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vaccine

कौनसी vaccine अच्छी है यह भी हम सभी के मन में एक प्रश्न बना हुआ है लेकिन मै आपके लिए यह साफ कर देना चाहता हूं कि सरकार द्वारा दी जा रही दोनों ही vaccine अच्छी है जिस पर आप पूरा भरोसा करे ओर टीका लगवाए।

बिना किसी बहकावे में आए जो vaccine उपलब्ध हो उसे लगवाए ओर स्वयं को सुरक्षित करें ।

आज 31May को मैने covidshield का टीका लगवाया…अब अगली डोज लगभग 75 दिन के बाद लगेगी ओर वह भी covidshield की ही होगी इसमें भी कुछ लोगो को गलतफहमी हो जाती है कि दूसरी डोज कोई ओर लगा सकते है लेकिन ऐसा नहीं है जो डोज आपको पहली लगी है वहीं दूसरी भी लगेगी।

अभी तक तो ना ही मुझे सर्दी महसूस हो रही है ना ही कुछ ओर आपको डॉक्टर सलाह देते है अगले 5 दिनों तक आप किसी के संपर्क मे ना आए , घर से बाहर ना जाए , अल्कोहल का सेवन ना करे , सिगरेट का सेवन भी नहीं करे , अन्य कोई दवाई भी ना लेे, जिस जगह टीका लगाया गया उसे रगड़े नहीं सिर्फ रूई को वहीं पर दबाकर रखे। यदि बुखार आए तो सिर्फ Paracitamol ही इसके अलवा कुछ नहीं ले, सावधानी बरते

हम सभी सिर्फ यही सोचते है की टीका लगवा अब सब ठीक रहेगा मै बाहर घूमता हूं मुझे कुछ नहीं होगा लेकिन डॉक्टर ने यह सब भी बताया है उसका भी तो पालन कीजिए बेफिजूल में बाहर ना घूमिए।

मै अपना अनुभव शेयर करता हूं मुझे 1 पूरा दिन बुखार रहा ओर हाथ पैरो में तेज़ दर्द भी रहा यह एक अप्राकृतिक बुखार था जिसे एक vaccine की वजह आना हुआ अन्यथा इस बुखार का कोई मतलब नहीं हमारी जिंदगी में

दूसरों के बहकावे में ना आए अपनी अक्ल लगाए ओर टीकाकरण जल्द से जल्द कराए, क्युकी सावधानी हटी दुर्घटना घटी

कोरोना काल में जीवन

कोरोना काल में जीवन कैसा था, यह समय है जब सभी लोग अपने काम धंधों से भी झुझ रहे है, ओर साथ ही बीमारी से भी सभी लोग आजकल परेशान है कि आगे क्या होगा ? कैसे परिवार ओर जीवन चलेगा ? क्या हम जीवित भी रहेंगे या नहीं

हम सभी के मन में बहुत सारे ऐसे विचार आ रहे है जो हमें नकारात्मक जीवन की और धकेल रहे है क्या हम इं सभी विचारो से बाहर निकल पाएंगे या फिर जीवन कि स्तिथि ओर परिस्थती ओर भी गंभीर हो जाएगी

कोरोना काल में जीवन का क्या होगा ओर क्या नहीं यह किसी को भी नहीं पता था, इसलिए सभी बैठे है अपने घरों में , हम सभी के मन में डर घर कर चुका है।

दसवीं ओर बारहवी की परीक्षा भी अटकी हुई है कॉलेज की परीक्षा भी जैसे तैसे ले रहे है ऑनलाइन से लेकिन उससे क्या होगा ? बच्चो को किताब खोलकर पेपर देने की अनुमति दी गईं है क्या बच्चो का बौद्धिक स्तर बढ़ रहा है

ना ही बच्चो की शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है ना ही उनको कोई अवसर मिल रहा है। पिछले डेढ़ साल से बच्चे घर पर ही है अब उनका पढ़ाई से मन भी हट रहा है। जब हम सभी घर में रहने लग जाते है तो घर , परिवार के किर्या कलापो में उलझ कर रह जाते है जिससे हमारे लक्ष्य हमसे दूर हो जाते है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सभी अपने लक्ष्यों से दूर हो जाते है कुछ अपने लक्ष्यों को भेदने के लिए ओर ज्यादा तेयार होकर बाहर आते है लेकिन ज्यादातर लोग अपने लक्ष्यों से भटक जाते है ऐसा ही आजकल हो रहा है

बेरोज़गारी बढ़ रही है , व्यवसाय घट रहा है नए परिणाम नहीं आ रहे है , नया कुछ करने को नहीं मिल रहा है। गरीब मजदूर , माध्यम वर्ग ओर अमीर सभी इस बोझ के तले अब दब रहे है, की कैसे उभरेंगे फिर से

बुरा अच्छा समय

बुरा अच्छा समय  – सुख दुःख

समय सूर्य की किरण जैसे दमकता व् चलता रहता है सब ठीक चलता है हर वस्तु सुख देती है हर चीज़ सही दिशा में है. फिर लगता है सूर्य की नन्ही सी किरण भी कहीं दृष्टिगोचर नहीं होती, लगता है काले बादलो में घनघोर अँधेरा अपनी छाया से जैसे सारे प्रकाश को खा जाता है. अशुभ, अति क्रूर, दुखदायी व् आघातक समय जब आता है लगता है सब समाप्त हो जाएगा।

क्या समय कभी बुरा या अच्छा होता है?

समय तो सूर्य की तरह सदैव चमकता, चलायमान है हम जो चाहे करें, प्रतिक्रिया करें अथवा उपेक्षित कर कुछ न करें सूर्य देव एक ज्वाला बने अपनी सत्ता में रहते हैं और जीवनदायनी पृथ्वी जैसे ग्रह को ऊर्जा देते रहते हैं. काल भी इसी तरह चलता रहता है.

समय है क्या? समय काल रूप में एक आयाम है, जो दिखे न दिखे चलता रहता है कभी नहीं रुकता। समय रेखीय नहीं अर्थात एक रेखा में नहीं चक्र में घूमता है. हमारे आकाशिक ब्रह्माण्ड में मनुष्य व् देवों के लिए समय चक्र घूमता है जैसे हर ग्रह अपने कक्ष में घूमता है. युगों पूर्व जब भारत धरती के गोलाकर अटूट भूखंड का केंद्र भाग था तभी से उसके ऋषिओं को खगोल व् काल चक्रों का ज्ञान था.

समय के चक्रो को हम ३६० अंशो में बांटते हैं उनका अध्ययन करने के लिए. हर ग्रह का अपना समय चक्र है जब हम दो भिन्न ग्रहो के समय चक्रों का अध्ययन करतें हैं तो उसे नक्षत्र-विद्या भी कहते  है पर उसके अंतर सूक्ष्म प्रकाशमान ऊर्जा के प्रभावों व् पृथ्वी पर तत्वों व् जीवों पर उनके पड़ने वाले प्रभावों के अध्ययन को हम ज्योतिष भी कहते हैं. ज्योतिष शास्त्र इन्ही काल चक्रों का नियमबद्ध अध्ययन हैं. ३६० अंशो को हम ३० अंशो के १२ भागों में इसलिए बांटते हैं ताकि इनको अच्छी तरह समझा जाए, ज्ञान आत्मसार करने समझने के लिए अध्ययन को अध्यायों में बाँटना पड़ता है, जैसे पूरी रोटी आदमी के मुँह में नहीं डाल सकते उसके टुकड़े करने पड़ते हैं. पृथ्वी के अतिरिक्त अन्य दृश्य मान व् अदृश्य ग्रह हमारे आकाशगंगा ब्रह्मांड में स्थित हैं ज्योतिष विज्ञान पृथ्वी को या सूर्य को केंद्र मानकर किसी भी जन्मी सत्ता या घटना की तिथि अनुसार काल चक्रो, ग्रहो व् उपग्रहों के प्रभाव अनुसार, उसका विश्लेषण करता है.

समय ख़राब या अच्छा नहीं होता पर हर जन्मे जीव व् सत्ता पर समय चक्रो का प्रभाव बहुत सूक्षम रूप से पड़ता है. यह कोई जादू या चमत्कार नहीं है न ही कोई ज्योतिष किसी जीव या सत्ता पर केंद्रित ऊर्जा के प्रभाव से बचा सकता है, हाँ हम जान कर कोई निवारण ढूंढ सकते हैं.

समय बुरा नहीं होता, जीव के जीवन काल के कुछ हिस्से इस अवतरित जन्म में बुरे या भले होते हैं.

आप ने देखा होगा संभवतः अनुभव भी किया होगा जब हमारा अच्छा समय होता है हम नशे जैसी कृत्रम आनंद अवस्था में होते हैं. जब दुःख के काले बादल छाते हैं तो हम ईश्वर को स्मरण करते  हैं, शास्त्रों के पठन व् मन्त्र उच्चारित करके मांगते हैं के हे प्रभु रक्षा करो मुझे बचा लो, अमुक को बचा लो, वो  गिर रहा है उसे संभाल लो इत्यादि।

अदृश्य जगत से संसर्ग व् सम्पर्क

भारत के महा ज्ञानी संतो महात्माओं ने कई बार दोहराया है गाया भी है जिसे संभवतः आपने सुना भी है, की प्रार्थना अदृश्य जगत से संपर्क करने के लिए ऐसा  यन्त्र है जिसका प्रभाव है पर – वह तभी होता है जब प्रार्थना अपने सुखमय, आनंदित व् अच्छे समय में करें. चाहे हम धन्यवाद दें, उपासना करें वह कहीं नहीं जायेगी जब हम उसे अपने स्वार्थ  हेतु केवल दुःख में करें।  इसीलिए शायद ज्ञानी अन्तरध्यानी सत्ताओं को दुःख  के समय में भी इतनी पीड़ा नहीं होती जितना जन साधारण को होती है. प्रभु वह परम आत्मा सुहृदय स्थायी सत्ता है जो स्थायी रूप से सदा आनंदित है वहां पहुँच या संसर्ग का साधन केवल वह “समय” है जब हम आनंद  और सुख की चरम अवस्था में हों तभी हमारी प्रार्थना कहीं जायेगी. इस अवस्था में सम्पर्क बिना शब्दों के होता है. हमारे भाव प्रभु तक पहुँच सकते हैं और अपनी आत्मा के केंद्र में द्रवित हो मन के ऊपर पड़े विकार भी धो डालेंगे. 

दुःख ?  सुख में तो सब हमें मित्र समझेंगे पर दुःख में अपने कर्म या कोई भी साथ न दे तो हम अदृश्य जगत की शरण में जाते हैं. दुःख तो समुपस्थित या लगभग तय हैं के आएंगे ही बचना कठिन है चाहे कुछ भी करें इस जन्म में चाहे दुष्कर्म या पाप न भी हों पिछले जन्म के पाप उभरेंगे; वह भी तब जब हम कभी सोच भी नहीं सकते। सुनने में बुरा लगता है. बुरा नहीं सत्य है. सत्य सदैव कडुवा है ग्रहण करो या नहीं।

बुरा अच्छा समय

बुरे समय में प्रभु से प्रार्थना न कर उसे धन्यवाद दें के कृपया इन दुखों के सहने की क्षमता देना, जो भी हो रहा है मेरे ही अज्ञानता पूर्वक किये कार्यो के परिणाम हैं. जब समय पर पढ़े नहीं परीक्षा फल तो दुखद ही है.

बार बार धन्यवाद करें जीवन धारा अभी भी बहे जा रही है बस जल कम हो रहा है.  दुःख  के समय केवल तब आते हैं जब हम सुख में, मौज में आनंद में तो परमात्मा को भूले रहे और अब स्वार्थवश काम पड़ा तो उसे याद करलें, मंदिरो मस्जिदो में माथा रगड़ें – ऐसा करने से कुछ प्राप्त नहीं होता.

तो अच्छे समय में  प्रार्थना कर सम्पर्क स्थापति करें। बुरे समय में धन्यवाद देते रहें। जब भी कभी परमात्मा के आँखों से दर्शन करने हों तो गायों के पास जाकर बैठ जाएँ उनकी सेवा करें; किसी भी जीव जो वेदना में हैं उसे अपनी निष्काम सेवा द्वारा आरोग्य करने की चेष्टा करें, ऐसा होने पर आपका सन्देश अदृश्य जगत तक तत्काल पहुंचेगा.

यह भी पढे: समय का नहीं अवरोध, तुम्हारा खुद का समय, अच्छा समय आएगा,

इंतजार क्या है

इंतजार क्या है? यह तो आप किसी भी चीज़ का करो वो हमेसा लंबा ही होगा क्योंकि प्रतीक्षा ही ऐसी चीज़ जो समय की लंबी दूरी तय करता है और लगता है वो समय की दूरी खत्म ही नही हो रही वो वही रुक हुआ है ओर बस सब्र कर बैठ है की वो आएगा चाहे वो एक पल का इंतज़ार हो या १०० साल का इंतजार तो इंतजार ही है।

  • इंतज़ार क्या है ? यह बात तो आप एक दुकानदार से पूछिये जिसकी दुकान में सुबह से शाम बीत गयी लेकिन ग्राहक नही आया।
  • इंतज़ार को प्रेम और प्रेमिका से पूछिये जो घंटों से प्रतीक्षा कर रहे है।
  • इंतजार क्या है ? उस व्यक्ति से पूछिये जो खड़ा है बस स्टॉप पर अपने गन्तव्य स्थान पर पहुँचने के लिए उस नंबर की बस के इंतज़ार में और वो बस ही नही आ रही है बाकी सभी बसे लगातार अपनी सेवा में कार्यरत है।
  • इंतज़ार क्या है? यह आप उस मरीज से पूछिये जो हॉस्पिटल में एक कमरे को लेने के लिए इंतज़ार कर रहा है और उसे कोई कमरा खाली नही मिल रहा है ऐसा लगता है वो अंतिम सांसे अपनी इसी इंतज़ार में तोड़ देगा की कोई कमरा खाली हो और मुझे जगह मिले।
  • इंतज़ार पूछो उस मरीज से जो शायद अपनी आखिरी चन्द सांसे गिन रहा हो और यहाँ इंतज़ार हो सिर्फ डॉक्टर का, उसके इलाज का इंतजार कर रहा।
  • इंतज़ार उनसे पूछिये जो अपने केस की सुनवाई में आंखे बिछाए बैठे है लेकिन उम्र बित्त रही है फैसला नही हो रहा है 10 साल में 70 बार एक केश की सुनवाई होती है।
  • इंतज़ार उस व्यक्ति से पूछिये जो सफलता को हासिल करने में पूरी जिंदगी बिता चुका परंतु सफलता हासिल नही हुई है अब तक और भी इंतज़ार में ही बैठा हो ।
  • इंतज़ार तो आप उनसे भी पूछ सकते है जिन्होंने सरकार की आवासीय योजना में अपनी एक पीढ़ी खत्म करदी हो और अब जब वो निकल गया है उसके बाद भी अगले 5 से 10 साल इंतज़ार करना बाकी है।

इंतजार एक उम्मीद ही है जो हम सभी में उम्मीद के सहारे ही इंतजार करते है किसी चीज या इंसान का इसके अलावा कुछ ओर कर भी नहीं सकते जब हम उस परिस्थिति में होते है।

यह भी पढे: तेरा इंतजार कर रहा हूँ, रुकना तेरा काम नहीं, सवाल उठ रहे है

मन क्या है?

मन क्या है ? मन क्या चाहता है ? मन शरीर का एक अंग नही है, यह शरीर से अलग है,
मन हमेसा हम नए नए कार्यो उलझता है मन सिर्फ नए कार्य ही करने चाहता है, यह मन का स्वभाव है, यह मन की पृकृति है की यह सिर्फ नए की खोज में लगातार लगा रहे यह पुराने को भूल जाता है, छोड़ देता है हर दूसरे पल में कुछ ना कुछ नया करने की इच्छा इस मन में रहती है।

जिसकी वजह से हम कुछ ना कुछ कार्यो को करना चाहते है, और खाली बैठ नही पाते मन तो कभी इस दिमाग को व्यस्त रखता है। खाने, घूमने, खेलने, आदि कार्य करने या कुछ भी सोचने आदि के कार्यो में हमेसा उलझाए रखता है।

हम क्यों खाली खाली महसूस कर रहे है या करते है ? क्या हमारे पास कुछ नही है करने को ?
या हम कुछ अलग कुछ नया हम करना चाहते है।

हम क्यों अपने आपको खाली खाली देखते हैै ?

क्यों हमारा मस्तिष्क खाली खाली सा महसूस कर रहा है हमारा मन हमेसा नए कार्यो में नई चीज़ों की तरफ आकर्षित होता है, तथा शरीर पुराने की मांग करता है जो पिछले दिन किया था उसी कार्य को करना चाहता है परंतु मन नए कार्यो में लगाना चाहता है, ये सिर्फ कुछ स्थानों पर शांति चाहता है जैसे बीते हुए दिन में क्या हुआ था ? वही दुबारा चाहता है।

उसी को बार बार दोहराना चाहता है शरीर आलसी है, मन नित नए कार्यो की अग्रसर होता है, अर्थात यह मन नया चाहता है, इसलिए हमेसा हम एक छोर को छोड़ते है, तो दूसरे छोर की और भागते है, एक कार्य पूरा नही होता बस दूसरेे कार्य में लग जाना चाहते है, एक मिनट भी हम मन हमे खाली बैठने नही देता बस किसी ना किसी कार्य में लगातार लगाए रखता है।

यह भी पढे: यह मन भी, लिखने का मन, मन, मूड को जरा संभाल, यह मन अधीर,