हर साल बेहतर बनने की इच्छा, इसलिए नतीजा वही होता है लेकिन इस साल खुद को बेहतर बनाए और अपने पुराने विचारों को तोड़ आगे निकल चले हम।
हर साल मैं खुद से एक ही बात कहता हूं कि इस साल खुद को बेहतर बनाए।
2025 में भी यही सोचा था और अब 2026 के बारे में भी यही सोच रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह एहसास गहरा हो गया है कि सिर्फ सोचने से कुछ नहीं बदलता।
सबको यह बताना जरूरी नहीं होता कि जिंदगी क्या है। असल जरूरत यह होती है कि इंसान खुद समझ पाए कि उसकी अपनी जिंदगी उससे क्या चाहती है। यही समझ हर साल मुझे थोड़ी देर के लिए मिलती है, लेकिन फिर कहीं खो जाती है।
हर साल योजना बनती है, लेकिन पूरी नहीं होती
हर साल बहुत सारे प्लान बनते हैं।
बहुत सारे टारगेट सेट होते हैं जो बहुत सारे अधूरे रह जाते है
करियर, पर्सनल लाइफ, फाइनेंशियल ग्रोथ और हेल्थ —
सब पर ध्यान देने की इच्छा होती है, लेकिन हकीकत यह है कि कुछ चीजों पर थोड़ा-सा फोकस हो पाता है और कुछ पूरी तरह छूट जाती हैं।
साल की शुरुआत में उत्साह रहता है।
कुछ हफ्तों तक फोकस भी अच्छा होता है।
फिर धीरे-धीरे वही पुरानी आदतें लौट आती हैं और साल खत्म हो जाता है।
अधूरे लक्ष्य और बार-बार लौटती उलझन
हर नए साल में पिछले साल के अधूरे लक्ष्य भी साथ ले आता हूं।
सोचता हूं कि इस बार सब संभाल लूंगा।
लेकिन ऐसा होता नहीं है।
कभी पुरानी उलझनों में फंस जाता हूं,
कभी बिना वजह डिस्ट्रैक्ट हो जाता हूं।
2025 अब खत्म हो रहा है और 2026 सामने है।
जिंदगी थोड़ी आगे बढ़ती हुई दिखती है, लेकिन जिस तरह मैं चाहता हूं, हर बार वैसा नहीं हो पाता। इसलिए हर साल सपने अधूरे से लगते हैं।
खुद को समय न दे पाने की सच्चाई
मैं बाहर के कामों के लिए समय निकाल लेता हूं।
दूसरों की जरूरतों के लिए भी।
लेकिन जब बात खुद की आती है, तो खुद को समय देना टल जाता है।
लक्ष्य पर ध्यान अर्जुन की तरह केंद्रित नहीं रह पाता।
कभी परेशानियां, कभी विचारों की उलझन रास्ता बदल देती हैं।
कई बार ऐसे काम कर बैठता हूं जो मैं करना नहीं चाहता था, और जिन कामों को करना चाहता था, उन्हें टाल देता हूं।
इच्छाओं को दबाते रहने की आदत
धीरे-धीरे इच्छाओं को दबाने की आदत बन जाती है।
खुद से समझौते करने लगते हैं।
हर साल यही होता है।
लेकिन अब यह साफ हो गया है कि अगर यही चलता रहा, तो हर नया साल सिर्फ तारीख बदलेगा, जिंदगी नहीं।
इस बार सोच नहीं, सिस्टम बनाना है
इस बार फैसला किया है कि 2026 का इंतजार नहीं करूंगा।
क्योंकि अगर पहले दिन बैठकर सोचूंगा, तो शायद फिर वही होगा।
अब हर दिन को नया साल मानकर चलना है।
इस बार सिर्फ लक्ष्य नहीं बनाने हैं, बल्कि उन्हें पूरा करने के लिए सिस्टम बनाना है।
वीकली प्लान होगा
जनवरी से दिसंबर तक स्पष्ट लक्ष्य तय होंगे
हर दिन खुद को ट्रैक किया जाएगा
नई आदतों को धीरे-धीरे जीवन में जोड़ा जाएगा
खुद को बेहतर कैसे बनाएं: एक व्यवहारिक नजरिया
खुद को बेहतर कैसे बनाएं, इसका जवाब किसी मोटिवेशनल वीडियो में नहीं है।
यह जवाब रोज़ के छोटे फैसलों में छिपा होता है।
आज मैंने खुद को कितना समय दिया?
लेकिन आज मैंने क्या सीखा?
और आज मैंने क्या टाल दिया?
क्या आज मैंने खुद से ईमानदारी रखी या नहीं?
अगर इन सवालों के जवाब लिखित रूप में ट्रैक होने लगें, तो बदलाव दिखने लगता है।
स्क्रीन टाइम और सीखने की दिशा
स्क्रीन टाइम रहेगा, यह सच्चाई है।
लेकिन अब फर्क यह होगा कि स्क्रीन पर क्या देख रहा हूं।
सीखने के लिए स्क्रीन,
बेहतर बनने के लिए स्क्रीन।
लगातार नई चीजें सीखना अब विकल्प नहीं, जरूरत बन चुका है।
2026 से पहले एक ईमानदार प्रयास इस साल खुद को बेहतर बनाए
यह ब्लॉग कोई दावा नहीं है।
यह सिर्फ एक साफ स्वीकार है।
कि मैं थक गया हूं हर साल खुद से हारने से।
इस बार जीत जरूरी नहीं है, लेकिन कोशिश ईमानदार होनी चाहिए।
क्योंकि खुद को बेहतर कैसे बनाएं, इसका रास्ता भागने से नहीं,
खुद का सामना करने से निकलता है।
यह भी पढे: नए साल की तैयारी, हर रोज बेहतर होना है, विचारों से बदले जिंदगी