औरत ना होती तो क्या सच में जिंदगी पूरी हो पाती| औरत के बिना जिंदगी अधूरी

औरत ना होती तो जिंदगी अधूरी होती, क्योंकि जिंदगी की हर गहराई में तुम्हारा ही अस्तित्व बसता है; क्या जिंदगी पूरी होती अगर तुम ना होती— शायद दिन गुजर जाते, पर एहसास ठहर जाता, माँ बनकर तुमने जन्म को अर्थ दिया, बहन बनकर विश्वास, पत्नी बनकर साथ और बेटी बनकर उम्मीद दी; तुम्हारे बिना घर दीवारों का ढाँचा होता, रिश्ते नाम भर रह जाते और भावनाएँ मौन हो जातीं, तुम्हारी कोमलता ने ही जिंदगी को इंसान बनाया, संघर्षों के बीच भी मुस्कुराने की ताकत दी, इसलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि तुम्हारे बिना जिंदगी चल तो सकती थी, पर पूरी कभी नहीं हो सकती थी।

औरत ना होती तो जिंदगी अधूरी होती
क्या जिंदगी पूरी होती अगर तुम ना होती ?

जिंदगी के हर हिस्से में तुम हो
इसलिए मेरी कहानी और किस्से में तुम हो

हर जीत में तुम हो
और हर हार में भी तुम हो

सुबह भी तुम और शाम भी तुम हो
ख़ुशी भी तुम हो तो गम भी तुम ही हो
धुप भी तुम छाव भी तुम ही से है

मिठास भी तुम हो खटास भी तुम हो
और कभी कभी बेस्वाद भी तुम हो
इसलिए जीवन के हर स्वाद में तुम हो

माँ बहन पत्नी और बेटी भी तुम ही हो
जीवन के हर रूप और स्वरुप में तुम हो।

मुझे बनाने वाली भी तुम हो
और मुझे बिगाड़ने वाली भी तुम ही हो

मुझे ऊँचाई पर पहुचाने वाली भी तुम
और उस ऊँचाई से नीचे गिराने वाली भी तुम हो

तुम से ही पैदा होती मेरी हर इच्छा है
तुम नहीं हो तो शायद जीवन ना ही हो
यह इच्छा है।

औरत ना होती तो जिंदगी कैसी होती, औरत ही है जो जिंदगी को पूरा करती है बिन औरत इस जीवन की कल्पना भी क्या

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