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गदर 2

किरदार गदर 2 : सनी देओल , अमीषा पटेल , उत्कर्ष शर्मा , सिमरत कौर , लव सिंह ओर मनीष वध्वा

सनी देओल ने कितनी ही हल्की फिल्म की हो लेकिन उनकी ऐक्टिंग बहुत शानदार रहती है, इनको देखने बाद तो यही लगता है, की ये ट्रक को भी उठाकर फैक देंगे जब गुस्से में होते है, फिर हथोड़े से पिटाई इनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है। और ऐसा ही कुछ दिखा सनी पाजी की गदर 2 में , कुछ भी कर सकते है सनी पाजी , उनके चेहरे को देखकर ही लोग डर जाते है वो जब गुस्से में होते है।

कुछ सीन ऐसे आते है, जहां आप खुद ही खड़े होकर चिल्लाने लग जाए आपका ऐसा मन करता है, सिनेमा हाल में लोग भारत माता की जय के नारे लगाते दिखे, ये मोमेंट कैमरे में तो कैद नही कर पाया लेकिन लोगो का समूह खुद जोर जोर से भारत माता की जय , भारत जिंदाबाद था , जिंदाबाद है, और जिंदाबाद रहेगा के नारे गूंजते रहे।

गदर 2
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फिल्म पहले हाफ में थोड़ी धीमी चलती है, लेकिन दूसरे हाफ में जोर पकड़ लेती है, फिल्म की कहानी को घुमाकर लाने में अनिल शर्मा को थोड़ी मेहनत करनी पड़ी है, लेकिन फिर भी अनिल शर्मा दम पूरा लगा नहीं पाए ऐसा लगता है, पहले हाफ में फिल्म आपको बांध नहीं पाती है , और आप सीट के साथ चिपककर बैठना पसंद नहीं करते।

गदर 2 का म्यूजिक जो गदर एक प्रेम कथा में मैजिक करता है, हमारे मन में अपने आप ही गानों में खो जाता था , लेकिन वो गदर-2 में नहीं दिखाई पड़ता, तो गानों का जादू भी हल्का है लेकिन उत्कर्ष शर्मा ओर सिमरत का एकसाथ एक गाना है जिसमे दोनों अच्छे लगते है।

यह फिल्म सिर्फ 90s की याद दिलाती है , जीते उर्फ उत्कर्ष शर्मा की एक्टिंग पहले हाफ में कुछ हल्की लगती है, लेकिन दूसरे हाफ में उनकी ऐक्टिंग बहुत बढ़िया हो जाती है इनको दुबारा आगे फिल्मों में देखा जा सकता है। लेकिन यहाँ ऐसा लगता है की उत्कर्ष शर्मा को लॉन्च करने की कुछ ज्यादा जल्दी थी।

एक्शन सीन मे हाई टेक्नॉलजी की ज्यादा उम्मीद नहीं करे क्युकी यह 70-80 दशक के दौर की कहानी है, और अभी भी लगभग वही दौर चलता है इस फिल्म के हिसाब से ओर उतनी ही उम्मीद करते है।

फिल्म का निर्देशन: फिल्म की कहानी को निर्देशक ने बना ही दी उन पुराने पहलुओं को जोड़कर लेकिन कहानी में दम फिर भी कम ही दिखा , निर्देशन और बेहतर हो सकता था, कहानी धीमी पड़ जाती है। पहले हाफ में लेकिन फिल्म को दूसरे भाग में अच्छा बनाने की कोशिश की है उस कोशिश में काफी कामयाब भी हुए है।

फिल्म में स्कारात्मक पहलू : सनी देओल ही इस फिल्म की जान है जो फिल्म को एक अलग लेवल पर रखते है , उत्कर्ष शर्मा की एक्टिंग दूसरे भाग में बेहतर हो जाती है , फिल्म का क्लाइमैक्स अच्छा है, आखिरी में सिमरत ने भी किरदार अच्छा निभाया है , सकीना उर्फ अमीषा पटेल फिल्म की जान नहीं बन पाई इस फिल्म में

फिल्म में नकारात्मक पहलू : फिल्म का निर्देशन कुछ कमजोर दिखा है, इसलिए फिल्म काफी साधारण लगती है, जितनी उम्मीद की थी उससे खरी नहीं उतरती। सनी देओल को लगभग 1 घंटे तक फिल्म में से गायब रखा है ये बहुत ही नेगटिव पार्ट है इस फिल्म का , कुछ डाइअलॉग काफी कमजोर है।

फिल्म का कॉमेडी सीन जो हैंडपम वाला है जैसे ही सनी देओल हैंडपंप उखड़ने के लिए जाते है सभी लोग भाग खड़े होते है, यह सीन याद दिलाता है पुरानी गदर की ओर ये हेंडपम्प वाला सीन आप भूलेंगे नहीं।

कुल मिलकर पारिवारिक फिल्म है जो बहुत लंबे समय बाद आई है , बहुत ज्यादा उम्मीद हाई एक्शन सीन की उम्मीद लगाकर थीअटर में नया जाए बस सनी ओर सकीना की जोड़ी देखे ओर अपने परिवार संग ये फिल्म देखे आपको फिल्म जरूर पसंद आएगी।