Blog

असफलता को स्वीकार

असफलता को स्वीकार करना बहुत मुश्किल है, जब आप किसी चीज के लिए जी जान से मेहनत करते हो ओर उसको पाना चाहते है, लेकिन उसको हासिल करने में आप सफल नहीं हो पाते तब आप बहुत टूट जाते है, उसके बाद आपको कोई और रास्ता भी नहीं दिखता, अब उस रास्ते से वापस आना मुश्किल हो जाता है।

मेरे साथ भी कुछ इसी तरह से हो रहा है, मैं अपनी असफलता को पचा नहीं पा रहा हूँ, और अब मैं काफी पीछे हो चुका हूँ, मेरे सभी रास्ते लगभग बंद हो चुके है। अब वो रास्ते कैसे खुलेंगे यही सोचना है, लेकिन अब सोचने का नहीं करने का वक्त है, और वो भी बहुत कम समय में क्युकी अब खर्चे के लिए पैसे चाहिए जो मेरे पास बिल्कुल भी नहीं है।

कैसे सबकुछ होगा और कैसे मैं कर पाऊँगा मुझे इसी बात की चिंता हो रही है।

क्या अब मैं नौकरी की तरफ रुख करू या कुछ और करू मुझे कुछ नहीं समझ आ रहा है, क्योंकि बिजनस करने के लिए भी मेरे पास पैसे नहीं बचे, बात सिर्फ अब बिजनस की नहीं है मेरे पास अपने घर खर्च के लिए भी पैसे नहीं बचे, मैंने अपने सारे क्रेडिट कार्ड , सैविंग, ओर जो भी कुछ भी था वो सब खत्म हो गया है। इसलिए बिजनस भी कुछ नहीं कर सकता अब सिर्फ नौकरी ही एकमात्र रास्ता दिख रहा है, लेकिन नौकरी भी मुझे कौन देगा जब मेरे पास कोई अनुभव नहीं है।

मैंने पिछले साल मई में अपनी किताबों की दुकान को छोड़ा था, की अब मैं फूल टाइम ब्लॉगिंग करूंगा, और मैंने यह फैसला लिया था की अब मैं सिर्फ लिखूँगा इसके अलावा कुछ और नहीं करूंगा, मैंने शुरुआत भी अच्छी करी ओर मैं लगातार लिख रहा था, लेकिन परिणाम मेरे अनुसार नहीं आ रहे थे, धीरे धीरे समय बीत रहा था जिसकी वजह से मुझे अपने ऊपर ही शक होने लग गया था, की मैं कोई गलती तो नहीं कर रहा हूँ, इसलिए मैं स्वयं को जाचता रहता था।

लेकिन 8 महीने बीत गए कोई प्रोग्रेस नहीं दिखी, और अब घर में कुछ परेशानी भी आने लगी जैसे की भाई को मेडिकल प्रॉब्लेम की वजह से समय और ध्यान सारा उधर ही केंद्रित हो गया, जिसके चलते अब मैं अपने कार्य पर फोकस नहीं कर पा रहा था।

यही सब सोच कर मन में घबराहट हो रही है, ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं बनी, लेकिन कुछ भी पहली बार ही होता है, जब इसमे मैं फंसा हूँ तो निकलूँगा भी बस यही एक सकारात्मक सोच मेरे मन में चलती है।

कुछ न कुछ तो कर ही लुँगा ऐसा मेरा विश्वास है, इसलिए अभी तक मैं इंतजार कर रहा था, लेकिन वो इंतजार अब खत्म हुआ कुछ किया जाए वो वक्त शुरू हो चुका है, क्या करू ओर क्या नहीं यह बात अभी तक नहीं समझ आ रही है मुझे इसलिए अब मैं बिल्कुल रुक चुका हूँ।

असफलता को स्वीकार मैं कर चुका हूँ लेकिन अब ऐसा लगता है काफी देर हो गई है, फिर से वापस मुझे उसी ओर लौटना होगा , जो मैं छोड़कर आया था ओर फिर कुछ करना होगा।

यह भी पढे: समाधान एक सूत्र, लक्ष्य की होगी प्राप्ति, एक निर्धारित समय,

फररे

फिल्म फररे इस फिल्म के नाम से ही लगता है की स्कूल या कॉलेज में चीटिंग करने के लिए फररे चलाए जा रहे है।

फिल्म की कहानी : रॉनित राय जो एक ऑर्फन चलाता है। उसमे एक स्टूडेंट बहुत ही ब्राइट होती है। एक लड़की जो ऑर्फन होती है, जो बहुत ब्राइट स्टूडेंट है, उसे एक बेस्ट स्कूल के लिए अड्मिशन मिलता है। ओर स्कूल में यह लड़की कुछ लोगों को चीटिंग करती है, उसके लिए इनको पैसे मिलते है।

फिलहाल इस फिल्म को देखकर ही नेगेटिव एनर्जी मिल रही थी इस फिल्म से, कोई किसी का इस्तेमाल करके उसको फेक देना चाहता है तो कुछ आजकल की फिल्मों में नंगापन तो बहुत आम हो गया है।

अमिर ओर गरीब की खाई कोई नहीं पूरी कर सकता , बहुत ही बेकार फिल्म है जिसमे कोई पढ़ना नहीं चाहता इस तरह की हरकते दिखाई जा रही है, क्या ही सिखाएंगे ये फिल्म वाले किसी को इस तरह की हरकते सीखा रहे।

ना ही इन लोगों को अपनी गलती पर कोई पछतावा है ओर ना ही किसी बात का एहसास की वे क्या कर रहे है, इसलिए इस प्रकार की फिल्मों को प्रेरणा स्रोत नहीं बनाना चाहिए, बल्कि ऐसी फिल्मे ही नहीं बन्नी चाहिए, जो हमारे समाज को दूसरी दिशा में ले जा रही हो।

सिर्फ पैसा ही सबकुछ है क्या? आज की दुनिया में सिर्फ पैसा ही पैसा हर कोई पैसा ही चाहता है।

पैसे के लिए लोग कितना भी गलत करवा सकते है, ओर कर सकते है, यह लोग किसी भी हद्द तक गिर सकते है, पैसा ना हो तो किस तरह की जिंदगी जीनी पड़ती है एक गरीब को, गरीब आसानी से पैसा नहीं काम सकता, ओर आमिर एक बार बनना उसके बाद वो सिर्फ ओर आमिर ही बनता है उसके बाद नीचे नहीं आता यदि उसने खुद ही कोई गलती ना की हो तो।

यह भी पढे: फादर ऑन रेंट, उलझ, ताली सीरीज,

मेट्रो स्टेशन

आपके लिए कौनसा मेट्रो स्टेशन महत्वपूर्ण है? और क्यो ? यह एक बहुत ही अच्छा सवाल है जिससे आपको पता चलता है की आप जब किसी जगह पहली बार जाते है तो आपको कितना अजीब और नया सा लगता है ओर जैसे जैसे आप उस रास्ते पर हर रोज जाने लग जाते है, तो वह रास्ता भी आपका मित्र बन जाता है, पहली बार तो आप किसी से रास्ता पूछते है लेकिन जब आप उसी रास्ते के आदि हो जाते है, तो वही रास्ता आप दूसरों को बताने ओर समझाने लग जाते है, क्युकी अब वो रास्ता आपको याद हो गया है, यही रास्ता आपका हर रोज का सफर हो गया है।

हम सभी हर रोज घर से ऑफिस , दुकान , स्कूल, कोचिंग, घूमने आदि इत्यादि अनेक कार्य के लिए घर से निकलते है, घर के पास वाला मेट्रो स्टेशन और गंतव्य स्थान उतना ही महत्वपूर्ण हो जाता है, क्युकी हर रोज हम वही से अपना सफर तय कर रहे है। हमारे कदम खुद ही उस रास्ते की ओर चलने लग जाते है।

उस रूट से हम बहुत फैमिलियर हो जाते है, यह हमारा रास्ता बन जाता है, पहली बार इस रास्ते पर जाने में हिचकिचाते है, लेकिन जब हर रोज जाने लग जाते है, तो वह रास्ता आदत में आने लग जाता है, उस रास्ते पर मिलने और जाने वाले लोग भी आम लगने लग जाते है, यदि हम किसी अंजान जगह चले जाए तो हमे पहली बार तो अजीब लगता है, लेकिन जब दूसरी बार जाए तो सब ठीक हो जाता है। फिर उसी जगह जाने में कोई दिक्कत ओर परेशानी नहीं आती, फिर घबराहट नहीं होती, फिर उस सफर के लोग अनजान नहीं होते, अब सफर की आदत हो जाती है, उस सफर को अब बहुत उत्सुकता से भी नहीं देखते और बस उस रास्ते पर चलते जाते है।

यह भी पढे: सफर रोज मेट्रो का, दो दोस्त मेट्रो में, दिल्ली मेट्रो में शराब

यू लाइक सैम्पल पेपर

यू लाइक सैम्पल पेपर एक लंबे समय से हम सबकी पहली पसंद रही है क्युकी इसमे अभी तक कोई गलती नहीं देखा गई , भाषा बहुत ही उत्तम है और बहुत ही साधारण शब्दो में समझाया गया है, जिससे की सभी को समझ में आ जाए, चाहे वो बच्चा सरकारी स्कूल में पढ़ते हो या फिर किसी प्राइवेट स्कूल में ये सभी के लिए समान काम करता है।

यू लाइक हमेशा से ही बेहतरीन प्रश्नों को छटकर लता है इसमे वो चुनिंदा प्रश्न होते है जो अधिकतर इग्ज़ैम में देखे गए है। और कई बार तो जो हम पढ़ते है वही प्रश्न इग्ज़ैम में आ जाते है जिसकी वजह से भी यू लाइक सैम्पल पेपर बच्चों की पहली पसंद बन जाता है, यू लाइक पब्लिशर इस बात का दावा नहीं करते की इसी में से प्रश्न आएंगे परंतु परीक्षा में आने वाले प्रश्न अधिकांश यू लाइक में से देखे गए है जिसकी अजह से बच्चे यू लाइक ही लेना पसंद करते है।

हर एक चैप्टर को अच्छे से समझाया गया है इसमे लघु, अति लघु , लंबे , पैराग्राफ, आदि सभी प्रकार से इसमे प्रश्न उत्तर दिए ओर साथ ही साथ एनसीईआरटी के प्रश्न और उत्तर भी इसमे दिए हुए है।

एक यू लाइक का सैम्पल पेपर किताब जैसा आता है ओर दूसरा जिसमे सिर्फ प्रैक्टिस के लिए कुछ पेपर सेट दिए जाते है जिनकी प्रैक्टिस करके छात्र को पेपर किस तरह से आता है, वो समझ में आ जाए ओर जब इग्ज़ैम हाल में छात्र पेपर देने के लिए बैठे तो उसे इस बात की समझ हो की पेपर किस तरह का ओर किस पैटर्न में आता है इस बात को सैम्पल पेपर की सहायता से अच्छी तरह से समझाया गया होता है।

साथ पिछले वर्षों में जो प्रश्न आ चुके होते है उनका भी शामिल किया जाता है क्युकी वह प्रश्न बहुत ही महतवपूर्ण होते है, जिनका पेपर में आने की संभावना होती है।

यह भी पढे: पढ़ाई क्यों जरूरी है, शिक्षा का संस्कार, छात्रों के लिए

जीवन का मिश्रण

जीवन का मिश्रण हो थोड़ा-थोड़ा कुछ कुछ रोना तो फिर हो बहुत हँसना और सब बातों के लिए जो भी मिला है, उसके प्रति धन्यवाद का सदा भाव यही रहे जीवन खूबसूरत कहानी ।

जीवन में दुख एक सच्चाई है,
लेकिन कितना लेना है
हमपर जग के मनुष्यों ने यह बात सिखाई ।

खूब खूब हँसना जीवन की सुंदरता ….
सदा बहती रहे हँसने की सरिता ।

जो भी मिला इस जीवन में उसके प्रति स्वीकार तथा धन्यवाद का भाव ….
अपना रास्ता खोजिए पहुँचिये अपनी मंजिल की ओर
मंजिल तक खो जाएँगे सारे अभाव, सदा रहेंगे हम पूर्ण भाव में

जीवन का मिश्रण ऐसा होना चाहिए की सदा सुख ओर दुख की चिंता ना हो मन में और जीवन आज में अभी ही चलता रहे, ना कल की फिक्र हो और ना बीते हुए पर कोई गम सदा रहे मौज में बस यही तराना गुनगुनाए हम।

यह भी पढे: हमारा जीवन, जीने का अंदाज, जिंदगी बस इसी तरह, सुकून की जिंदगी,

मैं लिखता हूँ

मैं लिखता हूँ, जिसके लिए मैंने एक डोमेन ले रखा है ओर उसके साथ ही मैं सर्वर का इस्तेमाल भी करता हूँ, ओर मैंने वेबसाईट भी बनवाई है, अब जब मैं लिखता हूँ तो यह मेरा शोक है, मैं पैसा कमाने के लिए भी लिखने लगा, लेकीन मुझे उस तरह से लिखने में कोई अच्छा नहीं लगा कभी लिखना ओर कभी नहीं लिखना यही सब चलता है, जब तक लिखने का मन ना करे तब तक मज़ा नहीं आता लिखने का ओर फिर जब आप लिखते हो की लोगों को पसंद आए तो फिर आप अपने लिए लिखना छोड़ देते हो, मैं अपने शोक के लिए लिखता हूँ।

मुझे लिखना अच्छा लगता है इसलिए मैं लिखता हूँ किसी को मेरा लिखा हुआ पसंद आता है या नहीं इस बात के लिए नहीं लिखता बस मन के विचार पन्नों पर उतार देता हूँ।

अपने मन की बात को बस पन्नों पर उतार देना मेरे लिए बहुत सुकून की बात है मुझे लिखने के लिए पैसे की जरूरत नहीं है, लेकिन पैसा जीने के लिए जरूरी हो चुका है, बस इसी कारण से लिखने से कुछ पैसा मिले तो बेहद अच्छा था लेकिन ऐसा कुछ अभी तक नहीं हुआ, लेकिन संभवत आगे हो पाएगा इसी उम्मीद में इस तरह से काम करता रहूँगा, हाँ मैं लिखूँगा लेकिन अब सिर्फ अपनी मनपसंद से अब मैं उस तरह से नहीं लिख पाऊँगा जिसको लिखने से मैं पैसों के पीछे भागना शुरू करू ऐसा नहीं करना मुझे, मुझे सिर्फ लिखना है ओर वो भी दिल से, अपने विषय पर वैसे तो मैं किसी भी विषय पर लिखना शुरू कर देता हूँ, जब कुछ लिखने का मन करता है तो लिख लेता हूँ, जब नहीं करता तो बस वही रुक जाता हूँ।

लिखने ओर ना लिखने का सिलसिला बस यू ही चलता रहता है। कभी बहुत सारा लिख लेता हूँ तो कभी बस यू ही रुक जाता हूँ जब मैं कुछ भी नहीं लिख पाता हूँ।

यह भी पढे: लिखता हूँ, मेरी दिनचर्या, लिखने का मन, क्या करता हूँ मैं,

आपके फैसले

जब आप गिरने लगते हो तभी वो समय होता है, जब लोग आपकी काबिलियत पर भी शक करने लगते है और आपके फैसले पर भी, और उन लोगों को लगता है की यह कुछ नहीं कर सकता अपनी जिंदगी में, बस खुद को ओर दूसरों को बेवकूफ बना रहा है। यह व्यक्ति दूसरों को सलाह तो देता है,

परंतु खुद के लिए कुछ नहीं कर पाया, जब तक आप कुछ नहीं बनते तब तक लोग इसी तरह से आप पर ताने कसते है, और आपको हमेशा नीचा दिखाने की कोशिश करते है साथ यह साबित करने में लगे रहते है की आप किसी लायक नहीं है।

जब आप किसी भी दिशा में सफल नहीं हो रहे हो, तब आपको इसी प्रकार से बहुत सारी हिदायते मिलती है।

इसके साथ ही समय को खराब ही कर रहा है। इसी समय आपका विश्वास भी टूटने लगता है, और हो सकता है की आप अब कुछ गलत निर्णय ले लो लेकिन यही आपकी समझदारी का समय है।

लेकिन आपके लिए यही वो समय होता है जब आप दूसरों से मदद मांगे बिना ही कुछ बनकर, कुछ करके दिखाए, जिससे लोगों को आप गलत साबित कर पाए क्युकी यही वो समय है जब आप उनका दुगना भरोसा जीत सकते है, ओर यदि आप सफल नहीं होते जो लोग बचे है वो भी आपको धीरे धीरे छोड़ देंगे।

आपके फैसले आपको फर्श और अर्श पर रखते है, आपके जीवन के परिणाम आपके फैसले पर ही निर्भर करते है, जिस तरह के आप फैसले लेते है उसी तरह से आपका जीवन भी चलता है, आपके फैसले आपके जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए कोई भी फैसला लेने से पहले की बार सोचे जल्दबाजी में लिए गए फैसले भविष्य में बहुत क्षति करते है। इसलिए जब तक आपको अपने फैसलों पर पूरा भरोसा न हो तब तक कोई फैसला ना ले।

यह भी पढे: फैसला, असफलता को स्वीकार,

विश्व पुस्तक मेला

विश्व पुस्तक मेला जहां हर साल हजारों लोग अपनी पुस्तकों की प्रदशनी करते है, हर बार की तरह यहां बहुत सारे प्रकाशन और व्यापारी इस पुस्तक मेले में अपनी पुस्तकों की प्रदर्शनी करते है।

जैसे जैसे हम डिजिटल युग की और बढ़ रहे है पढ़ने वाले की संख्या कम होती जा रही है, यह एक आम बात है और ऐसा होना निश्चित ही है, यदि हम समय के साथ स्वयं को नहीं बदलते तो समय ही हम एक दिन बदल देगा। और हम उस समय, समय के दौर से बाहर हो चुके होंगे।

फिर दुबारा उस स्थान पर फिट होना बहुत मुश्किल होगा इसलिए हमें समय के साथ साथ बदल ही जाना चाहिए।

जैसे ही यह आर्टिकल मैं लिख रहा था सामने एक अंकल बैठ कर बहुत पुरानी किताब ही पढ़ रहे थे टूटी दीवारें जिसका पब्लिशर मीरा पॉकेट बुक्स है। मन तो कर रहा था कि एक तस्वीर की जाए लेकिन बिना उनकी अनुमति कैसे तस्वीर लु बस यही सोचकर रुक गया वो मेरे बिल्कुल सामने वाली सीट पर बैठे थे, और उनको देख बहुत मेरे मन में प्रसन्नता थी जहां हम डिजिटल युग की बात करने जा रहे है वहीं किताबों को स्पर्श करने का आनंद ओर अनुभव कुछ और ही होता है जब आपके हाथों में किताब होती है और आप उसको पढ़ते है तो आप किताब में पूरी तरह से खो जाते है।

मैं अपने मन को रोक नहीं पाया और मैंने उनकी एक तस्वीर ले ही ली बिना चेहरे की।

आज मैं दिल्ली विश्व पुस्तक मेला लगा है जिसमे मैं जा रहा था जहां मैं पिछले 20 वर्षों से जा रहा हूं। बचपन से ही मुझे पुस्तकों से लगाव रहा है। मुझे लाखों किताबें एकसाथ देख ऐसा लगता है कि मैं उन सभी पुस्तकों को पढ़ रहा हूं।

एक किताब ही होती है जिसके साथ आप बहुत सारी बातें कर सकते हो अपने मन की, वो आपकी मनपसंद की बाते आपसे करती है।

आज मैंने विश्व पुस्तक मेले बहुत सारी किताबे देखी ओर अलग अलग जगह गया कुछ नई चीज़े तो कुछ पुरानी चीज़े भी देखने को मिली हर वर्ष हजारों किताबे छपती है, हर रोज एक नया लेखक भी आ जाता है, और बहुत तो पुराने लेखक ही किताबे लिखते रहते है।

सपना बुक हाउस
सपना बुक हाउस

दिल्ली की जनता

दिल्ली की जनता ने क्या देखकर वोट दिया, दिल्ली की जनता क्या बदलाव चाहती है, पिछले 10 साल से क्या काम किए है, आम आदमी पार्टी की सरकार ने और किन कामों के कारण दिल्ली की सरकार आम आदमी पार्टी को चुने।

दिल्ली की बसों में महिलाओ के लिए फ्री में सफर लेकिन आदमी बेचारा परेशान होता दिखता है, बस के इंतजार में, जो भी बस आती है वह पूरी तरह से महिलाओ से ही भारी हुई आती है।

महिलाओ को 2100रुपये में मिलेंगे यदि आम आदमी पार्टी की सरकार जीत जाती है तो।

हर महीने दिल्ली की सरकार 20,000 लीटर फ्री में देती है, क्या यह देखकर जनता आम आदमी पार्टी को वोट करे,

200 यूनिट बिजली फ्री है क्या यह देखकर वोट देना चाहिए।

दिल्ली की सरकार दिल्ली की जनता के लिए मोहल्ला क्लिनिक तो बनवाए, लेकिन बहुत सारी जगह सुचारु रूप से चलते नहीं है।

दिल्ली में जो नई बसे आनी थी उन्मे बहुत देरी करी, जो बहुत पहले ही आनी चाहिए थी, लेकिन बहुत देर में आई, चलो कोई बात नहीं लेकिन आई तो सही कुछ कुछ करके दिल्ली की सड़कों पर बस आई लेकिन अब भी ऐसी बहुत सारी जगह है जहां लोगों को 20-25 मिनट का इंतजार करना पड़ता है बस के लिए, जिसमे अभी तक कोई सुधार नहीं है।

दिल्ली की सड़कों का हाल क्या दिल्ली की जनता यह नहीं देखती, सड़कों का इतना बुरा हाल है, जो lockdown के समय में लिपा पोती हुई थी उसके बाद फिर कुछ नहीं हुआ, अब टूटी फूटी सड़कों पर वहाँ दौड़ रहे है, कही गड्ढे बड़े तो नहीं कही चोड़े हो रहे है लेकिन देखे कौन उनको दिल्ली की सरकार तो मुफ़्त का पानी ओर मुफ़्त बिजली फ्री देकर सो रही है।

दिल्ली के सरकारी स्कूल का हाल क्या है यह सबको पता है, पढ़ाई का स्तर यह है की 12 वी कक्षा का छात्र सही से हिन्दी भी नहीं पढ़ पाता है ओर यह बोलते है, हमारा मोडेल इंग्लैंड तक फेमस है।

ई-रिक्शा की संख्या इतनी बढ़ चुकी है की पैदल यात्री के चलने के लिए भी जगह नहीं मिलती, जहां मर्जी यह लोग रोक लेते है, ट्राफिक जाम की समस्या खतम नहीं होती।

हमे चाहिए साफ सड़के, मार्केटस को बेहतर ओर व्यवस्थित किया जाए जिससे ग्राहक ओर दुकानदार दोनों को फायदा हो।

जनता को जागरूक बनाया जाए सफाई के प्रति, दिल्ली की जनता को अधिक सुविधा दी जाए, युवा को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाए।

दिल्ली की जनता को चाहिए की वह अपनी एक लिस्ट बनाए ओर सरकार को भेजे की हमारे लिए यह सभी कार्य किए तभी हम आपको वोट देंगे नहीं तो हम सरकार को गिर देंगे, हर साल सरकार बदलने का प्रावधान हो, हमारी शिकायत को लगातार सुना जाए।

यह भी पढे: राज नीति, साफ पानी की समस्या,

मन की मनघडन्त बाते

मन की मनघडन्त बाते
मनघडन्त बाते इस मन की
मन भी ना जाने कैसी कैसी बाते घड़ता है,
ये अजीब सी कुछ अटपटी सी मनघड़ंत बाते मेरा मन करता है

कुछ किस्से खुद ही बुनता है, कभी कहानी सुना देता है
कभी गुस्से में होता है तो
कभी प्यार करता है
जब ये बाते बुनता है

तब ये किसी की नही सुनता है
बस मनघड़ंत-बस मनगढ़ंत
बाते ये मन बुनता है

कुछ देखी , कुछ सुनी बाते ये मन करता है
मन की भीतर दबी बात होती है
जब कोई लाइन मैं आगे आकर खड़ा हो जाता है,
बिना मतलब हमे पीछे कर जाता है
मन भीतर गुस्सा तो बहुत आता है

लेकिन
कुछ कह नही पाते हम
बस कोसते हुए जाते हम
जब कोई धक्का मार चला जाता है,
सॉरी बोलकर अपना पीछा वो छुड़ा जाता है
जैसे सॉरी से क्या सब कुछ ठीक हो जाता है,
अजी कोई बिना मतलब के गाली देता है,
छोटा समझकर कोई छेड हमे जाता है

जब कोई उम्र में छोटी लड़की भी यह लेडीज
सीट है  बोलकर उठा देती है ना शर्म आती है
उसे ना लाज
बस मेरे मन की गाली तो  मेरे मन भीतर दब रह जाती है

बिना मतलब रोड पर चलते हुए टक्कर कोई मार जाता है और पीछे मुड़कर भी नही देखता है
बस अनदेखा कर मरता हुआ बीच रोड छोड़ चला वो जाता है ,
बिना कान लीड लगाए मेट्रो और बसों में जब कोई मोबाइल पर गाना बजाता है
गुस्सा तो बहुत आता है,
पर मन की बात मन में ही रह जाती है।

जब गुटका खाकर बस के बाहर थूकता है,
वो छीटे मुझ पर आती है लेकिन कुछ हो नही पाता है

जब पुलिस स्टेशन में एक FIR के लिए चक्कर लगाता हूं
हल कुछ निकल नही पाता है
जब एक केस के लिए कोर्ट के चक्कर लगाता हूं
जब पुलिस वाला हफ्ता वसूल कर जाता है
डीटीसी बस का कन्डक्टर पूरे पैसे देने पर टिकट नही बनाता है।

बोलता है बैठ मेरे पास उतर जाना आराम से,
और कई बार गलत टिकट वो बनाता है,
आम आदमी हूं मुझे कुछ समझ नही आता है
गुस्सा तब आता है जब खाकी वर्दी वाला  भी गाड़ी पकड़कर चलान काट जाता है।

रोकता है परेशान करता है चलान भी नही देता है,
बस 500 का नोट लेकर ही वो छोड़ता है, मेरा मन मनगढ़ंत बाते बनाता है

लेकिन कुछ कर नहीं पता है बस दबी हुई, मन की बाते मन में रह जाती है।

यह भी पढे: सफर की कुछ बाते, सुकून की जिंदगी, जिंदगी की राह, मन की बाते, जीवन के लेखक,