भूल जाता हूँ भटक जाता हूँ , शायद बेहोशी के आलं में भी खो जाता हूँ,अपनी ही चुनी हुई राहों से फिर ठोकर खाकर होश में आता हूँ संभाल जाता हूँ चलना,दौड़ना,फिर से सिख जल्द वापस आ जाता हूँ फिर अपनी पसंदीदा राहों पर
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आंखे भीग जाती है
आंखे भीग जाती है
जब मैं तेरे बारे सोचता हूँ,
दिन का चैन खो जाता है
और
रातो की नींद उड़ जाती है
सारे सपने भूल जाता हूं
ना सोता हूं ना जागता हु
पागलो की तरह बड़बड़ाता हुआ
लोगो को नजर आता हूं
जब मैं तेरे बारे में सोचता हूं , आंखे भीग जाती है
ना काम कर पाता हूं
ना खाली बैठ पाता हूं
तेरी याद में ना जाने कहाँ खो जाता हूं
तुझको भूल ही नही पाता हूं
फिर ये बात भी गलत लगती है
कि मैं तेरे बारे सोचता हूं
तू तो मेरे खयालो से नही जाती है
हर पल हर दम तू मेरी
सांसो की धड़कनों में धड़कती
हुई सुनी जाती है
फिर कैसे कह रहा था मैं
की जब भी तू मेरी यादों में आती है
अब तो यह बात मेरी सांसो ने भी झुठलादी है
की जब तू मेरी यादों में आती है।
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जिंदगी तेरे बिना
जिंदगी तेरे बिना – एक एहसास जिंदगी के रिश्तों का असरजिंदगी कई बार अपने आप में अधूरी सी लगती है।कभी यह शांत होती है, कभी बेचैन।कभी लगता है कि सब कुछ है, और कभी ऐसा लगता है जैसे कुछ भी नहीं। असल में जिंदगी का रंग बहुत हद तक उन लोगों से जुड़ा होता है जो हमारे साथ होते हैं।जब कोई अपना पास होता है तो वही जिंदगी मुस्कुराने लगती है, और जब वह दूर चला जाता है तो वही जिंदगी भारी और उदास महसूस होने लगती है। इसी एहसास को शब्दों में कुछ इस तरह महसूस किया जा सकता है।
जिंदगी तेरे बिना कुछ ऐसी है और कुछ वैसी है जिंदगी,
और जब तू साथ है तो लगता है कि कुछ है जिंदगी।
हाल क्या बताऊँ,
कुछ हाल ऐसा है, कुछ हाल वैसा है,
बस मसक्कत से भरी है जिंदगी।
जब तू दूर जाती है तो रूठ जाती है जिंदगी,
तू पास आती है तो मुस्कुराती और खिलखिलाती भी खूब है ये जिंदगी।
गम ए छुपाए नहीं छुपता,
लगता है बेमुरम्मत सी है जिंदगी।
आंसुओं से आँखें भर जाती हैं
जब तू इन आँखों से दूर चली जाती है।
चिरागे रोशन तू कर जाती है
जब तू फिर से पास आती है।
ना जाने क्यों
जिंदगी तेरे बिना बेतहाशा बेहाल सी है जिंदगी,
लगता है कुछ फटेहाल सी है जिंदगी।
लेकिन जब तू पास होती है
तो कमाल सी है जिंदगी,
ना जाने क्या क्या करती धमाल सी है ये जिंदगी।
इसलिए तू दूर जाना मत मुझे छोड़ कर,
वरना लगेगी दुर्भर सी ये जिंदगी।
अगर तू पास है
तो हर हाल में मस्त है ये जिंदगी,
तू साथ है इसलिए जबरदस्त भी है ये जिंदगी।
कुछ हाल ऐसा है, कुछ हाल वैसा है,
जिंदगी तेरे बिना कुछ ऐसी है, कुछ वैसी है जिंदगी।
— Rohit Shabd
रिश्तों से बदलती है जिंदगी
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इतना मत चलाओ
मैं सारा दिन लोगो को चलाता हूं, तुम मुझे ही चला रहे हो , इतना मत चलाओ कुछ कम से ही तुम काम चला लो , यह हमे समझ आता है की तुम हमे ही बेवकूफ बना रहे हो , लेकिन इतना भी मत बनाओ
क्या भाई ?
ऐसा बोलते हुए सुना है क्या आपने भी ?
बहुत सारे लोग आते है ऐसे जो कहते है क्या भाई हमे ही चला रहे हो और कोई नही मिला क्या हम दुनिया को सीखा रहे है ये हमे सीखा रहा है।
यह लोग बताना चाहते है की हमसे ज्यादा धूर्त, चालाक , चतुर, ज्ञानी, बुद्धिमानी और कोई भी नही है सिर्फ हमे ही सारा ज्ञान है और हमने ही सारी दुनिया देखी है, बाकी इनके सामने लोग मूर्ख है
ज्यादातर ऐसा लोग तब कहते है जब वो पैसा बचाना चाहते है, आपसे किसी वस्तु के एवज में कुछ और भी प्राप्त करना चाहते है।
या फिर जो आपने मूल्य बताया है उसमे कमी या मोलभाव करना चाहते है, ताकि आप इन्हे वह वस्तु सस्ते दाम पर दे ओर इनका फायदा हो जाए, बस यह अपने फायदे के लिए बाते बनाते है।
ऐसे व्यक्ति वो होते है दूसरे के धंधे पर लात मारना चाहते है और बोलते है हम इससे बेहतर लेकर दे सकते है और सस्ता भी , यह वो व्यक्ति होते है जो हमेसा अपनी बढ़ाई सुन्ना पसन्द करते है
यह वो व्यक्ति हो सकते है जो खुद को ज्यादा होशियार समझते हो लेकिन इनको पता कुछ नही होता बस बाते बनाना जान गए है ।
यह वो व्यक्ति हो सकते है जो आपसे आपके धंधे की पूरी जानकारी ले लेते है। यह वो व्यक्ति हो सकते है जो बिना मतलब के बस दिमाग खोरी करते है , यह जो सुबह से शाम तक लोगो को मूर्ख बनाने के लिए घूमते है। इतना मत चलाओ।
यह उन लोगो में से हो सकते है जिनके पास कुछ काम नही होता बस कभी ताश खेलते हुए , या जुआ , या इधर उधर घूमते हुए ही नजर आते है और अपना समय व्यतीत करते है। इसलिए इतना मत चलाओ किसी को।
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मन क्या है?
मन क्या है? – मन की प्रकृति और उसकी बेचैनी
मन क्या है
मन क्या है? मन क्या चाहता है?
मन शरीर का कोई दिखाई देने वाला अंग नहीं है, बल्कि यह हमारी चेतना और विचारों का केंद्र है।
मन हमेशा हमें नए-नए कार्यों की ओर प्रेरित करता है। यह मन का स्वभाव है कि वह लगातार कुछ नया खोजने की कोशिश करता रहता है।
इसी कारण मन अक्सर पुरानी चीजों से जल्दी ऊब जाता है और नई चीजों की ओर आकर्षित होने लगता है।
मन हमेशा नया क्यों चाहता है
मन की एक विशेष प्रकृति है — नवीनता की तलाश।
इसी कारण मन बार-बार नए अनुभवों की ओर बढ़ता है।
इसकी वजह से:
हम नए काम करना चाहते हैं
नए स्थानों पर जाना चाहते हैं
नए विचारों के बारे में सोचना चाहते हैं
मन हमें कभी पूरी तरह स्थिर नहीं रहने देता। वह हमेशा किसी न किसी गतिविधि में हमें लगाए रखना चाहता है।
मन खाली क्यों महसूस होता है
कभी-कभी हम यह महसूस करते हैं कि हमारे पास सब कुछ होते हुए भी भीतर खालीपन है।
यह खालीपन कई कारणों से हो सकता है:
मन को नया अनुभव चाहिए
मन किसी उद्देश्य की तलाश में है
मन को शांति नहीं मिल रही
इस स्थिति में इंसान खुद से सवाल करने लगता है कि आखिर उसे क्या चाहिए।
हम अपने आप को खाली क्यों महसूस करते हैं
जब मन को कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिलती तो इंसान अपने भीतर खालीपन महसूस करने लगता है।
ऐसा लगता है जैसे हमारे पास करने को कुछ भी नहीं है, जबकि वास्तव में हमारे पास बहुत कुछ करने के अवसर होते हैं।
मन लगातार हमें किसी न किसी काम में उलझाए रखना चाहता है:
सोचना
घूमना
खेलना
कुछ नया सीखना
इस तरह मन हमें हमेशा सक्रिय बनाए रखने की कोशिश करता है।
मन की बेचैनी का कारण
मन की एक और खासियत है कि वह एक जगह टिकना नहीं चाहता।
शरीर कई बार आराम चाहता है, लेकिन मन नए अनुभवों की ओर भागता रहता है।
इसी कारण इंसान एक काम छोड़कर दूसरे काम की ओर बढ़ता रहता है।
कभी-कभी ऐसा भी होता है कि एक काम पूरा होने से पहले ही मन दूसरे काम की ओर आकर्षित हो जाता है।
निष्कर्ष
मन का स्वभाव ही ऐसा है कि वह लगातार कुछ नया खोजता रहता है।
अगर हम मन की इस प्रकृति को समझ लें तो हम अपने जीवन को अधिक संतुलित बना सकते हैं।
मन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन उसे सही दिशा देना जरूर संभव है।
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राज नीति
राज नीति क्या है ?
किस प्रकार की राज नीति है या होनी चाहिए ? इस पर भी कुछ चर्चा आज करते है , राज की नीति या नीति का राज दोनो मे से क्या ?
जनता पर राज ? अगर जनता पर राज तो क्यों ? जानता ने आपको चुन लिया है क्या अपने ऊपर राज करने के लिए या कोई हक दे दिया सिर्फ मत देने से , आपको हमने चुनाव जितवा दिया है इसका मतलब यह है, की आप हमारे हितों का ध्यान रखे सही नीति के साथ दिल पर राज करे अच्छी नीति के साथ इसका तातपर्य यह नही की आप राज नीति चलाये कूट नीति , विदुर नीति , शाशक नीति और अन्य अन्य प्रकार की जितनी भी नीतियां है।
देखा यह जा रहा है की देश को कई भागो में विभाजित करने की एक कोशिश जो जारी है वो किस प्रकार से है हम और आप जो बिना समझे किसी भी बात पर अपनी प्रतिकिर्या इतनी जल्दी दे देते है, यह उन सभी बातो का कारण बन सकती है, इसलिए हमे सोचना और समझना चाहिए की चल क्या रहा है, हमे अपने नजरिये को थोड़ा बदलना होगा और देखना होगा की यह सही है या गलत ? यह कौन लोग है, जो हिमारी सोच कब साथ खिलवाड़ कर रहे है ?
अगर सरकार काम कर रही है या नही कर रही है तो आलोचक कौन है ?
क्या जनता आलोचना कर रही है ?
क्या जनता किसी भी प्रकार की असहमति दर्शा रही है ? जनता क्या चाहती है ?
जनता तो शांत बैठी है फिर आलोचक कौन है ?
क्या विपक्ष ? लेकिन विपक्ष चुप क्यों है? या फिर वो लोग जिनका दाना पानी बन्द हो गया है ?
या फिर वो लोग जो जो मुफ्त का माल समझकर लूटने की कोशिश करते थे ?
या आज सीधा जनता तक सब कुछ सीधा जा रहा सारी योजनाए का लाभ जनता तक पहुच रहा है जो पहले नहीं पहुच पाता था।
आज किसको इतना दर्द हो रहा है ?
कौन बेचैन है जिसके पास काम नही है या काम है ? क्या काम उनके पास नहीं जो पहले भी कामचोर थे ओर आज भी है, काम तो पहले से ऐसा चल रहा है बस अब आपको सब कुछ दिखाना पड़ रहा है यह आपकी दिक्कत है ? दिक्कत किस बात से है या कहाँ आ रही है ?
अगर कोई दिक्कत आ रही है तो फिर जनता और सरकार के मध्य सीधा एक तालमेल बनाना चाहिए की सभी समस्याओं का हल हो सके,
यदि किसी भी प्रकार की समस्या है वो व्यक्तिगत नही है वो सामाजिक है इसलिए आज सारी समस्याओं को देखा जाता है और उचित हल किया जाता है।
जहाँ तक मेरा विचार है यह जितने भी कार्य परिवर्तन के रूप में हो रहे है वो सूझ बुझ के साथ हो रहे है, इसलिए अपनी किये गए कार्यो पर अपनी प्रतिकिर्या सोच समझकर दे आवेश और जल्दबाजी में लिया गया फैसला कभी उचित नही होता।
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प्रेम शब्द : प्रेम को कुछ लफ्जों में बयान करने वाला गहरा एहसास
प्रेम शब्द चन्द लफ्जो में बयान क्या करू ?
इस प्रेम को
मेरे सारे शब्द और मेरी उम्र बीत जाए
लेकिन प्रेम का अर्थ पूरा मेरे शब्द भी ना कर पाए
फिर भी एक नाकाम कोशिश सी है
कुछ बताने का एक नया रिश्ता बनाने का
साथ ही, ये संबंध वो है
जिसमे हर एक रिश्ता नाता समा जाता है
मत भेद दिलो मेंं जो होते है, इसलिए वे भी दूर हो जाते है ,
और इसी तरह,असीम आसमान भी धरती की औढनी नजर आता है।
जब कभी सतरंगी होता है आसमान
तब यही आसमान एक छोर से
बाहे फैलाये दूसरे छोर को जाता है
और तब देखो, क्या मधुर संबंध बनता है।
धरती और आसमान का दिख जाता है
जो धरती और आसमान को एक सूत्र में
बांधे हुए है ही हमे नजर आता है
बस यही प्रेम है
जो पूरे ब्रह्मांड को एक शब्द में बांधे नजर आता है
इसलिए जो ना शब्दो से बयान हो पाता है
ना मौन से
यह प्रेम तो शब्द और मौन दोनो के पार ले जाता है।
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चल उठ और दौड़
चल उठ खड़ा हो जा
दुनिया भाग रही है
तू भी चल उठ खड़ा हो जा
दुनिया दौड़ रही है
तू भी उठ खड़ा हो जा
सोने दो यार मुझे नही खड़ा होना
नही खड़ा तू हो जा ….
अच्छा
चल ठीक है तू
रहने दे यार
मेरे ख्याल से तो तू सोजा
चल छोड़ तू यार सो ही जा

तू क्या करेगा भागकर
तू करेगा क्या जागकर
तू चद्दर तान और बस सोजा
तेरा अब काम नही है
तुझमे अब वो दमखम भी नही
तू तो नाकाम ही सही
तू हिम्मत हार चुका है
तू परिश्रम कर थक चुका है
खुद को नाकाम समझ तू रो चुका है
खुद को हारा मान चुका है
इसलिए
तू तो सोजा चद्दर तान और बस सो जा
ना भागेगा ना हिम्मत बढ़ाएगा
सिर्फ तू भीड़ बढ़ाएगा
भीड़ में उत्साह घटाएगा
जा तू सोजा चद्दर तान और सो जा
चल सोजा
नही रुको मैं उठता हूं
मैं आता हूं
मैं चलता हूं ,
सुनो मैं परिश्रम कर थका नही हूं ,
मैं नाकाम सही लेकिन
हिम्मत मैं हारा नही हूं
मैं भागूंगा नही लेकिन उत्साह बढ़ाऊंगा ,
मैं भीड़ का हिस्सा सही
लेकिन भीड़ का उत्साह बढ़ाऊंगा
ना रुकूँगा ना रुकने दूंगा ,
न थकूंगा ना थकने दूंगा
ना सोऊंगा ना सोने दूंगा
मैं सबसे आगे बढ़कर
ही अब दम लूंगा
यह भी पढे: छोटी कविता, लगन की चमक, लक्ष्य , समय का अंधेरा,
रुकना तेरा काम नहीं
रुकना तेरा काम नहीं, चलते हुए सफर में
तू रुक ना जाना
थक कर हार ना जाना
बस चलते ही तू जाना
हिम्मत की हार होते हुए बहुतो की देखी
तू भी उनकी तरह टूट ना जाना
आगे देख बढ़ते जाना पीछे
जो मुड़कर देखते है वो रुकते है
इसलिए सफर को मुड़कर ना
देखना बस आगे तू बढ़ना
उचाऊ से मत डरना
नीचाई को अकड़ मत दिखाना
ऊँचाई को पकड़ लेना लेकिन
गहराई को भूल ना जाना
आराम से चलना
हर कदम संभाल कर चलना
कभी डगमगाना तो रुक जाना
लेकिन मुड़ कर वापस तू ना आना
बाहँ पकड़ खुदकी तू चलना
रुकना तेरा काम नहीं ,बाहे तेरी पकड़ने कोई ना आएगा साथ तेरे
रास्ता ना कोई दिखायेगा तुझे
उल्टा नीचे जो साथ है वो गिरायेगा तुझे
भरोसा चाहकर भी नही तू कर
खुद संभल उठ खड़ा हो
तभी इस जहांन को नजर आएगा
वरना ना जाने कहाँ गुम तू हो जाएगा
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ये काका बाबू
आज कुछ बताता हूं की ये कौन है
लोग जो कहलाते है ये काका बाबू
इनकी वजह से ही चल रहा है
कारोबार अखबारों का
इसलिए यह वो है जो कर रहे काम सलाहकारों का ( काका बाबू )
हर बात की होती है खबर
रखते है सारी जानकारी और इसलिए होती इनके पास अपडेट खबर
इनकी जानकारी होती है सबसे ऊपर
इसलिए कहलाते है यह काका बाबू
कौन है काका बाबू और कहाँ से मिलती इतनी अपडेट इनको
क्या करते है काका बाबू
कहाँ से आते है यह काका बाबू
हर बात में टांग अड़ाते है काका बाबू
और अलग अलग सलाह देते हुए नजर आते है
पता कुछ भी नही होता,
लेकिन अपनी टांग हर बात में वो अड़ाते है
कभी हिन्दू तो कभी मुस्लिम मुद्दा वो उठाते है
जिनको पता कुछ नही, इसलिए
घंटो लेक्चर देते हुए नजर वो आते है
कभी मोदी को चोर
तो कभी राहुल को पप्पू वो बनाते है और कभी राम मंदिर तोडते है
तो कभी बाबरी मस्जिद का मुद्दा भी वो उठाते है।
कभी गली में चिल्लाते है तो
फिर कभी रोड़ पर बैठ जाते है
अपने घर की कलह सुलझा नहीं पाते
दुसरो को सलाह देते हुए ये नजर आते है।
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