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मामा जी की प्यारी छत

छत के वो दृश्य मनमोहक वो किस्से
कुछ पुरानी यादे और कुछ पुरानी बाते
जो बिना मोबाइल, ओर कैमरे के अब भी कैद है
हमारी आंखों में हम संजोए वो दिन

आजकल तो बच्चे कैद कर लेते है
हर उस बात को अपने मोबाइल में
लेकिन हम कुछ भी कैद नही कर पाए
उस कैमरे में

क्योंकि
वो कैमरे वाला टाइम नही था
मोबाइल नही थे बस जो कैद हुआ
वो सब हमारी आंखों में चित्रित है

हमारी यादों में अब भी सजे हुए है
  वैसे के वैसे ही अब तक रखे हुए है
 
  वो सारे चित्र
एक एक पल अब भी हमारे जहन मैं उसी तरह से है
जैसे   हमने उस पल को जीया बेहद हो ओर फिर याद करके एक बार ओर जी रहे है

  आज वो यादे है छत की
  हमारे प्यारे मामा जी की छत
  जिस पर हम घंटो खेला कूदा करते थे
  लड़ते झगड़ते ( लड़ते झगड़ते तो शायद कभी थे नही हम , बस खूब मस्ती हम किया करते थे )

और भी बहुत कुछ बचपन में
मामा जी की वो प्यारी छत
जिसको भूल मैं अब तक भी ना पाया
आज 6 साल बाद छत आकर याद ताज़ा कर लाया

वो छत जिस पर गए हुए लगभग 6 साल बीत गए है
मामा जी की वो प्यारी छत ही है जिस पर हम कल फिर से गए

जिस छत पर हम पूरा दिन बिता दिया करते थे।

छत पर जाते ही मेरे दिमाग में
छपे हुए चित्र फिर से ताज़ा हो गए

आसपास के सारे मकान आज और बड़े गए
जो खाली थे घर , वो घर भी आज भर गए थे

वो आसपास के बच्चे भी अब और बड़े हो गए थे
बात मानो कल ही की हो जब हम घंटो छत पर खेला करते थे। थक हार कर कुछ देर हम सोया करते थे भरी दोपहरी में भी बस हम छत पर ही होया हम करते थे।

वो बारिश के दिन अब भी याद है  बारिश में हम नहा लिया करते थे बारिश से चौक गिला ना हो जाए वो जाल पर मोमजामा बिछाकर  इटो से ढक दिया करते थे

( और जब बारिश के दिन हुआ करते थे तब जाली पर
मोमजामा ढक उस पर ईंट हम रखा करते थे)

वो छत बड़ी प्यारी है उस छत से जुड़ी है
हम सबकी यादे बहुत सारी है।

रात को घर की लाइट जाने पर छत पर ही हम सो जाया करते थे
ओर सुबह  सूरज में चढ़ती धूप जब तक तेज़ ना हो जाए तब तक उठ कर हम नीचे नही आया करते थे।

जब छत पर हम सोते थे हमे सोने के लिए खाट मिला करती थी अब तो वो छत के साथ साथ खाट भी कही खो गयी है

रात को जब छत पर जाते थे सोने तब लेट कर हम बस तारे गिना करते थे जितने बाल उतने तारे इस बात बोलकर बात पूरी कर दिया करते थे

हम तारे गिनते तो कभी सप्तऋषि , तो कभी कुछ और हम बस ढूंढ करते थे पूरी रात तारो में बीत जाए ऐसी कोशिश हम किया करता थे कभी कभी तो ध्रुव तारा देखने की कोशिश में पूरी रात जगा करते थे।

सुबह से लेकर शाम तक छत पर ही दिन बीत जाता था,
ना हम नीचे आते थे ओर ना ही कही घूमने हम जाते थे

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

शब्द जो चोटिल करदे

बस ऐसे ही बड़े अच्छे मूड में बैठा हुआ था मैं अपनी दुकान पर मेरी किताबो की दुकान है जिस पर पर बहुत सारे छोटे बच्चे आते है ओर बहुत लडकिया व लड़के जो आते है दुकान है
उस दिन शाम को एक लड़की आई अपनी मम्मी के साथ  जो लगातार आती रहती है मेरी दुकान पर उस दिन उसने मुझसे एक किताब के बारे में पूछा की भैया वो हिंदी की  आरोह , वितान 11वी क्लास की  किताब आयी है क्या ?
मेने जरा रुक कहाँ क्योंकि वह किताबे पहले भी 2 बार वो पूछ चुके थे ओर मेरे पास नही थी तब भी ओर आज फिर मेने कहाँ "नही यार" 
जैसे ही मेने उसे नही यार कहाँ उसने फटाक से उत्तर दिया भैया 'यार' मत बोला करो बहन बोल लिया करो।
(उस समय उसकी मम्मी भी साथ में थी तो यह एक सोचने वाली बात है की उस छोटी लड़की ने यह बात बोली होगी तो मुझे कितना अजीब लगा होगा )
मुझे एकदम से इतना अजीब लगा की मैं बिल्कुल चुप हो गया ओर अब जैसे मेरे पास कुछ शब्द ना थे मेने अपनी गर्दन हिलाकर उसे आरम से कह दिया ठीक है।
बात अगर देखी जाए तो बात तो कुछ भी नही है क्योंकि आजकल हम सभी या ज्यादातर लोग पापा यार, भाई यार , बहन यार , मम्मी यार , कहकर ही बोलते है वैसे भी यह आदत मुझे धीरे धीरे यही से लगी है क्योंकि ज्यादातर बच्चे मुझे भैया यार कहकर ही बोलते है
लेकिन उस दिन मुझे अपने आप से घृणा आ रही थी क्योंकि मेरे मन में उसके लिए कोई ऐसा भाव नही था कोई ग़लत ओर असभ्य भाषा का प्रयोग नहीं करता  जिससे उसको आहत हो या मैं किसी को उन नजरो से नही देखता , या अपशब्द बोलता परंतु उस छोटी लड़की के कहे वो दो शब्द मुझे बहुत चुभ गए जिसका दर्द नही जा रहा है अब मैं पिछले 3 दिनों से किसी बात कर रहा हु तो ऐसे लग रहा है की कोई फिर से मुझे ऐसा कोई  न कहदे , कोई मेरे बारे में गलत ना सोचले क्योंकि वो शब्द मेरे कानो में  बार बार गूंज रहे है।
मुझे डर लगता है ऐसे विचारों से जो मेरे बारे में गलत अवधारणा रख ले बिना मुझे जाने पहचाने।
यह भी ठीक है की मुझे इस प्रकार के शब्द प्रयोग में नही लाने चाहिए क्योंकि मैं उम्र के लिहाज से बड़ा हु यदि मैं ही इन सब शब्दो का प्रयोग करूंगा तो आगे आने वाली पीढ़ी किस तरह की होगी ?


"यार" कभी कभी बात कुछ भी नही होती और शब्द के मायने , मतलब भी कुछ नही होते लेकिन वो भीतर तक चुभ जाते है बार बार यही एहसास दिलाते है कि यह होना था ऐसा कुछ सोच भी ना था। ना ही ऐसा मेरा कहने का तातपर्य था, किसी को आहत करने के लिए भी उस शब्द का प्रयोग नही किया जा रहा था परंतु फिर भी ना जाने वो शब्द कैसे किसी को चोटिल कर देता है जिसकी वजह से आप भी बहुत अजीब , घृणित  महसूस करते हो खुद से,
वो शब्द नासूर बनकर आपको तकलीफ देते है आप इग्नोर करने की भी कोशिश करते हो परंतु यह शब्द है जिनका बार बार प्रयोग होता है और आप बार बार आहित होते हो।

विषय में रुचि सबकी अलग अलग

सबकी अपनी अलग अलग तरह की रूचि होती है और अलग अलग विषयो में परंतु यह जरुरी नहीं है कि हम सभी को जीवन में हमारी रूचि के अनुसार ही कार्य मिले और जिस विषय में हमारी है उसमें हमे सफलता मिले इसलिए हम जो भी कार्य करते है उसे ओर उत्साह से करे यही एक बेहतर विकल्प है बहुत सारे छात्रों की रूचि गणित में होती है परंतु उससे ज्यादा छात्रों को गणित समझ में ही नहीं आती और कुछ छात्र गणित में रूचि तो रखते है परंतु उसमे सफल नहीं हो पाते। बहुत सारे छात्र यह निर्णय लेते है 10वीं कक्षा के बाद #Science के विषय लेंगे परंतु उतने अंक ही नहीं प्राप्त कर पाते की वो विज्ञानं ले पाए या फिर उन्हें ये लगने लगता कि क्या आगे वो कर पाएंगे या नहीं ? क्योंकि जरुरी नहीं है आपको विज्ञानं के सभी विषय पसंद हो 
उसमे #physics #chemistry #biology होती है जरुरी नहीं है आपको यह तीनों विषय पसंद हो समय के साथ साथ आपको अपनी रुचियों के बारे में पता लगता है फिर आप उसी और अग्रसर होते है क्योंकि जरुरी नहीं है जिसमे आपकी रुचि आज है उसीमे आपकी रुचि कल भी हो।
हमारे जीवन में हर पड़ाव पर बहुत सारे ऐसे कार्य सामने आते है  जो हमे अपनी रूचि के अनुसार नहीं मिलते लेकिन हमें वो सभी कार्यो को करना हमारे जीवन की आवश्यकता में आ जाते है चाहे हम उस कार्य को करना चाहते है अथवा नहीं परंतु कार्य तो करना ही होता है क्यों ना  हम उन सभी कार्यो को #उत्साह पूर्वक  करे 
 जिस तरह से हम पुस्तक पढ़ते है अथवा जो बिषय हमारी पसंद का नहीं है फिर भी हमे उस विषय को भी पढ़ना पड़ता है क्योंकि हमें परीक्षा में सफल होना होता है, हम में से ज्यादातर छात्रों को #सामाजिक विज्ञान पढ़ने में अरुचि होती है लेकिन हमें परीक्षा में सफल होने के लिए वो विषय पढ़ना अनिवार्य होता है जबकि सामाजिक विज्ञान ही सबसे महत्वपूर्ण विषय निकल कर बाहर आता है जब आप #IAS #IS आदि की #परीक्षाओ की तैयारी करते है तो सबसे ज्यादा आपको सामाजिक अध्यन आदि के विषयों में ही सबसे अधिक जानकारी लेनी होती है चाहे वो विषय हमे पसंद था या नहीं परंतु जानकारी लेने के लिए उस विषय में हमे रूचि बनानी पढ़ी तथा उत्साह से के साथ पढ़ना भी पढ़ा 


इसलिए सफल व्यक्तित्व के लिए हमे सभी कार्यो को उत्साह के साथ करना चाहिए किसी भी कार्य को करते समय हमको #बोरियत ना महसूस हो पूर्ण #ध्यान और समग्र एकाग्रता के साथ हमे अपने कार्य को लगातार करना चाहिए तथा उस कार्य में जब तक सफलता ना प्राप्त करले तब तक हमे उस कार्य को  करना चाहिए क्योंकि वही कार्य आपको आपकी #मंजिल की और ले जाने में सहायक है 


फिर हमें परीक्षा हेतु के लिए पढ़ने होते है ताकि हम परीक्षा में सफल हो सके यदि हम वही विषय उत्साह से पढ़े तो हम सफल तो होंगे ही अपितु उस #विषय में अच्छे #अंक भी प्राप्त कर पाएंगे
या फिर एक ही काम को बार बार करते हुए हम बोर हो जाते है परंतु वो कार्य करना हमारी मज़बूरी होता है यदि हम वही कार्य रूचि के साथ करे तो हम उस कार्य को अच्छे ढंगसे तथा अच्छे परिणाम की स्तिथि तक करते है 

पहाड़ गंज एरिया में तारो का जाल

पहाड़ गंज एरिया में कृष्णा गली घी मंडी चौक की तारे बहुत सारे लोगो के लिए एक ऐसा स्पॉट बना हुआ जिसे देख कर बहुत सारे लोग स्तब्ध हो जाते है , जिनको देखने के बाद लोगो के पास शब्द नही होते और उन तारो को देखकर फ़ोटो खिंचने लग जाते है।

जब विदेशी पर्यटक इस गली से गुजरते है तो वह इन तारो की फोटोज लेते है और इनकी ड्राइंग भी बनाते है आज से थोड़े टाइम पहले मेरी मुलाकात साशा बेजुरोव से हुई थी जो बहुत ही मशहूर फोटोग्राफर है उन्होंने भी इन तारो की बहुत सारी फोटोज ली एवं चित्र भी बनाया था।

कहने का तात्पर्य यह है कि यह तारे सभी को अचंभित करती है क्युकी यह बहुत नीचे है तथा आने जाने वालो को परेशानी भी होती है यह पूरी तरह से एक झुंड बनाए हुए है।

इनको यह नीचे लटकी हुई तारे बड़ी अदभुत सी लगती है मानो उन्होंने ऐसे तारो को नीचे की और कभी देखा ना हो यह नजारा कभी देखा ही ना हो इसलिए यह तारे उन्हें आकर्षित करती है परंतु यह तारे खतरनाक तारे है यदि किसी दिन कोई हादसा हो गया तो कौन कैसे बाख पायेगा एक तो पहाड़ गंज गालियां इतनी संकरी और उसके बाद यह नीचे लटकी हुए तारे जिनका कोई समाधान नही मिल रहा है।

क्या इनका कोई समाधान है ? क्या सरकार इन लटकी हुई तारो के बारे में कुछ सोच रही है , यह तारे सिर्फ पहाड़ गंज में ही नही है दिल्ली की काफी जगह ऐसी जहाँ इस प्रकार से तारे लटकी हुई है , नई सड़क, चावड़ी बाजार , चांदनी चौक, आदि जगहों पर भी इसी तरह से तारे नीचे की और लटकी हुई है तथा इससे भी बदतर हालात में है और इनका कोई समाधान होता हुआ नही दिख रहा है।