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मुस्कुराने का जादू

यह मुस्कुराने का जादू है , जहाँ शब्द न करे काम मुस्कुराहट काम कर जाती……
बात पते की मुस्कुराहट की नही कोई जाति प्रजाति ।
यह तो प्रकृति का वरदान बात यह सब को समझ हे आती ।

मुस्कुराहट में प्यारी सी आहट…
काम को बनाने की इसमें चाहत ।
मुस्कुराहट का प्रभाव…..
कहलाता अच्छे व्यवहार का स्वभाव ।
मुस्कुरा कर जब करते काम….
उसमें झलकता शांत मन का आयाम ।

मुस्कुराहट से हो जाता हर असमभाव वाला संभव काम , मुस्कुराहट करती हर दुख को दूर शांति का प्रस्ताव लाती हर दिल में उम्मीद में जगाती , यही मुस्कुराने का जादू है, जो मुस्कुराहट खुशिया बिखेरती जाती।

Jivan kya hai

Main dekhta hu zindagi ke baare mei koi baat nahi kar raha bas sabhi log koi kuch or ki baate kar rahe hai………jivan kya hai

Unke pass bahut kuch hai baate karne ko lekin zindagi ke baare mei kuch nahi hai.

Zindagi ke baare mei kuch baat to karo ki yeh zindagi kaisi hai? kyuki yeh zindagi na milegi dubara isliye isko jio yahi abhi khulkar na hee tum mar jana yu hi ghut ghut kar.

Ye sabhi log kapde, jutey, khana, pina, ghumna, hangout karna chahte hai lekin jindagi ko bhulkar, bas jindagi ke baare mei kuch nahi soch rahe jo sabse jaruri hai usko hee bhule hue baithe hai…..

lekin kyuuuuu

kya hame jindagi ke baare mei baat nahi karni chahiye? zindagi jise aap ji rahe ho ya nahi, ye bhi aapko nahi pta bas bhaage ja rahe ho kahi na kahi, kidhar jana hai, safar kya hai? nahi maalum lekin chal rahe bina saas liye..

yahi hai jivan ?

Yeh swaal aap khud se puchiye ki zindagi kya hai or hame kidhar lekar ja rahi hai jindagi ka asli matlab kya hai, jindagi jidhar ja rahi hai ham chup chaap chale ja rahe hai bin soche samjhe, bina kuch jaane bas behte paani ki tarah khud ka koi decision nahi hai.

Kya yahi hai jivan ?

Yeh sirf swal na ho yeh aapko bechain karde bas is tarah se aapke dimaag mei bhar jaye tabhi ham is uttar ko jaan payenge.

Zindagi ka asli matlab janne ki koshish mei ham lag jaye

Is jivan ka purpose kya hai? ham yaha kyu aaye hai kya aesa koi swal mann mei aaya hai kabhi jisne tumhe thodi si bechaini di ho, tumahara mann is jindagi ke baare mei janne ki koshish kar rahe ho, kya hua kabhi aesa yadi uttar nahi hai to aesa hona chahiye tumhare mann bheetar se prshnn hee prshnn ho jaye or tum daud pado ki zindagi mai aa raha hu tujhse Rubru hone ke liye, apni baaho ko faila zindagi se milne ke liye tum utho, daud pado abhi tak tum nirjiv vastu smaan the yadi tumhare mann bheetar yeh prashn nahi utha tha , to ab daud jaao jab jaago tabhi sawera bas shuruaat yahi se abhi se karo bhar jivan ko apni baaho mei.

बेस्ट बुक कौनसी है

मैं आपके लिए धीरे धीरे कौनसी किताब अच्छी है, ओर कौनसी नहीं यह आपको बताऊँगा यदि आप 10 वी व 12 वी कक्षा के छात्र है तो आपको अभी से अच्छे से तैयारी करनी चाहिए।

सबसे पहले तो आपको अपनी एनसीईआरटी की किताब को पूरी तरह से पढ़ लेना चाहिए सबसे बेहतर ओर सटीक जानकारी आपकी एनसीईआरटी की किताब में होती है।

लेकिन अकाउंट में आपको एनसीईआरटी की किताब कोई जरूरत नहीं पड़ती यह बहुत अपडेट किताब नहीं आई है, यदि आती भी तो बाजार में इसकी उपलब्धता बहुत ही ना के बराबर है तो अकाउंट के विषय के लिए आप एनसीईआरटी की किताब पर इतना जोर ना दे।

यह बहुत आसानी से आपके आस उपलब्ध होती है, या तो अपने स्कूल से ले लेते है या फिर नजदीकी बुक शॉप से इन किताबों पर डिस्काउंट नहीं मिलता इसलिए डिस्काउंट की उम्मीद भी ना करे, हाँ यदि आप किसी पब्लिशर की किताब खरीद रहे तो उसमे आपको डिस्काउंट जरूर मिलता है।

इसके बाद आप किस विषय की पुस्तक पढ़ रहे है, उसके हिसाब से आप उसकी अध्ययन सामग्री ले जैसे की आप 12 वी कक्षा के लिए अकाउंट की किताब खरीदना चाहते तो कौनसा writer अच्छा किसके प्रश्न सबसे बेहतर है, लेखक सभी अच्छे होते है बस आपको काउंसे तरीके से समझ आने लग जाता है यह निर्भर करता है इसलिए जो आपको समझ आता है वह बेहतर है।

सिर्फ 2 ही किताबे आज के समय में ज्यादा चलती है दिल्ली में T S Grewal ओर दिल्ली के बाहर D k Goyal कुछ दिल्ली के विधायलों में भी Dk Goyal परंतु ज्यादातर T S Grewal ही है।

दोनों ही बहुत बेहतरीन किताबे है लेकिन DK Goyal के प्रश्न कई बार हल नहीं होते है, इसलिए यदि आप दोनों कहरिडे तो बेहतर है ओर फिर D K Goyal का साल के अंत में एक सैम्पल पेपर भी आता है वह भी जरूर ले।

आप इस तरह से भी कर सकते है की DK Goyal की पुरानी किताब खरीद ले ओर T S Grewal की नई किताब यदि आपके स्कूल में T S Grewal लगाई गई है ओर यदि डक गोयल लगाई है तो DK Goyal को नई खरीदे व T S Grewal को पुरानी आपकी बेहतर तैयारी के लिए ये दोनों किताबे काम आएगी।

अंत में यदि आप अकाउंट के विषय की कोई कोचिंग खोज रहे है तो ओर यदि आप करोल क्षेत्र के नजदीक है, तो आपको Aaka academy का लिंक दे रहा हूँ जहां से आप अकाउंट पढ़ सकते है अत्याधिक जानकारी के लिए इनको संपर्क कर सकते है

https://goo.gl/maps/WhuwGdJNnBGjUdfh8

साथ साथ मैं आपके लिए कुछ पुस्तक विक्रेता के नाम की सूची लिख रहा हूँ,

Arya Book Depot in karol bagh

Janta book depot in gole market

Prakash Brother in gole market

karan book house in pahar ganj

Madaan Brother in daryaganj

यहाँ से आपको ज्यादातर किताबे आसानी से मिल जाएगी

यदि आपके मन में कोई प्रश्न है तो कमेन्ट कर सकते है, ओर यदि किसी ओर किताब के बारे जानकारी चाहिए तो वह पूछ सकते है।

धन्यवाद

Bloody Daddy

Bloody daddy यह फिल्म का नाम है जो इसी हफ्ते जिओ सिनेमा पर वर्ल्ड वाइड रिलीज हुई है, इस फिल्म में मुख्य पात्र शाहिद कपूर है इस फिल्म में शाहिद कपूर की ऐक्टिंग एकदम दमदार है पूरी फिल्म में सिर्फ शाहिद को देखने का मन करता रहेगा उनका किरदार बेहद उम्दा है, फिल्म में संजय कपूर, रॉनित रॉय, डायना पेन्टी ओर राजीव खंडेलवाल भी है।

Bloody Daddy फिल्म की कहानी 50 करोड़ के कोकैन पर घूमती है जो शाहिद कपूर जब्त कर लेते है उसके बदले में रॉनित रॉय उनका बेटा किड्नैप कर लेता है बस इसी के बीच में कहानी घूमती है लेकिन कहानी से ज्यादा मजेदार शाहिद कपूर की ऐक्टिंग है जिसके लिए फिल्म से आँख नहीं हटती कहानी में कुछ नया नहीं सब प्रीडिक्ट किया जा सकता है लेकिन फिल्म में एक्शन सीन बहुत बढ़िया है।

इस फिल्म में रॉनित कपूर ओर राजीव खण्डेलवाल का सही तरीके से प्रयोग नहीं किया गया नहीं तो फिल्म ओर भी शानदार हो सकती हो थी।

एक तरफ तो Fathers Day आ रहा है लोगों की भवनाए सकारात्मक है दुसर ओर ये बॉलीवुड की फिल्म वाले इस प्रकार के नाम रखते यही फिल्मों के आप खुद ही सोचिए इस प्रकार के नाम अच्छे है ?

कितना भद्दा नाम है इस नाम से हटकर भी कई ओर नाम रखे जा सकते थे इस फिल्म के लिए, कही न कही कुछ न कुछ इस बॉलीवुड इंडस्ट्री के लिए अब आपत्ति उठ ही रही है क्युकी अब यह समझ नहीं आता की यह क्या सोचकर फिल्मों के नाम का चुनाव , कहानी का चुनाव करते है जिससे जनता कही न आहात हो ही जाती है।

एक सलाह इस फिल्म को परिवार के संग न देखिए क्युकी बीच में गालियों का प्रयोग ओर उपयोग दोनों किया गया है जो बिल्कुल भी सही नहीं है, हम ऐसी चीज़े कन्सूम कर रहे है जो हमारे लिए कोई फायदे की नहीं है, साथ फिल्म का नाम भी इतना भद्दा क्यू रखा गया यह भी एक सोचने लायक बात है वैसे तो ओर शाहिद कपूर उस तरह के बाप बिल्कुल नहीं है।

आप भी देखिए ओर भरपूर आनंद लीजिए

फिल्म को 3 ***

जल्दी किस बात की

जल्दी किस बात की ना जाने लोगो में किस बात की जल्दी है आजकल हम सभी क्यों इतना भाग रहे है और हम लोगों पहुचना कहाँ है? यह बात मुझे समझ नही आती है लोग सिर्फ घर और आफिस या दुकान इसके अलावा कही और भी लोग जा रहे है क्या? यदि जा रहे है तो ऐसा किधर जा रहे है की उन्हे बहुत जल्दी है उधर पहुचने की , की वह लोग अपनी गाड़ियों की स्पीड को एक रफ्तार में तेज करते है, कितनी ही रेड लाइट तोड़ देते है, एक दूसरे की गाड़ी से आगे करते रहते है।

जो लोग गाड़िया चला रहे है यह उन सभी के लिए बात है पिछले कुछ दिनों में 2-3 घटनाये देख चुका हूं अपनी आंखों के सामने ही लेकिन क्या उससे कुछ सीखा किसीने मुझे नही लगता क्योंकि बाइक और कार वाला भिड़ने के बाद लड़ रहे थे कि गलती तेरी है बल्कि गलती दोनों की थी क्योंकि रेड लाइट दोनों के लिए हो रही थी इतनी तेजी से बाइक वाला लेकर जा रहा था ना जाने उसे ऐसा कहा जाना था? समझ नही आया मुझे घर या आफिस पहुचना है तो जल्दी निकलो आराम से चलो और पहुँचो क्यों रोड पर पहुँचने के बाद सभी लोगो की मानसिकता बदल जाती है। क्या कोई जंग लड़नी होती है रोड पर या कोई अवार्ड मिलेगा आपको ? घर या ऑफिस पहुचने पर


क्या सामने वाला यह समझ बैठेगा की आपको गाड़ी नही चलानी आती ? जल्दी किस बात की है

या आपकी गाड़ी खटारा है ? किसी के सोचने और समझने से आपकी जिंदगी पर कोई बदलाव नही आने वाला , यदि कोई बदलाव आएगा तो सिर्फ आपकी सोच से आप बदल सकते है तो सिर्फ खुद को कोई और किसीको नही, इसलिए अपनी सुने अपनी गाड़ी को अपने नियंत्रण में रखे सामने वाले के विचारों से आप प्रभावित न हो। अपनी गाड़ी को एक सुनिश्चित गति के साथ चलाए तथा दूसरी गाड़ी के साथ उचित दूरी को बनाए रखे, यह अक्सर देखा जाता है की सभी लोग गाड़ियों को बहुत चिपकाकर चलाते है।

बहुत सारी औरते,लडकिया भी स्कूटर , कार चलाती है उन्हें भी बहुत जल्दी है मुझे लगता था औरत आदमी को सभ्य बनाती है लेकिन ये भी एक गलत सोच साबित हो रही है उल्टा वही गलत सिखाती है कि रेड लाइट पार करलो कोई नही देख रहा। उलटी साइड से निकाल लो व आदि आदि बाते जब वह औरत अपने बच्चों के साथ होती है तब भी उन्हे यही बोलती है की उधर से निकाल ले इसका क्या मतलब भाई , क्या आप अपने परिवार के सदस्य को ही कुछ नहीं सिखाना चाहते हो?

अरे कोई नही देख रहा मतलब आप चोरी भी करलोगे क्या ? गलत काम करोगे तो भुगतना आपको ही पड़ेगा, इसलिए सोचो और समझो फिर गलतिया करनी है तो करो हर्जाना तो आपको ही अदा करना है। लेकिन आपकी वजह से दूसरों को नुकसान ना हो यह भी आप ध्यान रखे।


जिंदगी आसान सी है लेकिन हम गलतिया इतनी कर देते है कि जिंदगी उलझती ही चलती है फिर बैठ कर ये भी नही सोचते कि हमारी गलती क्या थी ? उसका मनन और चिंतन भी नही करते बस जिंदगी को उलझाते ही चले जाते है।

आपका जीवन बहुमूल्य है और आप अपने परिवार के लिए बेसकीमती है इसलिए अपना ख्याल रखे।

जल्दी किस बात की है?

Safe And Slow Drive is Better

मैं पुरुष हूँ

मैं पुरुष हूँ, पुरुष जिसे जल्दी समझदार बनना है और पारिवारिक जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाना है , चाहे उसे जिम्मेदारी समझे या जिम्मेदारियों का बोझ लेकिन उठाना पुरुष को ही है, शादी करनी है, ताकि माँ बाप की इच्छाये पूरी हो, लेकिन खुद की इच्छा का दम घोट दो, तुम अकेले रहना चाहते हो लेकिन समाज आपको बंधनो में बाँधना चाहता है, वो चाहता है की हम उनके अनुसार चले, जो समाज चाहता है वही हम करे।

क्योंकि आप  पुरुष हो आपको बहुत सारी जिम्मेदारियां उठानी है , परिवार की खुशी के लिए अपनी खुशियो का गला घोट देना है, आप क्या बनना चाहते हो ओर क्या होना चाहते हो ये बाद में है पहले आपके परिवार की इच्छा महत्व रखती है। वो आपसे क्या चाहते है।

आपको एक अनुशासित पुरुष होना है आपको अपने माता पिता , भाई बहन , बीवी बच्चों सबके लिए ideal बनना है।

क्योंकि आप पुरुष हो,

एक दिल जो टूटा भी है ओर जुड़ भी गया है, रहने की चाहत अकेले की है फिर भी कही खालीपन सा भी महसूस होता है लेकिन ये सिर्फ कभी कभी होता है जो कभी कभी वाला रिक्त स्थान है वो भर लेना चाहता हूं।

एक डर है जो बयान नही कर पाता हूं, खुल कर रो नही पाता क्योंकि मैं एक आदमी हूं, सिर्फ इसलिए मैं अपने आसुओ को भीतर ही रोक नजर आता हूँ, कुछ चाहकर भी नहीं किसी को इस दिल का हाल नहीं बता पाता हूँ, बताना चाहू भी अगर तो लोग क्या कहेंगे तू एक पुरुष है ओर पुरुष होते हुए रोता है, शायद इसलिए भीतर ही सब दुख दर्द रोक रह जाता हूँ मन का हाल किसी को नहीं बताता हूँ इसलिए भी मैं पुरुष, कहलाता हूँ।

कितना ही भीतर मचा रहे कोहराम लेकिन उसको बाहर नहीं छलकाता हूँ अपने भीतर ही अपनी भावनाओ को मैं छिपाता हूँ।

क्योंकि मैं एक पुरुष हूं।

यह भी पढे: टूटा फूटा, कौन है ये लोग?, झूठी मोहब्बत, यह खाली हाथ,

दुकानदार का जीवन

एक दुकानदार का जीवन कैसा होता है?

वह दुकानदार सारा दिन काम में व्यस्त होता भी है हालांकि नही भी होता है बहुत बार कुछ- कुछ काम कभी कभी तो उसी को दुकानदार कहते है।

काम हो तो बहुत है वरना खाली बैठा बस ग्राहक के आने का इंतज़ार करता है, वह दुकानदार

एक दुकानदार यदि उसके पास काम नही है तो इधर उधर आसपास की दुकानों पर बाते करके अपना समय व्यतीत करता है।

काम कुछ भी नही है लेकिन फिर भी व्यस्त है एक दुकानदार क्यों? क्योंकि वह पूरा दिन उस एक जगह बैठा हुआ है जहाँ से उठकर वो कही नही जा पाता बस उसे वही बैठना है ओर अपना समय अपनी दुकान के लिए ही देना है। क्योंकि लोग कहते है।
‘”ग्राहक ओर मौत का कोई पता नही कब आ जाए”

दुकानदार का जीवन उस चार दिवारी की तरह ही होता है बस वह अपने समान का पता करता रहता है की क्या खतना हुआ क्या नही , क्या लाना है ओर क्या नही पूरा जीवन उस दुकान में समान के खतम होने ओर भरने के चक्कर में खुद को कहाँ खो देता है इस बात का उसको होश नही होता।

एक दुकानदार हमेसा 99 के फेर में लगा रहता है यदि वो खाली भी है तो बस वो व्यस्त है क्योंकि वो कही आ ओर जा नही सकता बस उसे दुकान पर बैठना है चाहे काम हो या नही।

पूरा दिन बैठे हुए वो अखबार के हर के पन्ने को पूरी तरह से निचोड़ देता है।

लोग कहते है अपना काम बहुत बढ़िया होता है जब चाहा छुट्टी कर ली जब मन किया चले गए परंतु ऐसा नही है एक दुकानदार नौकरी वाले व्यक्ति से ज्यादा काम करता है ओर पूरे साल भर यदि देखा जाए तो छुट्टी तो बहुत दूर की बात है। वो बीमार होने पर भी दुकान जाता है क्योंकि उसका घर पर मन ही नही लगता।

दुकान पर आने जाने वाले दुकानदार को कहानी अपनी बीती कहानी सुनाते रहते है।

एक दुकानदार पर जितनी कहानियां होती है उतनी शायद किसी के पास भी नही होती होगी क्योंकि वह पूरे दिन कोई न कोई एक नई कहानी सुन लेता है।

एक दुकानदार की जितनी बहने बनती है उतनी बहने तो शायद किसी की भी नही बन सकती जो आता है वो भैया जी कहकर ही बुलाता है चाहे वो छोटी लड़की है या आंटी , या बुजुर्ग वो भी भैया ही कहकर बुलाते है।

इसी से संबंधित ओर भी ब्लॉग कृपया उन्हे भी पढे अपने बिजनस को कैसे ज्यादा बढ़ाए ।

ए मुसाफिर

ए मुसाफिर
वजह बेवजह तू मुस्कुराता चल
वजह बेवजह तू मुसकुराता चल
बेखबर राहो पर तू आगे निकल

तुझे मिलेगी चुनौतियां
उन चुनौतियों पर कदम बढ़ाता चल
तू चल , तू चल , तू चल

ना थकना
ना रुकना
ना घबराना
ना हार मान जाना तू
बन अपना साथी तू
खुद से खुद में जाकर तू मिल

भूत , भविष्य की फिकर छोड़ दे
वर्तमान के साथ जी तू हर पल
ए मुसाफिर तू कदम बढ़त चल

हर डगर, हर मंजिल पर न तू रुक
बस अपनी मंजिल पर नजर रख कर
बढ़ता तू आगे चल , बढ़त तू आगे चल

यह भी पढे: ख्वाबों की डोर, समय का अंधेरा, कही अटक गया मैं, हम संभलेंगे भी,

बीते हुए दिन

बीते हुए दिन
जिंदगी से जिंदगी कि कुछ मुलाकातें
जो अधूरी थी, शायद पूरी भी ना हो सकी
ओर कभी शायद पूरी अब हो भी ना सके

क्युकी
वो दब गई , दफन हो गई
उन बीते हुए दिनों में, उन बीते हुए दिनों में

जिनमें मैने की थी मैंने बहुत सारी नादानी
क्या उन नादानियों को फिर से याद करूं?

ऐसा क्या ख़ास है?
उन बीते हुए दिनों में,
जो मै फिर से जाऊ उन पुरानी यादों में,
बातो में ,
क्यों गुम हो जाऊ ?
क्या है ख़ास ?
है क्या ख़ास ?
नहीं पता , मुझे नहीं पता

लेकिन फिर भी ना जाने क्यों ?
ना जाने क्यों ?
वो बीते हुए दिन बहुत याद आते है
वो बीते हुए दिन याद आते है
लेकिन क्या करे वो तो बीते हुए दिन है
कुछ किया नहीं जा सकता
याद आते है , बताओ आते है ना
वो दिन

वहीं पुराने दिन जो तुम बिताए थे
उनमें तुम्हारा बचपन भी था , लड़कपन , जवानी , झगड़ा भी था।
कभी मासूमियत थी तो कभी धोखा था
तुम्हारे चेहरे पर

लेकिन कुछ था
पता नहीं क्या था
पता नहीं क्या था

लेकिन सभी मुझे कहते है वो कुछ खास था
क्युकी वो बिता हुआ एक पल
एक दिन
महीना, महीने , साल एक उम्र का पड़ाव था
जो बीत गया , वो बीत गया

फिर वो आ ना सका
फिर वो आ ना सका
बस अब उन दिनों की यादें है
जो बीत गए है

जो बन्द हो गए है डायरी में , पन्नों में , कलम की स्याही से
जिन्हे फिर से  ठीक भी नहीं किया जा सकता
उनको फिर से जिया भी नहीं जा सकता
(उन्मे सिर्फ पुरानी याडे है दबे हुए कुछ अरमान है )
उनमें सिर्फ दबी मुस्कुराहट ,
दबे आंसू , झलकता जाम
ओर धुंधली यांदे है
जिनको फिर से याद करने की कोशिश की जा सकती है

लेकिन जीवित नहीं किया जा सकता वो दिन ,
वो बीते हुए दिन मेरे भी नहीं है ,
खोए भी नहीं है सिर्फ जिंदा लाश की तरह दफन है,
उन्हें मै फिर से याद कर रहा हूं
क्युकी वो मेरी पुरानी यादे ही तो बन रह गई।

यह भी पढे: जिंदगी की राह, कुछ यादे है, जिंदगी से जिंदगी, अक्सर तुम और मैं,

सपने क्या होते है?

सपने क्या होते है ? ओर ये सपने क्यों जरूरी है ?
जिंदगी में यदि सपने ना हो तो जिंदगी अधूरी लगती है सपनों के साथ जीने पर ही तो जिंदगी पूरी लगती है बिना सपनों के जीना भी क्या जीना इससे बेहतर है मर जाना।

सपने क्या होते है
सपने क्या होते है

सपने क्या होते है ? सपनो वो है जो कुछ लोग सोते हुए देखते है और कुछ लोग जागते हुए खुली आंखो से जो लोग नींद मै सपने देखते है वो सिर्फ उन्हें शुभ ओर अशुभ के पैमाने पर नापते है उनके लिए सपनो के अकोई महत्व नहीं होता बस नींद खुली सपना ख़तम , उस सपने का कोई अर्थ नहीं लगाते बस यदि सपना बुरा है तो बुरे सपने की तरह भूल जाते है ओर यदि अच्छा गई तो उन्हें अच्छी नींद मानकर ही खत्म समझ लेते है।

लेकिन कुछ खुली आंखो से सपनो देखते है उन्हें को असल जिंदगी में पूरा करने की चाहत रखते है उनके लिए सुबह – शाम मेहनत करते है सोचते है भागते – दौड़ते है सारा दिमाग ओर शारीरिक बल लगा देते है उनके लिए वहीं जीवन का लक्ष्य होता है वहीं सब कुछ होता है।

हर किसी के लिए सपने अलग अलग होते है किसी डॉक्टर, इंजिनियर , लॉयर, तो किसी को कुछ सपने अपनी अपनी इच्छाओं के अनुसार सोचते है और वहीं उनमें अलग अलग रंग भर लेते है जिन्हे वो सपनो का नाम देते है।

जिंदगी बहुत बड़ी है इसमें जितनी इच्छाएं डालो उतनी ही पूरी होगी और सपनो का आकार भी बढ़ता जाता है।

जिंदगी में देखे गए सभी सपने साकार नहीं होते उनके लिए बहुत परिश्रम करना पड़ता है लाखो यतन करने पर भी वो सपने पूरे हो ये ज़रूरी नहीं है लेकिन फिर उन सपनों के पीछे हम भागते रहते है जिंदगी भर सिर्फ आंखो में हसीन सपने लेकर ही जीते है हम की यह पूरा होगा , यह पूरा होगा।

मेरी जिंदगी के बहुत सारे सपने है जिन्हें मै पूरा करना करना चाहता हूं लेकिन असमर्थ सा लगता हूं फिर भी लगातार कोशिश कर रहा हूं वो सपने पूरे होंगे या नहीं मुझे नहीं पता लेकिन उन्ह सपनो में
मै रंग भरता हूं
उनके लिए लाइन खींचता हूं , बार बार सोचता हूं,
उस लाइन को ओर गाढ़ा करता हूं ताकि दिमाग से वो सपना दूर ना हो जाए।