी शोधन या अनुलोम-विलोम की बात की जाए तो इसमें बात आती है नाड़ियों की।

योग के अनुसार मानव शरीर में 72000 नाडिया पाई जाती है। जिनमें की तीन प्रमुख है:
इड़ा
पिंगला
सुषुम्ना

इड़ा और पिंगला कोई सूर्य और चंद्र नाड़ी कहा जाता है। इसके ऊपर पूरा एक विज्ञान है जिसे स्वर विज्ञान कहा जाता है।

इसके साथ ही योग में कई क्रियाओं के बारे में बताया गया है। शांभवी क्रिया, अग्निसार क्रिया, वज्रोली और अश्विनी क्रिया आदि।

योग को केवल इतने से शब्दों में नहीं बताया जा सकता है। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा विज्ञान है। फिर भी हमने संक्षिप्त तौर पर थोड़ा बहुत लिखने की कोशिश की है अगर इसमें कोई त्रुटि हुई हो तो हम क्षमा चाहते हैं और सभी सुधारात्मक कार्यों का स्वागत करते हैं।

धन्यवाद

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सोशल मीडिया

सोशल मीडिया पर लगातार शब्दो का चलन होता है, हर रोज कुछ ऐसे शब्द प्रचलित होते है जिनको ज्यादा बार सांझा, पसंद किया जाता है और साथ उस पर कमेंट तथा लिखते है उसके बारे में था, कई प्रकार की सूचना और खबर होती है, जिसको सभी देश विदेश में फैलाना चाहते है, जिससे उनको प्रसिद्धि मिले या फिर उनके मन को अच्छा लगता हो इसका कारण कुछ भी हो सकता है।

जैसे की आज का शब्द है।

बजट 2024-2025 इस शब्द को बहुत ट्रेंड किया जा रहा है, क्युकी बजट की तारीख कल यानि 23 जुलाई की है, जिसमे फाइनैन्स मिनिस्टर निर्मला सीतारमन, इस सत्र का बजट पेश करेंगी, जिसका गूगल पर ट्रेंड इस समय 200k चल रहा है, तो इसी प्रकार से लोग सोशल मीडिया पर व गूगल पर जो भी सर्च करते है वो ट्रेंड में आ जाता है, जितनी अधिक संख्या होगी व उतना ही बड़ा ट्रेंड बन जाता है।

कल का बजट कैसा होगा?

क्या टैक्स देने वाले व्यक्ति को छूट मिलेगी या फिर से टैक्स देने वाला पीस जाएगा यही सवाल जनता के मन में चल रहे होते है, जिन्हे लोग सोशल मीडिया व गूगल पर खोज करते है।

अब ज्यादातर लोग इस बात को खोज रहे है तथा लिख भी रहे है साथ उस पर अपनी टिप्पणी भी देते है, पसंद और नापसंद की

#हैश टैग को इसीलिए प्रयोग में लाया जाता है ताकि एक जैसे शब्दो को आसानी से खोजा जा सके इंटरनेट पर ओर उसी से ट्रेंड ओर ज्यादा से ज्यादा खोज प्राप्त की जाती है, साथ ही यह भी पता चलता है की यह शब्द कितनी बार प्रयोग में लाया गया है।

आपका स्वागत है हमारी पोस्ट आने के लिए उम्मीद करते है आपको हमारी पोस्ट पसंद आ रही है। जरूर बताएं आप किस टॉपिक पर ज्यादा पढ़ना चाहते है।

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Happy Guru purab

happy guru purab

In Putran Ke Sees Par Vaar Diye Sut Chaar, Chaar Muye To Kya Hua Jeevat Kayi Hazaar
(I have sacrificed my four sons. So what if my four sons are dead, when thousands are alive)

My Sincere Tribute to Life of Shri Guru Gobind Singh Ji

Happy Guru purab to all

टहलने निकल गया

ज्यादातर मैं यूट्यूब पर जाता हूं वहा पर बुक समरी और काफी कुछ नया सीखने के लिए वीडियो देखता हूं लेकिन आज मैं कुछ ऐसे ही टहलने निकल गया फेसबुक , ट्विटर और इंस्टाग्राम पर जाने पर अच्छा अच्छा लग रहा था क्युकी गया काफी दिनों बाद था।

बस फिर क्या था मैं टहलता ही रहा शाम हो गई और पता चला की मैं अपना दिन यूं ही व्यर्थ कर बैठा बिन मतलब की कुछ बाते पढ़ी और कुछ वीडियो को देखता रहा जिनका ना कुछ ज्यादा सर पैर था। लेकिन इन सभी विडिओ में आज कुछ सीखने को नहीं मिला इसलिए कम अच्छा लगा

पूरा दिन व्यस्त भी खुद में दिखने लगा अंत में जब सोने के बारे में ख्याल आया तो एक विचार आया कि आज किया क्या ?

फिर पूरे दिन को टटोला और समझ आया कि मैं तू आज खाली झोला जिसमे सुबह से लेकर शाम होने तक कुछ भरकर ना लाया।

तो मुझे बताए आपने कुछ भरा अपने झोले में या यूं मेरी तरह खाली झोला करते हुए वापस चले आए।

फिर मिलेंगे शुभ रात्रि

मूक कार्य प्रणाली

बदहवास मूक कार्य प्रणाली
आज का विषय बहुत ही गम्भीर समाज की परिस्थिति जिसमें बुना तंत्र को आपकी सहायता के लिए रचा बुना गया हे वो ही आपका दुश्मन बन जाता हे ऐसा क्या हो गया हे जिसे पोषित किया जाता हे जो शिकारी क्यूँ बन जाता हे।

मैं आज बात कर रहा हूँ जो हमारे देशवासी जो नववर्ष 2022 के उपलक्ष्य में माता वैष्णोदेवी के दर्शन के निमित गए ओर कई परिवारों के परिजन उनकी लाश रूप में नव वर्ष में पहुँचे ।
मैं सरकारी आँकड़ो पे बात नहीं करूँगा उसने सदा विरोधाभास रहा हे वो अक्सर बहुत कम ही आंके जाते हे वो इसका प्रभाव तो हे पर इस संवाद का मेरा विषय नहीं हे ।

मेरा कहना कि क्या ये घटना पहली बार हुई हे इस घटना का दोषी कौन कौन हे जल्द से जल्द उजागर होना चाहिए ओर समय से दंडित होना चाहिए ओर भविष्य में ऐसी दुर्घटना (में इसे हत्या की संज्ञा दूँगा )न हो उसके माप दंड बनाए जाए ओर देखा जाए उनका उचित पालन हो ।

किसी ने अपने बेटे -बेटी किसी ने अपने माँ -बाप को किसी ने दादा -दादी नाना नानी ,बुआ ओर चाची ओर न जाने कितने ही रिश्तों का दुखद अंत देखा मज़े की बात हे जो शासन प्रशासन चुस्त दुरुस्त होता तो न होता ये सरासर प्रशासन की कमी हे चाहे वो shrine बोर्ड हो पुलिस प्रशासन, क्षेत्रिये प्रशासन या राज्य प्रशासन ओर शासन की क्या बिसात हे जो उसपे उँगली उठाई जा सके ।

ये सब तंत्र आपकी सुरक्षा ओर ख़ुशहाली हे लिए बुना गया हे इसमें लाखों कर्मचारी कार्यरत हे लेकिन उनकी ऊर्जा का दुरुपयोग किया जाता हे उसमें से काफ़ी हद तक अपनी नौकरी बरकरार रहे लगे रहते हे करे चाहे कुछ भी उनको देखने वाले उनसे कुछ ओर ही उम्मीद रखते हे ये सब चल रहा हे ।

क्या हम इंसान इतने बदहवास हो चुके हे हम इतना कर चुकाते हे हर वस्तु पे कर gst ओर उसके बदले हमे क्या लोटा के देता हे ये शासन ओर प्रशासन.
जब कटरा में व्यक्तियों का पास बनता हे जो यात्री गन होते हे तो वो बदहवास होकर कार्ड बना रहे थे उनको ज्ञान नहीं था कि ऊपर कितने लोग हे कितनो को हम भेज रहे हे ओर पुलिस वाले उनसे सम्पर्क नहीं कर रहे कि न भेजिए इतने व्यक्ति दुर्घटना हो सकती हे ओर इतने समझदार लोग हे प्रशासन वाले कि एक ही रास्ता आने ओर जाने का वाह क्या बात हे फिर दुर्घटना क्यूँ न हो वो तो घटित होगी ही होगी ।

न कोई आपस में समन्वय committee न ही cc tv प्रबंधन या हे तो कोई उसका उपयोग नहीं ये घोर लापरवाही हे इतने लोगों उनका क्या दोष था वो बहुत सकारात्मक सोच के साथ आए होंगे ताकि नववर्ष उनके ओर उनके परिवार के लिए शुभ हो मंगल हो।

मैं हृदय से दिवंगत देशवासियों के लिए अपनी श्रधांजलि देता हूँ ओर इसकी सही हाथों से समयबद्ध जाँच हो ओर भविष्य में ऐसी घटना न घटे उसपे ज़रूर ज़रूर उचित कार्यवाही करे हम सब इस धरती के वासी हे न करे अन्याय किसी से ख़ाली हाथ आए थे ओर ख़ाली हाथ ही जाना हे ।
संवाद

नए नियम लागू

आज से नए नियम लागू हुए जानिए क्या है वो नियम जो आपको फॉलो करने होंगे, मेट्रो में सफर अब हुआ 50% और यात्रा को खड़े होकर तय करना अब दंडनीय अपराध होगा जिस पर जुर्माना लगाया जाएगा।

ऑटो, टैक्सी में सफर सिर्फ अब फिर से दो लोग ही कर पाएंगे।

बस में भी एक सीट पर एक व्यक्ति बैठेगा, मुह पर मास्क लगाना अनिवार्य नहीं तो होगा जुर्माना

दिल्ली की सभी बड़ी मार्केट अब ओड और इवन के आधार पर ही खुलेगी।

शर्तों के साथ अब दिल्ली में होगा सफर, सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सरकार ने लिया फैसला इन्ही नए नियम लागू होने के साथ होगा सब चालू।