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परिवर्तन काल जीवन

परिवर्तन काल जीवन
एक बार यह प्रश्न पूछा मुझसे किसी ने चलिए आज इस प्रश्न को मै एक ओर तरीके से समझाता हूं
हमारा जीवन इस समय किस काल में चल रहा है , यह जो जीवन है वो वर्तमान काल है और हम सभी भविष्य की रचना कर रहे है एक एसा समय जिसकी हम सभी रचना करने में सहायक तत्व है वो किस प्रकार है यह आप स्वयं की हर एक प्रकार कि गतिविधि से समझ सकते है

भूतकाल
भूतकाल जिसे बदला नहीं जा सकता और हम सभी बहुत लंबी अवधि तय कर चुके इससे पूर्व भी हमारे अनेकानेक जन्म हो चुके है। यह समय का बहुत बड़ा हिस्सा है लगभग 14 करोड़ साल हो चुके है एक खोज के अनुसार जिसमे हस्तक्षेप करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 

वर्तमान काल
वर्तमान काल जिसे हम जी रहे है जिसका धागा भूतकाल से जुड़ा हुआ है जो कार्य हो रहा है हम भूतकाल में अधूरा छोड़ आए या फिर किसी कारण वश अधूरा रह जाता है और साथ साथ हम अपने भविष्य को और बेहतर बनाने के लिए यह वर्तमान काल जीवन व्यतीत कर रहे है परन्तु यह समय का एक बहुत छोटा हिस्सा है। जो भूतकाल में हमारी इच्छाएं, मिलना , घटना , स्तिथि , परिस्थिति बाकी थी वह वर्तमान में पूरी हो रही है जैसा की हमें लगता है इसके पहले भी यह घटना हो चुकी है , हम यहां आ चुके है , हम इसे मिल चुके है इसी प्रकार जो इच्छाएं हमारी अभी नहीं पूरी हो रही वह सभी भविष्य काल में जा रही है और हम सारी अधूरी इच्छाओं को भविष्य में पूरा करेंगे।

भविष्य काल
भविष्य काल  आज हम अपनी अनेकानेक इच्छाएं छोड़ रहे है कि वो सभी इच्छाएं आगे पूरी करेंगे इसी तरह से भविष्य काल लगातार असीमित हो रहा है यह एक अनंत समय अवधि में फैला हुआ है।
भविष्य काल पूर्ण रूप है जैसी हमारी इच्छाएं वर्तमान काल के समय में थी वह सभी भविष्य काल में बनी हुई होती है हमें उसी प्रकार का संसार भविष्य काल में मिलता है।

हम जिस पृथ्वी पर है उसे वर्तमान ग्रह कहते है उसके अलावा तो समानंतर ग्रह है भूतकाल ग्रह और भविष्य काल जिसमे समय कही से कही तक नही है।
क्या यह हमें ज्ञात है ? कि समय कितनी दूरी तय कर चुका नहीं हमे नही पता की भविष्य कितनी दूरी तय कर चुका होगा और अभी तक हमे यह भी नही ज्ञात की भूतकाल कितनी दूर तय करके आया है सिर्फ अनुमानित दृष्टिकोण है।

जिस ग्रह पर आज हम है यह एक सीधी रेखा की भांति है जो बार बार भूतकाल और भविष्य काल की घटनाओ से टकरा रहा है हम वर्तमान काल के जिस हिस्से में है जिसमें
कुछ भी आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है परंतु दूसरे कालो में नहीं जैसे भूतकाल में कुछ भी संशोधन नही किया जा सकता  और वही दूसरी ओर भविष्य काल में बहुत सारी संभावनाएं पैदा की सकती है परंतु वर्तमान काल में  करने वाली एक कोशिश है आप वर्तमान काल में हो जो की बहुत छोटा हिस्सा है जो हम और आप शायद सोच भी ना सकते यह वो हिस्सा है

जो कि एक पल का भी 100000वा हिस्सा हो हो सकता है और शायद उससे भी कई गुना छोटा हिस्सा जिसमे कुछ भी छोड़ा जा सकता है जिसमे किसी का प्रवेश संभव है

परंतु भूतकाल में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नही किया जा सकता क्युकी वह हो चुका है और जो हो चुका है उस घटना क्रम को बदलना असम्भव है जिस तरह वाणी से निकला वचन वापस नहीं लिया जा सकता , मृतक को जीवित नहीं किया जा सकता उसी प्रकार भूतकाल में
वापस नहीं जाया हा सकता है।

लेकिन ये वर्तमान काल ऐसा काल जिसमे आप बार बार एक घटना को कई बार देख सकते हो एवम कर सकते हो यहाँ पर आपके द्वारा की कोई भी गलती या घटना पुनः ठीक की जा सकती है आप अपनी भूल को सुधार करने के लिए बहुत सारे प्रयत्न कर सकते हो।

  परंतु भूतकाल में जो गलतियां हो चुकी है उन्हें ठीक नही किया जा सकता या फिर उनसे कोई भी और किसी भी प्रकार की छेड़खानी नही की जा सकती वो ज्यो की त्यों ही रहेगी परंतु भविष्य के लिए उनमें संभावनाएं पैदा की जा  सकती है जिनसे वो ठीक हो सके हम उस काल में है जो इन सभी घटनाओ को ठीक कर रहा है और हमारे भविष्य में होने वाले कार्य को सुचारू रूप से चलाया जा सके उन्हें पूरी तरह से ठीक किया जा रहा है हम उस एक पल में है जहा पर छेड़खानी की, संशोधन की असीम संभावना है लेकिन यह एक बहुत छोटी और सीधी रेखा है जिसमे किसी का प्रवेश होना मुश्किल है परन्तु असम्भव नहीं।
 
  क्युकी  यह दोनो कालो के मध्य में रगड़ होने पर कोई मिलाप रेखा है जिसे हम युग परिवर्तन रेखा भी कह सकते  है इस काल को शायद इसलिए यह भी कहा जाता है कि परिवर्तन ही जीवन का नियम है हो सकता है यह इसी आधार पर कहा गया हो।  यह घटना हमारे हिसाब से बहुत बड़ी है परंतु यह घटना एक बहुत छोटी घटना का रूप है

Pareller universe concept ( Theory )
We are living in the present universe which is a straight line in btw past and future universe and this present universe is just a millionth second which can’t be seen by past and future both of them are enjoying the unlimited time and period where there is no time , no boundaries , no discussion about time
{ future }—-{present }—{past } these are parrler to each other when ever they come in connection we call it yug parivartan
In our present universe we can make multiple change for the future but in past universe this can not be change
And in the future universe there are million of possibilities even we can call it perfect universe for all of us who thinking about to be there who all are working and giving effort for the better future —  “A perfect future”

जिस ब्रह्मंड के बारे में हम सभी सोच रहे है यदि उसके बारे में अंदाज लगाया जाए तो वह बहुत आगे की सभ्यता हो चुकी है क्योंकि यदि हम समझें तो हमारा जीवन हमारी गणना के अनुसार 14 करोड़ साल पुराना है
उसके हिसाब से हम जितने तकनीकी हो चुके है उसके हि्साब से हमारी भविष्य की सभ्यता बहुत उन्नत होगी जो सभी आराम दायक और सभी प्रकार के औजारों से समृद्ध हो चुकी हो शायद टेक्नॉलजी
से भरपूर सभी कुछ होगा और जिसे और बेहतर होने से कोई नही रोक पा रहा है
उन्होंने अपने खाने पीने कमाने के सभी साधनों को पूरा कर लिया होगा अथवा यह भी हो सकता है उन्होंने अपने खाने को त्याग ही दिया हो
यह एक पूर्ण विकसित सभ्यता हो चुकी होगी

परिवर्तन काल जीवन

परिवर्तन काल जीवन
एक बार यह प्रश्न पूछा मुझसे किसी ने चलिए आज इस प्रश्न को मै एक ओर तरीके से समझाता हूं
हमारा जीवन इस समय किस काल में चल रहा है , यह जो जीवन है वो वर्तमान काल है और हम सभी भविष्य की रचना कर रहे है एक एसा समय जिसकी हम सभी रचना करने में सहायक तत्व है वो किस प्रकार है यह आप स्वयं की हर एक प्रकार कि गतिविधि से समझ सकते है

भूतकाल
भूतकाल जिसे बदला नहीं जा सकता और हम सभी बहुत लंबी अवधि तय कर चुके इससे पूर्व भी हमारे अनेकानेक जन्म हो चुके है। यह समय का बहुत बड़ा हिस्सा है लगभग 14 करोड़ साल हो चुके है एक खोज के अनुसार जिसमे हस्तक्षेप करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। 

वर्तमान काल
वर्तमान काल जिसे हम जी रहे है जिसका धागा भूतकाल से जुड़ा हुआ है जो कार्य हो रहा है हम भूतकाल में अधूरा छोड़ आए या फिर किसी कारण वश अधूरा रह जाता है और साथ साथ हम अपने भविष्य को और बेहतर बनाने के लिए यह वर्तमान काल जीवन व्यतीत कर रहे है परन्तु यह समय का एक बहुत छोटा हिस्सा है। जो भूतकाल में हमारी इच्छाएं, मिलना , घटना , स्तिथि , परिस्थिति बाकी थी वह वर्तमान में पूरी हो रही है जैसा की हमें लगता है इसके पहले भी यह घटना हो चुकी है , हम यहां आ चुके है , हम इसे मिल चुके है इसी प्रकार जो इच्छाएं हमारी अभी नहीं पूरी हो रही वह सभी भविष्य काल में जा रही है और हम सारी अधूरी इच्छाओं को भविष्य में पूरा करेंगे।

भविष्य काल
भविष्य काल  आज हम अपनी अनेकानेक इच्छाएं छोड़ रहे है कि वो सभी इच्छाएं आगे पूरी करेंगे इसी तरह से भविष्य काल लगातार असीमित हो रहा है यह एक अनंत समय अवधि में फैला हुआ है।
भविष्य काल पूर्ण रूप है जैसी हमारी इच्छाएं वर्तमान काल के समय में थी वह सभी भविष्य काल में बनी हुई होती है हमें उसी प्रकार का संसार भविष्य काल में मिलता है।

हम जिस पृथ्वी पर है उसे वर्तमान ग्रह कहते है उसके अलावा तो समानंतर ग्रह है भूतकाल ग्रह और भविष्य काल जिसमे समय कही से कही तक नही है।
क्या यह हमें ज्ञात है ? कि समय कितनी दूरी तय कर चुका नहीं हमे नही पता की भविष्य कितनी दूरी तय कर चुका होगा और अभी तक हमे यह भी नही ज्ञात की भूतकाल कितनी दूर तय करके आया है सिर्फ अनुमानित दृष्टिकोण है।

जिस ग्रह पर आज हम है यह एक सीधी रेखा की भांति है जो बार बार भूतकाल और भविष्य काल की घटनाओ से टकरा रहा है हम वर्तमान काल के जिस हिस्से में है जिसमें
कुछ भी आसानी से एडजस्ट किया जा सकता है परंतु दूसरे कालो में नहीं जैसे भूतकाल में कुछ भी संशोधन नही किया जा सकता  और वही दूसरी ओर भविष्य काल में बहुत सारी संभावनाएं पैदा की सकती है परंतु वर्तमान काल में  करने वाली एक कोशिश है आप वर्तमान काल में हो जो की बहुत छोटा हिस्सा है जो हम और आप शायद सोच भी ना सकते यह वो हिस्सा है

जो कि एक पल का भी 100000वा हिस्सा हो हो सकता है और शायद उससे भी कई गुना छोटा हिस्सा जिसमे कुछ भी छोड़ा जा सकता है जिसमे किसी का प्रवेश संभव है

परंतु भूतकाल में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नही किया जा सकता क्युकी वह हो चुका है और जो हो चुका है उस घटना क्रम को बदलना असम्भव है जिस तरह वाणी से निकला वचन वापस नहीं लिया जा सकता , मृतक को जीवित नहीं किया जा सकता उसी प्रकार भूतकाल में
वापस नहीं जाया हा सकता है।

लेकिन ये वर्तमान काल ऐसा काल जिसमे आप बार बार एक घटना को कई बार देख सकते हो एवम कर सकते हो यहाँ पर आपके द्वारा की कोई भी गलती या घटना पुनः ठीक की जा सकती है आप अपनी भूल को सुधार करने के लिए बहुत सारे प्रयत्न कर सकते हो।

  परंतु भूतकाल में जो गलतियां हो चुकी है उन्हें ठीक नही किया जा सकता या फिर उनसे कोई भी और किसी भी प्रकार की छेड़खानी नही की जा सकती वो ज्यो की त्यों ही रहेगी परंतु भविष्य के लिए उनमें संभावनाएं पैदा की जा  सकती है जिनसे वो ठीक हो सके हम उस काल में है जो इन सभी घटनाओ को ठीक कर रहा है और हमारे भविष्य में होने वाले कार्य को सुचारू रूप से चलाया जा सके उन्हें पूरी तरह से ठीक किया जा रहा है हम उस एक पल में है जहा पर छेड़खानी की, संशोधन की असीम संभावना है लेकिन यह एक बहुत छोटी और सीधी रेखा है जिसमे किसी का प्रवेश होना मुश्किल है परन्तु असम्भव नहीं।
 
  क्युकी  यह दोनो कालो के मध्य में रगड़ होने पर कोई मिलाप रेखा है जिसे हम युग परिवर्तन रेखा भी कह सकते  है इस काल को शायद इसलिए यह भी कहा जाता है कि परिवर्तन ही जीवन का नियम है हो सकता है यह इसी आधार पर कहा गया हो।  यह घटना हमारे हिसाब से बहुत बड़ी है परंतु यह घटना एक बहुत छोटी घटना का रूप है

Pareller universe concept ( Theory )
We are living in the present universe which is a straight line in btw past and future universe and this present universe is just a millionth second which can’t be seen by past and future both of them are enjoying the unlimited time and period where there is no time , no boundaries , no discussion about time
{ future }—-{present }—{past } these are parrler to each other when ever they come in connection we call it yug parivartan
In our present universe we can make multiple change for the future but in past universe this can not be change
And in the future universe there are million of possibilities even we can call it perfect universe for all of us who thinking about to be there who all are working and giving effort for the better future —  “A perfect future”

जिस ब्रह्मंड के बारे में हम सभी सोच रहे है यदि उसके बारे में अंदाज लगाया जाए तो वह बहुत आगे की सभ्यता हो चुकी है क्योंकि यदि हम समझें तो हमारा जीवन हमारी गणना के अनुसार 14 करोड़ साल पुराना है
उसके हिसाब से हम जितने तकनीकी हो चुके है उसके हि्साब से हमारी भविष्य की सभ्यता बहुत उन्नत होगी जो सभी आराम दायक और सभी प्रकार के औजारों से समृद्ध हो चुकी हो शायद टेक्नॉलजी
से भरपूर सभी कुछ होगा और जिसे और बेहतर होने से कोई नही रोक पा रहा है
उन्होंने अपने खाने पीने कमाने के सभी साधनों को पूरा कर लिया होगा अथवा यह भी हो सकता है उन्होंने अपने खाने को त्याग ही दिया हो
यह एक पूर्ण विकसित सभ्यता हो चुकी होगी

Social distancing

Social Media
व अन्य सभी जगह पर  एक शब्द और है जो बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है ओर पिछले 2 महिन से यह शब्द बहुत प्रचलित हो चुका है जिसको हमे समझना चाहिए और इस शब्द का पालन भी करना चाहिए।
Social Distancing
उचित दूरी बनाए रखे
संग दोष से बचाव = किसी के साथ नहीं रहना बाहर वाला आपके संपर्क से दूर और आप भी सभी से उचित दूरी बनाए शारीरिक तथा यहां हम मानसिक विचारो से दूरी बनाए क्युकी स्वयं को मजबूत बनाना है इस समय नकरात्मक विचारो का प्रभाव हम ना पड़े
भीड़ वाले इलाके में ना जाए साथ ही भीड़ एकत्रित ना होने दे
“भीड़ और झुण्ड” यह दोनों शब्द अब बहिष्कृत हो जाएंगे
“भेड़ चाल” यह शब्द गायब होगा अगले कुछ समय में
एकला चलो
असंग
स्वयं के साथ ज्यादा समय व्यतीत करना।
Self Quarantine  =

किसी को छूना नहीं ,किसी का स्पर्श नहीं लेना घर के सदस्यों से भी उचित दूरी बनाए रखना

अब यह एक शब्द है स्वयं को एक कमरे के भीतर ही रखना और आत्ममंथन करना  यदि आप चिड़चिड़ा या भीड़ के साथ नहीं रहना तो खुद एक अलग बंद कमरे में रह सकते हो और स्वयं के लिए बहुत कुछ सोच सकते , जिसे आप आत्म उत्थान कह सकते है इसी एक चीज के लोग घर छोड़ दिया करते थे परन्तु प्रकृति ने ये संदेश दिया है कि स्वयं के साथ रहे और स्वयं का निर्माण करे
सेल्फ ग्रूम = self Grooming

Home Quarantine = खुद को घर में कैद कर लेना और कहीं बाहर नहीं जाना यह भी एक अच्छा विचार है दुनिया की भीड़ से बिल्कुल अलग हो जाना और स्वयं के चित को शांत करना अपने परिवार के साथ खूब सारी बाते करना और बतियाना ना फोन की जरूरत ना किसी ओर चीज की आवश्यकता गृहस्थ जीवन ही अति सुखदाई अपने परिवार संग अपने समय का लाभ उठाओ और परिवार जन सहित अपने जीवन को सार्थक करो।

बेइंतहा मोहब्बत

जख्म

गिला-शिकवा ,
दर्द ए सितम,
ना मरहम कोई उन्होंने लगाया
बस
वक़्त बेवक्त
जख्म को नासूर बनाया
क्या क्या ना उन्होंने – क्या क्या ना उन्होंने
मुझ पर आजमाया
देखो तो सही अरे देखो तो सही
कमाल उनका था ये
उन्होंने हथियार भी ना उठाया
ओर
खून खंजर बिन मेरा कर दिया
और अब उन पर
इस जुल्म इल्जाम भी नहीं आया।

Patience

धीर , धीरज , सब्र, धैर्य, यह चारो शब्द इस एक patience शब्द में बदल दिए गए है
क्या आपको नहीं लगता?  कि हमारे शब्द कहीं खो गए है हमारे हिंदी भाषा के शब्दों का हनन हो रहा है
अंग्रेजी भाषी होना ठीक है परन्तु उचित स्थान पर ही सही है जहां जरूरत हो बिना जरूरत के अंग्रेजी भाषा ठीक नहीं है क्युकी अंग्रेज़ी में शब्दों का हनन होता है।
अब उन चारो शब्दों में कितना प्रेम है परन्तु patience
एक शब्द जिसमे ये चार शब्द आ गए क्या उसमे प्रेम दिखता है ? क्या भावनाए पता चल रही है ? क्या वो शब्दों का एहसास , अनुभव मालूम पड़ रहा है
मेरे ख्याल से बिल्कुल भी नहीं
यदि आप आजकल रामायण देख रहे है तो उसमें हिंदी के शब्दों का इतनी सहजता से प्रयोग हो रहा है जो मन को हर्षित कर देता है ऐसी हिंदी पिछले 20 साल में किसी और धारावाहिक में नहीं दिखी।

क्यों अंग्रेज़ी भाषा पर इतना बल दिया जा रहा है ? क्यों हिंदी में अधिक से अधिक कार्य नहीं कराए जाते ?
ऐसा क्या है अंग्रेज़ी में? ठीक है हम मान भी लें अंग्रेज़ी अतिआवश्यक है आज के समय के अनुसार परन्तु हिंदी अत्यंत आवश्यक भाषा है जो पूरी तरह से वैज्ञानिक है हर एक स्वर , उच्चारण की स्तिथि अलग स्थान से निकलती है जो सीधे आपके शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करती है और सभ्य शालीनता प्रदान करती है

तथा आपके भीतर जो विकार है उन्हें बाहर निकालती है परन्तु अंग्रेज़ी भाषा आपके भीतर विकार पैदा करती है। अंग्रेज़ी भाषा में बहुत सारे ऐसे शब्द है जो अर्थ का अनर्थ कर देते है परन्तु हिंदी हर एक शब्द को सही अर्थ एवं ज्ञान की दृष्टि से प्रमाणित करती है।

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है उसके पीछे कुछ कारण है , अंग्रेजी या किसी अन्य  भाषा में ये बात देखने में नहीं मिलती।

क, ख, ग, घ, ङ- कंठव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है। एक बार बोल कर देखिये।
च, छ, ज, झ,ञ- तालव्य कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ तालू से लगती है। एक बार बोल कर देखिये।
ट, ठ, ड, ढ , ण- मूर्धन्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है। एक बार बोल कर देखिये।
त, थ, द, ध, न- दंतीय कहे गए, क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है। एक बार बोल कर देखिये।
प, फ, ब, भ, म,- ओष्ठ्य कहे गए, क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है। एक बार बोल कर देखिये।


यह सही हे कि हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं  परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा मे नही है।

हमारा सीधा संबंध इस भौतिक एवम् पार भौतिक सत्ता से जोड़ता है।


रामायण और महाभारत तो आपको वैज्ञानिक दृष्टि भी प्रदान करते है जिसमें आपको सामान्य विज्ञान और एडवांस टेक्नोलॉजी भी दिखती है। हम सभी जितना हिंदी से दूर हो रहे है उतनी ही बुद्धि कुमति की ओर अग्रसर है इस बुड्ढी को सुमति की कारण है तो हमें हमारी हिंदी भाषा , संस्कृत को सुदृढ करना होगा तभी हमारे विचारो में अधिक परिवर्तन दिखेगा
क्या आपने रामायण में भविष्यवाणी सुनी ? जब लक्ष्मण भरत को मार देने के बारे में सोचता है आकाशवाणी का यही संदेश आता है बिना विचारे किसी मत पर पहुंचना बाद में पछतावे का कारण हो सकता है।
यह आकाशवाणी कोई कल्पना मात्र नहीं है यह सत्य है इसी प्रकार से पहले भविष्यवाणी होती थी यही भविष्यवाणी महाभारत में भी देखने को मिलेगी
एक द्वापर युग की कथा है और एक त्रेता युग की परन्तु कलयुग में आकाशवाणी नहीं होती सुनाई से रही है क्युकी हम सभी अपने कोर अपनी आत्मा से दूर होते जा रहे है यही कारण है हमारा जीवन व्यस्त नहीं अस्त- व्यस्त हो रहा है

“Patience”

थोड़ी बेखबरी थी

मेरी जिंदगी में
बस थोड़ी बेखबरी थी
कुछ सहमी
कुछ अकड़ी थी
एक आहट थी
दबे पाँव की सरसराहट थी
तभी मेरी एक बाह ने
दूसरी बाह पकड़ी थी जो
इस कदर जकड़ी थी मानो
लिपटी आग से एक लकड़ी थी
जिसमे मेरी जिंदगी अटकी थी
कोई एक राह सी भटकी थी

मेरी जिंदगी

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

मुड खराब

यह जो मूड है ना खराब हो जाता है
कभी कभी जो यह मूड है

कभी कभी जो यह मूड है खराब हो जाता है
अजी बिल्कुल खराब हो जाता है
जी बिल्कुल
बिल्कुल मन यू मेला कुचैला फिर
काहे खुद को तू संत बताये
चित में इतने गहरे राज छिपाए
कौन कौन कर्म कांड कियो
अब साधुपन दुनिया को दिखलाए 
बिल्कुल खराब हो जाता है
अजी मूड खराब हो जाता है।

सुबह उठते ही जब खुद का चेहरा नजर आता है
बाल उड़े नजर आते है दिमाग बेहाल हो जाता है
अजी मेरा मूड जो है खराब हो जाता है
टॉयलेट जाने का जब नंबर आता है
पानी खत्म हो जाता है

नल में पानी नही आता है
दूर से उठाकर ( धोकर ) लाना पड़ता है
अजी थक जाता हूं
पसीना बहता हूं साला इसलिए
तो मूड मेरा खराब हो जाता है
अजी मुड़ खराब हो जाता है

एक बाल्टी से ही नहाना धोना पड़ता है
अजी मूड खराब हो जाता है
नल का पानी गंदा आता है , वो भी
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे आता है
अजी मूड मेरा तो बस खराब हो जाता है

जैसे तैसा तैयार हो पाता हूं
घर से बाहर मैं निकल पाता हूं
कुछ दूर चलते ही सामने आफत हजार पाता हूं
उनको देखकर फिर मेरा
मूड खराब हो जाता है ,
कोई सिगरेट पिता हुआ
नजर आता है तो कोई गुटखा थूकता हुआ
कोई इधर थूके , और कोई कोई
उधर मूते बस ऐसा ही सब इधर उधर
नजर आता है

अजीब अजीब
इन्ह हरकतों को देख
मेरा तो सिर चकराता है
लोगो की हरकतो को देख
बिल्कुल अजीब सा हो जाता है
देख के लोगो को  खिजिया खिजिया हम गए है 

बिना किसी मतलब के पता नही
लेकिन  बस मूड खराब है
अब इसे क्या कहे की हम
मूड स्विंग जोन मैं आ गए है या
  फिर कुछ बात हो गई है यहाँ
  कुछ समझ नही आता बस
   हम मुह लटकाए ही बैठे है
और ऐसा गंभीर से चेहरा हमने यू बना लिया है
मानो हमारा सब कुछ कोई लूट लिया है
बड़ा अजीब खेल है खेला
ये मूड का भी भाई कोई समझ सकता है क्या ??

कभी सब्जी अच्छी नही बनी
तो मूड खराब हो गया है
कभी कोई बगल मैं से कोई
थूक कर
चला गया तो हो गया जी मूड खराब

किसी ने गाड़ी तेज़ चला ली तो
हो गया जी  मूड खराब

कोई कोने मैं पिसाब करता दिख गया
तो मूड खराब

मुह भर रखा है गुटखे से
तो मूड खराब

रेड लाइट जम्प करली
तो मूड खराब

रेड लाइट के बीच मैं लोग आ गए
तो मूड खराब

चलान कट गया वो हमारी गलती थी
तो भी मूड खराब

समय पर नही पहुँचे बॉस ने डांट लगाई
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस के नही
तो मूड खराब

कपड़े प्रेस की हुए हल्की सी सिलबटे भी आ गयी
तो मूड खराब

हल्का चाय मैं मीठा कम या मीठा ज्यादा
तो मूड खराब

बगल मैं से सूंदर स्त्री किसी ओर साथ है
मेरे क्यों नही है यह साथ तो यह सोचकर भी हो जाता है  मूड खराब

में कह रहा हु हर बात पर मूड खराब है क्युको में लाइफ के साथ खुस रहने को कोशिश ही नही कर रहा

और जो यह लोग मूड खराब कर रहे है वो समझ नही रहे है की कही पर कूड़ा मत डालो

च्विंगम खाई और छिलका फेक दिया कचरा छोटा है या बड़ा कचरा तो कचरा है मेरे भाई दुस्तबिन मैं बाद मैं फेक देना लेकिन रॉड पर मत फेको

हर जगह जो तुम गुटखा थूक देते बहित भद्दा लगता है जरा इसे मत थूको
कही पर भी टांग उठा कर मत मूतना शुरू करो मेरे भाई
इतना हॉर्न क्यों बजाते हो क्या सब बहरे है ????

चलो अपना गुस्सा कही निकालते है क्या ऐसा?? किसी ने कुछ कह दिया और तुम अपना गुस्सा कही और उतारने चले गए  क्यों भाई ?

फ़ोन का नेटवर्क नही आया तो बेचैन हो जाते है सभी कंपनीयो को गाली हम देने लग जाते है

जिम्मेदारी कोई उठाना नही चाहता लेकिन हम सब एक दूसरे को जिम्मेदारी का एहसास दिलाना चाहते है बड़ी अजीब बात है

आज पूरे दिन एक वीडियो वायरल हुआ मोती नगर मैं एक कावड़िये को हल्की सी ठोकर लग गयी और उसके बाद सभी कावड़ियों ने मिलकर उस कर को तोड़ दिया अब यह पूरा समझ फेसबुक शेयर और लाइक करने लग गया क्या आपने किसी फिल्मस्टार , क्रिकेटर, बिजनेसमैन जो भी बड़े ओदे पर उन्होंने यह वीडियो शेयर की ? या इस पर कोई प्रतिकिर्या दर्शायी ? नही क्योंकि उन्हें पता है किसमे उलझना चाहिए और किसमे नही आप भीड़ का समर्थन कर रहे है वो भीड़ से अलग है इसलिए आज वो वहां है और हम सब यहाँ पर

हमारा हर छोटी बड़ी बात पर बस मुड खराब होता है और उसकव कोई आकर ठीक करे यह हम चाहते है इसलिए कभी किसी पर गुस्सा निकालते है तो कभी किसी किसी पर हमेसा कंप्लेंट बॉक्स भरे नजर आते है कभी थानों मैं नजर आते है तो कभी कोर्ट मैं यह जो मामले है समझदारी से कभी नही निपटाते क्योंकि अहम बाद है भाई भाई क्यों में बात करू ? क्यों में झुक जाउ ? रिश्तों को खराब होते देखा है लेकिन सुलझ जाए ऐसा होता नही क्योंकि अहम बड़ा मेरे भाई अहम बड़ा
किस किस को समझाऊ में लेकिन खुद कभी ना समझ पाउ
दिन भर की भाग दौड़ से और उसकी व्यस्ताओं से भी हो जाता है मुड़ खराब कितने ही रोज हादसे हो रहे है दिन भर में जो घटनाये घट रही है जो हम पेपर पढ़ रहे है , tv देख रहे है उनसे भी हो जाता है मूड खराब हो जाता है इतनी वीडियो फेसबुक पर और अलग अलग तरह के पोस्ट देखकर भी मूड खराब
हर प्रकार से आजकल तो मूड ही खराब हो रहा है हम जो कुछ चाहते भी नही देखना वो भी हमे देखना पड़ता है।
सड़क पर कीचड़ तो मूड खराब , बा समय पर नही आयी तो मूड खराब कितने ही तरीको से मूड खराब हो रहा है यह क्यों हो रहा है ?
इससे पता चलता है की हमारे अंदर की जो सहनशक्ति वो कम हो रही है और जो सोचने और समझने की क्षमता है वो भी कम हो रही है।

कुछ ख्याल हम भी करने लगे

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ सवाल हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना इन सवालो का
कुछ जवाब अब हम भी देने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ बात हम भी करने लगे है
कुछ मुलाकात हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल रखना इन मुलाकातों का
इन मुलाकातों की बात अब हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ याद हम भी करने लगे है
कुछ दीदार हम भी करने लगे है
जरा ख्याल रखना तुम अपना, अपनी यादों में दीदार कर  तुम्हारा याद अब हम भी करने लगे है
कुछ ख्याल हम भी करने लगे है
कुछ अश्क़ बहने लगे है
कुछ आह भी हम भरने लगे है
जरा ख्याल रखना अश्क़ों का तुम्हारी याद आने से अश्क़ अब इन्ह आंखों से बहने लगे है।
कुछ ख्याल अब हम भी करने लगे है
के अब मुलाकाते जरूरी है
सब्र है हमे लेकिन इतना
बतादो के अब सब्र के इम्तिहान
से हम भी गुजरने लगे है

कुछ ख्याल हम भी करने लगे है

बोरियत वाला मस्तिष्क

क्या आप खाली बैठते है ?
या खाली बैठे है कुछ करने को है नही लेकिन करना बहुत कुछ चाहते है शरीर छटपटा रहा है कुछ करने को लेकिन क्या करू क्या नही बस समझ नही आ रहा है , किधर जाउ किधर नही जाउ कुछ नही समझ आ रहा है बस दिमाग खाली बैठ ऐसा लग रहा है पकता ही जा रहा है
खाली बैठे है तो फ़ोन के नंबर ही चेक करले हम कितने नंबर है हमारे फोन में या फिर कितने वॉट्सएप कॉन्टेक्ट है ? किसका मैसेज आया है किसका नहीं आदि इत्यादि ही देखले हम भी जरा
इधर उधर अखबार पढ़ले कुछ ना कुछ करले लेकिन कुछ तो करले बस यही चल रहा है लेकिन यह नही पता क्या करना चाहते है
क्या करने के लिए कुछ नही है क्या इधर उधर की बाते कर रहे है ?  क्या सोच रहे है?
या कुछ सोचनेे के लिए नही क्या कुछ सोचना चाह रहे हो कुछ सोचने की कोशिश तो कर रहे परंतु कुछ कर नही पा रहे हो आपका शरीर भी बिल्कुल सुस्त नही है किसी भी किर्या में तो आप क्यों और क्या करना चाहोगे ?
कैसे करोगे ये क्या समय है की में कर भी नही पा रहा हूं लेकिन करना चाहता हु कुछ करने को है नही हर एक चीज़ से मैं बोर से महसूस कर रहा हूं।
क्या करू?  क्या ना करू? 
बस यही एक विचार मन, मस्तिष्क में घूम रहा है कुछ काम करने को नही या काम में मन नही लग रहा कभी बाहर जाते है कभी अंदर आते है
कभी बातो को खिंचने की कोशिश करते है किसी भी काम में मन नही लग रहा किसी से बात करने का मन नही कर रहा है सिर्फ बैठे है कुछ हो नही रहा है समय भी बीत नही रहा है धीरे धीरे समय निकल रहा है घड़ी ठीक से चल रही है या नही ? बस जल्दी से समय बीत जाए यह समय क्यों नहीं बीत रहा है ?
इस मस्तिष्क के साथ अपने विचारो में क्या कभी कुछ महसूस होता है इस मस्तिष्क को पहचानो अपने इस मस्तिष्क को ये क्या करना चाहता है क्या कर रहा है?
हम सिर्फ समय बिताना चाहते है परन्तु यह नहीं देखना चाहते कि यह दिमाग क्या कहना चाहता है इस दिमाग को नहीं समझना चाहते बस इधर उधर उलझना चाहते है इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश नहीं करना चाहते