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धीरज शब्द

धीरज शब्द का अर्थ क्या है? धीर , धीरज , सब्र, धैर्य, यह चारो शब्द इस एक Patience शब्द में बदल दिए गए है।
क्या आपको नहीं लगता?  कि हमारे शब्द कहीं खो गए है, हमारे हिंदी भाषा के शब्दों का हनन हो रहा है।

अंग्रेजी भाषी होना ठीक है, परन्तु उचित स्थान पर ही सही है जहां जरूरत हो बिना जरूरत के अंग्रेजी भाषा ठीक नहीं है, क्युकी अंग्रेज़ी में शब्दों का हनन होता है।

अब उन चारो शब्दों में कितना प्रेम है परन्तु Patience एक शब्द जिसमे ये चार शब्द आ गए क्या उसमे प्रेम दिखता है? क्या भावनाए पता चल रही है ? क्या वो शब्दों का एहसास , अनुभव मालूम पड़ रहा है, मेरे ख्याल से बिल्कुल भी नहीं, लेकिन हिन्दी भाषा में धीरज शब्द बहुत ही प्रिय लगता है, जिसका अर्थ बहुत अच्छे से निकल कर आता है।

यदि आप आजकल रामायण देख रहे है, तो उसमें हिंदी के शब्दों का इतनी सहजता से प्रयोग हो रहा है, जो मन को हर्षित कर देता है ऐसी हिंदी पिछले 20 साल में किसी और धारावाहिक में नहीं दिखी।

क्यों अंग्रेज़ी भाषा पर इतना बल दिया जा रहा है ? क्यों हिंदी में अधिक से अधिक कार्य नहीं कराए जाते?
ऐसा क्या है अंग्रेज़ी में? ठीक है हम मान भी लें अंग्रेज़ी अतिआवश्यक है, आज के समय के अनुसार परन्तु हिंदी अत्यंत आवश्यक भाषा है जो पूरी तरह से वैज्ञानिक है हर एक स्वर , उच्चारण की स्तिथि अलग स्थान से निकलती है, जो सीधे आपके शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करती है और सभ्य शालीनता प्रदान करती है।

तथा आपके भीतर जो विकार है, उन्हें बाहर निकालती है परन्तु अंग्रेज़ी भाषा आपके भीतर विकार पैदा करती है। अंग्रेज़ी भाषा में बहुत सारे ऐसे शब्द है, जो अर्थ का अनर्थ कर देते है, परन्तु हिंदी हर एक शब्द को सही अर्थ एवं ज्ञान की दृष्टि से प्रमाणित करती है।

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है, और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है, उसके पीछे कुछ कारण है , अंग्रेजी या किसी अन्य  भाषा में ये बात देखने में नहीं मिलती।

क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये।
च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये।
ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये।
त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये।
प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये।

यह सही हे कि हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं, परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है।

हमारा सीधा संबंध इस भौतिक एवम् पार भौतिक सत्ता से जोड़ता है।

रामायण और महाभारत तो आपको वैज्ञानिक दृष्टि भी प्रदान करते है जिसमें आपको सामान्य विज्ञान और एडवांस टेक्नोलॉजी भी दिखती है। हम सभी जितना हिंदी से दूर हो रहे है उतनी ही बुद्धि कुमति की ओर अग्रसर है इस बुड्ढी को सुमति की कारण है तो हमें हमारी हिंदी भाषा , संस्कृत को सुदृढ करना होगा तभी हमारे विचारो में अधिक परिवर्तन दिखेगा

क्या आपने रामायण में भविष्यवाणी सुनी? जब लक्ष्मण भरत को मार देने के बारे में सोचता है आकाशवाणी का यही संदेश आता है बिना विचारे किसी मत पर पहुंचना बाद में पछतावे का कारण हो सकता है।

यह आकाशवाणी कोई कल्पना मात्र नहीं है यह सत्य है इसी प्रकार से पहले भविष्यवाणी होती थी यही भविष्यवाणी महाभारत में भी देखने को मिलेगी।

एक द्वापर युग की कथा है और एक त्रेता युग की परन्तु कलयुग में आकाशवाणी नहीं होती सुनाई से रही है क्युकी हम सभी अपने कोर अपनी आत्मा से दूर होते जा रहे है यही कारण है हमारा जीवन व्यस्त नहीं अस्त- व्यस्त हो रहा है।

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मिट्टी का घरौंदा

मिट्टी का घरौंदा अक्सर टूट जाता है
मिट्टी का घरौंदा ही तो है, जो मै बनता हूं बार बार ,
फिर क्यों मैं ? यहाँ पर अपना
दिल और दिमाग इतना मै लगाता हूं
टूट जाता है, यह मिट्टी का घरौंदा जिसे

मैं इतनी मेहनत से बनाता हूं
एक दिन तो छोड़ जाना है सबकुछ, कुछ साथ नहीं मुझे अपने लेकर जाना है
फिर क्यों मैं?
दिल इस दुनिया से लगाता हूं, जो अक्सर टूट हुआ दिल ही नजर आता है, यह शरीर मिट्टी का घरौंदा ही है जो अक्सर टूट जाता है।

मिट्टी का घरौंदा ही तो है अक्सर टूट जाता है
मिट्टी का घरौंदा




थोड़ी बेखबरी थी

मेरी जिंदगी में
बस थोड़ी बेखबरी थी
कुछ सहमी
कुछ अकड़ी थी
एक आहट थी
दबे पाँव की सरसराहट थी
तभी मेरी एक बाह ने
दूसरी बाह पकड़ी थी जो
इस कदर जकड़ी थी मानो
लिपटी आग से एक लकड़ी थी
जिसमे मेरी जिंदगी अटकी थी
कोई एक राह सी भटकी थी

थोड़ी बेखबरी थी
मेरी जिंदगी

जरूरी नहीं

जरूरी नहीं हर सवाल का जवाब मिले , उस नही का अब कोई जवाब नही
यह जिंदगी है मेरी कोई ख्वाब नही ,सिर्फ तू ही एक ख्वाब था मेरा
लेकिन
अब तो तू मेरा एक ख्याल भी नही

उस नही का कोई जवाब नही
जिंदगी है मेरीं
एक रात में उतर जाए वो शराब नही है
मोहब्बत की है मेने कोई शबाब नही ।

मैं दौड़ आता था एक नजर भर तुझे देखने के लिए
अब तुझे नजर भर देखना भी जरूरी नही

इसलिए
अब जरा दूर रह तू मुझसे
तू ही मुक्कममल हो ख्वाब मेरा
अब वो ख्वाब भी तू नही …

उस नही का अब कोई जवाब नही

वो मुलाकाते जो अधूरी थी तेरे साथ
वो मुलाकाते भी पूरी हो अब जरूरी नही

तू शुरआत थी मेरी जरूर
लेकिन…
लेकिन उस शुरुआत का छोर
अंत तक मिले वो भी तो जरूरी नही
( अब उस शुरुआत की मुझे जरूरत नही )

मेरी मंजिल है कही और
लेकिन उस मंजिल का रास्ता भी अब तू नही

तू इस बात को
सुन , समझ , और फिर दिमाग में
बिठा ले

जवानी मेरी भी है
सिर्फ तू ही हसीन, दिलरुबानी नही

दिल लगा था तुझसे
लेकिन
तू छोड़ गयी मुझको जो एक बार
 
और फिर लौटकर आये
यह बात
भी अब कोई जरूरी नहीं
  
मांगू तुझे उस रब से और
इस बात का मैं दम भरु
अब ये बात भी जरूरी नहीं
 
मैं जब तुझे पलको पर बिठाना चाहता था
लेकिन
तू आना नही चाहती तो यह बेवजह की
जिद्द करना भी मेरी जुर्रत नही

उस नही का अब कोई जवाब नही

जरूरत तेरी भी हो
बस यह बात है सही
 
सिर्फ जरूरत मेरी हो इस
बात में कोई दम नही

माना तू ख्वाब था मेरा खूबसूरत और हसीन
लेकिन
हर ख्वाब मुक्कममल हो यह भी तो जरूरी नहीं

नही हुआ मुक्कममल ख्वाब तो भी सही
मुझे तेरे दूर होने का अब कोई गम नही ।

भूल चुका हूं मैं
रत्ती भर भी  मुझे अब तू याद नही
इसलिए
तेरा वापस आना मेरी जिंदगी में
अब वो भी मेरी जरूरत नही।

अब उस नही का कोई जवाब नही।

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जीवन एक अवसर है

जीवन एक अवसर
जीवन एक अवसर

जीवन को अवसर का मोहताज ना रहने दो, जीवन तो स्वत एक मौका है, इसे एक मौके के रूप में तुम लो , जीवन एक सुनहरा मौका दे रहा है तुम्हें यू ना इसे तुम जाने दो

जीवन एक मौका है इसको मौके की तरह देखो जन्म ओर मृत्यु के बीच में हमे बहुत सारी जो जीवन यापन कर रहे है वह एक सुनहरा मौका है इस जीवन को यू ही व्यर्थ न करे, इसे मौके के रूप में ले ओर इस जीवन लक्ष्य को पहचाने, और लक्षे की और आगे बढ़े तथा जाने की आप यहाँ क्यों आए है? क्या कारण, उद्देश्य है इस जीवन का? इस बात को खोजने में अपना जीवन लगाए।

हमे अपने जीवन जानना और समझना चाहिए तथा इस जीवन को पूर्णता से जीना चाहिए, हम अपने जीवन में बहुत सारी गलतिया करते है, कुछ जान बूझकर तो कुछ अनजाने में , हम उन संभावनाओ को छोड़ देते है जो हमे मिल रही होती है।

नींद को तोड़ो

जागरूक होना और जागरूकता क्या है ?

नींद ओर आलस को छोड़ना है , किसी भी कार्य के लिए तथा हमें अपने जीवन के लिए हमेसा तत्पर होना चाहिए  साथ ही सीखने और जानने की इच्छा रखना हर उस किर्या प्रतिकिर्या तो देखना जो हमारे जीवन के साथ घटित हो रही है जिन सभी कारणों से हमारा जीवन बदल रहा है

बिल्कुल सजग अवस्था में उसे देखना , महसूस, करना ही जीवन को ऊर्जा देता है तथा स्वयम के प्रति जागरूक करता है।

अपने अंदर जागरूकता को पैदा करो अर्थात नींद को तोड़ो विचारो को भली भांति देखना शुरू कर करो हमारा  शरीर तो आलस्य से भरा हुआ है

यह तो सोना ही चाहता है परंतु बुद्धि किर्याशील है जब हम सोते है तब भी बुद्धि कार्यरत है और अपना कार्य करती है रहती है परन्तु शरीर अचेत है वह आलस्य , प्रमाद चाहता है
कभी कुछ कार्य करना ही नहीं चाहता

हम रोज 8 घंटे की नींद ले रहे है और कुछ लोग ज्यादा तथा कम , हम सभी को रोज जीने के लिए  86400 सेकंड मिलते है हम उन्हें बिना सोचे समझे खर्च कर देते है लेकिन 86400 का हिसाब नही लगाते की हमने उन सेकण्ड्स का खर्च कहाँ और कैसे किया ?

जो लोग उन पलो का हिसाब रखते है वो बहुत आगे  निकल जाते है अपने जीवन को एक उद्देश्य के साथ जीते है और उनका समय उनके जीवन को एक उच्च स्तर देता है जिन लोगो ने समय की कीमत को पहचान लिया है वह लोग बहुत ऊंचाई को छू जाते है और जो समय की बरबादी करते है वह नीचे ही धंस जाते है

इसलिए अपने भीतर जागरूकता पैदा करना जागरूक होना है, अतिआवश्यक है विचारो के आने पर जाने को देखना ही जागरूक होना है

“नींद को तोड़ो”

जागरूकता कब और कैसे आएगी ?
जब आप अपने मस्तिष्क के विचारों को देखोगे ओर अपने शरीर के प्रति संवेदनशील बनोगे जागरूक होकर देखोगे स्वयम को अपने शरीर के दवारा किया जाने वाला कार्य को ध्यानपूर्वक देखो अपने सभी  विचारो के प्रति सचेत रहें सोच के लिए, अपने कार्य के लिए, वातावरण के लिए, अपनी स्तिथि और परिस्तिथि के लिए,  भावनाओ के लिए स्वयम के शरीर की संवेदनशीलताओं के प्रति जागरूक हो विचारके लिए, सकारात्मक ऊर्जा के लिए आप क्या कर रहे? 
क्या करना चाहते हो?

इसके प्रति जागृत हो सचेत हो, सचेत अवस्था में रहो देखो इस जीवन को और देखो जीवन के साथ होने वाली घटनाओ को वो सभी घटनाये हमारे साथ हो रही है हम कर रहे है या नही फिर भी वो घटनाये हो रही है क्योंकि हमारा जीवन विकसित होना चाहता है और हम सभी एक विकासशील प्रकिर्या का हिस्सा है जिसमे हम सभी को विकसित होने है।

हाल ए दिल बताऊं भी क्या ?

आंखे नम है ना जाने क्यो?
ना कोई गम है
ना मर्म है
फिर भी मेरी आँखें नम है
क्या समझू
इस बात को तूने जो ढाया सितम है
 
सितम समझू या कुछ और समझू?
 
क्योंकि अब तो
मुझे खुद की खबर नही
खुद ना जाने कही गुम हूं मैं
शायद थोड़ा चुप भी हूं ,
जिंदगी से बाते भी थोड़ी काम करता हूं
खुद से मिलने की कोशिश भी बहुत करता हूं
मगर
फिर वापस आ नही पाऊंगा इस बात से डरता हूं ,
कोशिश खुद को भुलाने की भी करता हूं
लेकिन भूल नही पाता हर वक़्त
अपनी बेबसी तमासा देख
मैं खुद ही नजर आता ,
धड़कने जोर जोर से धकडती है
धड़कने जोर जोर से धड़कती है
तू मेरे साथ है नही
इस बात से
मेरी धड़कने भी सुबकती है ,
क्या कहूँ??
क्या समझाऊ ??

लिखूं क्या अपनी दासता?
  बताऊ क्या अपनी हस्ती ?
जिसको चाहा था इस कदर
उसने ही जलाई मेरी दिल की बस्ती
किसके आगे हम अपने आंसू बहाय
किसको दुखडा हम अपना सुनाये
  है कोई ??
   जो हमारी स्तिथि को समझ को समझ पाए।
    मोहहब्बत कि थी कोई गुनाह नही
    जिसकी सजा मिल रही है बिना सुनवाई
  लगता है तुमसे बात करूं
  चाहे एक बार करू
   लेकिन बात तो करू
   फिर ना जाने क्यों?
    मन कहता है कि
   बात अब क्या करूँ ?
   बात अब क्या करूँ ?
जब तुम मेरा साथ छोड़ जाते थे
तो भरोसा टूट जाता था
लगता था कि तुम मेरा साथ निभा पाओगे ?
क्या तुम उम्र भर मेरे साथ रह पाओगे ?
लाखो सवाल मन को कुचल देते थे
और में गुस्से में भर जाती था ,
मै बैठ वही रो दिया कर देता था  ,
तुम आओगे वापस बस यही आस
तुम्हारे आने की वापस लगये बैठ जाता था
अब क्या?
जो  तुमने साथ अब छोड़ दिया नाता जो था वो तोड़ जो दिया
  फिर काहे ? मै तुमसे इकरार करू
   ये तो दिल है मेरा जो सिर्फ मैं अब भी तुमसे ही प्यार करु क्या फिर दुबारा ?
   और बार बार अपने प्रेम का इज़हार करू , रिश्ता नाता कुछ बचा नही
   फिर काहे मै अश्क़ नैनन मैं भरु
    ये तो दिल है मेरा जो
    अब भी सिर्फ तुमसे ही मै प्रेम करू
बड़ी बेबसी है ये लोग हँसते है
मोह्हबत की हकीकत को जानकर


उन्हें पहचान कैसे कराऊ?
उन्हें एहसास कैसे दिलाऊ?
उन्हें इस मोह्हबत का दर्द कैसे बताऊ?
क्या आज खुद ही आईना मै बन जाऊ ?
कैसे उनको इस मोह्हबत का आईना दिखाऊ?
उन्हें रूबरू कैसे कराऊ?
दोनो छोर पर उन्होंने दरवाजा जो है बन्द कर दिया।
इस तन्हाई में उन्होंने इस कदर साथ हमारा है छोड़ दिया
ना इस और आने को हम है
ना उस और को जाने को

इस तन्हाई में उन्होंने इस कदर साथ हमारा है छोड़ दिया     

जैसे पंछी बिन पंखों के पिंजरे से बाहर छोड़ दिया

इस मोह्हबत की हकीकत क्या है?
सिर्फ मै हूं जो जानता हूं
यू उनसे मोह्हबत थी बेपनाह पर
अब क्या ?
उन्होंने हमें कर दिया तबाह

कुछ तो मोह्हबत के आंसू तुम भी पी लेना

यदि मोह्हबत हो जाये खुद को तबाह कर मोह्हबत के साथ जी लेना

लगता है
कोई सुने कुछ पल मुझे भी बैठकर
फिर लगता है मैं सुनाऊ भी क्या?
हाल ए दिल बताऊ भी क्या?
हाल ए दिल क्या हुआ ये अब समझाऊ भी क्या ?
बस जो हुआ है उसको छिपाऊँ
लेकिन
 छिपाऊँ भी कहाँ?

प्यारी छत

प्यारी छत ,मामा जी की वो प्यारी छत के वो दृश्य, मनमोहक वो किस्से
कुछ पुरानी यादे और कुछ पुरानी बाते
जो बिना मोबाइल, ओर कैमरे के अब भी कैद है
हमारी आंखों में हम संजोए वो दिन

आजकल तो बच्चे कैद कर लेते है
हर उस बात को अपने मोबाइल में
लेकिन हम कुछ भी कैद नही कर पाए
उस कैमरे में

क्योंकि
वो कैमरे वाला टाइम नही था
मोबाइल नही थे बस जो कैद हुआ
वो सब हमारी आंखों में चित्रित है

हमारी यादों में अब भी सजे हुए है
  वैसे के वैसे ही अब तक रखे हुए है
 
  वो सारे चित्र
एक एक पल अब भी हमारे जहन मैं उसी तरह से है
जैसे   हमने उस पल को जीया बेहद हो ओर फिर याद करके एक बार ओर जी रहे है

  आज वो यादे है छत की
  हमारे प्यारे मामा जी की छत
  जिस पर हम घंटो खेला कूदा करते थे
  लड़ते झगड़ते ( लड़ते झगड़ते तो शायद कभी थे नही हम , बस खूब मस्ती हम किया करते थे )

और भी बहुत कुछ बचपन में
मामा जी की वो प्यारी छत
जिसको भूल मैं अब तक भी ना पाया
आज 6 साल बाद छत आकर याद ताज़ा कर लाया

वो छत जिस पर गए हुए लगभग 6 साल बीत गए है
मामा जी की वो प्यारी छत ही है जिस पर हम कल फिर से गए

जिस छत पर हम पूरा दिन बिता दिया करते थे।

छत पर जाते ही मेरे दिमाग में
छपे हुए चित्र फिर से ताज़ा हो गए

आसपास के सारे मकान आज और बड़े गए
जो खाली थे घर , वो घर भी आज भर गए थे

वो आसपास के बच्चे भी अब और बड़े हो गए थे
बात मानो कल ही की हो जब हम घंटो छत पर खेला करते थे। थक हार कर कुछ देर हम सोया करते थे भरी दोपहरी में भी बस हम छत पर ही होया हम करते थे।

वो बारिश के दिन अब भी याद है  बारिश में हम नहा लिया करते थे बारिश से चौक गिला ना हो जाए वो जाल पर मोमजामा बिछाकर  इटो से ढक दिया करते थे

( और जब बारिश के दिन हुआ करते थे तब जाली पर
मोमजामा ढक उस पर ईंट हम रखा करते थे)

वो छत बड़ी प्यारी है उस छत से जुड़ी है
हम सबकी यादे बहुत सारी है।

रात को घर की लाइट जाने पर छत पर ही हम सो जाया करते थे
ओर सुबह  सूरज में चढ़ती धूप जब तक तेज़ ना हो जाए तब तक उठ कर हम नीचे नही आया करते थे।

जब छत पर हम सोते थे हमे सोने के लिए खाट मिला करती थी अब तो वो छत के साथ साथ खाट भी कही खो गयी है

रात को जब छत पर जाते थे सोने तब लेट कर हम बस तारे गिना करते थे जितने बाल उतने तारे इस बात बोलकर बात पूरी कर दिया करते थे

हम तारे गिनते तो कभी सप्तऋषि , तो कभी कुछ और हम बस ढूंढ करते थे पूरी रात तारो में बीत जाए ऐसी कोशिश हम किया करता थे कभी कभी तो ध्रुव तारा देखने की कोशिश में पूरी रात जगा करते थे।

सुबह से लेकर शाम तक छत पर ही दिन बीत जाता था,
ना हम नीचे आते थे ओर ना ही कही घूमने हम जाते थे

मूड खराब हो जाता

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी तो मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब हो जाता है

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब हो जाता है

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब हो जाता है

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब हो जाता है

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ


दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब


हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।


सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बस समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?


इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति है वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

कुछ सवाल

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ सवाल हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना इन सवालो का
कुछ जवाब अब हम भी देने लगे है

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ बात हम भी करने लगे है
कुछ मुलाकात हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल रखना इन मुलाकातों का
इन मुलाकातों की बात अब हम भी करने लगे है

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ याद हम भी करने लगे है
कुछ दीदार हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना तुम अपना, अपनी यादों में दीदार कर तुम्हारा याद अब हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है

कुछ अश्क़ बहने लगे है
कुछ आह भी हम भरने लगे है
जरा ख्याल रखना अश्क़ों का तुम्हारी याद आने से अश्क़ अब इन्ह आंखों से बहने लगे है।
कुछ ख्याल अब हम भी करने लगे है

के अब मुलाकाते जरूरी है
सब्र है हमे लेकिन इतना
बतादो के अब सब्र के इम्तिहान
से हम भी गुजरने लगे है

कुछ सवाल हम भी करने लगे है

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